चालान: अगर आप पर लगा है भारी जुर्माना तो अपनाएं ये कानूनी उपाय, मिलेगी राहत!

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Updated: September 11, 2019, 11:03 PM IST
चालान: अगर आप पर लगा है भारी जुर्माना तो अपनाएं ये कानूनी उपाय, मिलेगी राहत!
ट्रैफिक रूल्स को तोड़ने पर जुर्माने की नई दरें 1 सितंबर से लागू हो चुकी हैं. इन नियमों के लागू होने के बाद से ही दिल्ली-एनसीआर समेत देश भर में लोगों में दहशत का माहौल है.

नए मोटर व्हीकल एक्ट (New motor vehicle act) के लागू होने के बाद से भारी-भरकम चालान (Challan) के मामले सामने आ रहे हैं. लेकिन इन चालानों से राहत पाने के लिये कानूनी उपाय क्या हैं? ये हम आपको बताएंगे.

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नई दिल्ली. ट्रैफिक रूल्स (new Motor Vehicle (Amendment) Act 2019 ) को तोड़ने पर जुर्माने की नई दरें 1 सितंबर से लागू हो चुकी हैं. इन नियमों के लागू होने के बाद से ही दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) समेत देश भर में लोगों में दहशत का माहौल है. सरकार ने नया मोटर व्हीकल एक्ट (new Motor Vehicle Act) लागू क्या किया, नियम तोड़ने के आरोप में लोगों पर भारी भरकम जुर्माने सामने आने लगे. गुरुग्राम में स्कूटी पर 23 हजार जुर्माना ठोंक दिया गया तो दिल्ली में भारी जुर्माने से आहत एक शख्स ने अपनी बाइक को ही आग लगा दी. इसके अलावा एक ऑटो वाले पर 32 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया, जबकि एक ट्रैक्टर का 59 हजार रुपये का चालान काटा गया. नए कानून लागू होने के बाद से भारी-भरकम चालान के मामले सामने आ रहे हैं. लेकिन इन चालानों से राहत पाने के लिये कानूनी उपाय क्या हैं? ये हम आपको बताएंगे.

जब आपको इतने भारी भरकम जुर्माने का सामना करना पड़े तो आपके पास क्या विकल्प बचता है. आपके साथ कानून है और आप अदालत में कानूनी के सहारे राहत पा सकते हैं.

ये है प्रक्रिया
1- चालान टू कोर्ट ही होगा, यानी ऑन स्पॉट नहीं होगा. मतलब चालान का भुगतान करने के लिए आपको कोर्ट ही जाना होगा.

2- अदालत में ट्रैफिक पुलिस का एक रजिस्टर मिलेगा जिसमें आपको आपके चालान नंबर और गाड़ी नंबर दर्ज होगा और किस नियम को तोड़ने पर आपका चालान हुआ है.

3- रजिस्टर में अपना ब्यौरा देखकर अदालत में अर्जी लगानी होगी. इसके बाद आपको खुद या वकील के जरिये अपनी दलील तैयार करानी होगी और उसके बाद अदालत में पेश करना होगा.

अब आपको दो ऑप्शन मिलेंगे- अपराध कबूल करने और न करने के अगर आपने अपना अपराध कबूल कर लिया तो तय रकम का अदालत में ही भुगतान करनी होगी. अगर आपने अपना अपराध कबूल नहीं किया तो अदालत में अपने बचाव के लिये दलील रखनी होगी. अदालत संबंधित पुलिस अधिकारी को आपके खिलाफ गवाह पेश करने के लिए कहेगी और अरोपों को साबित करने के लिये पुलिस को गवाह पेश करना होगा.
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अगर रजिस्टर में दर्ज गवाह के बयान में विरोधाभास पाया गया तो अदालत आपका जुर्माना माफ कर सकती है या कम किया जा सकता है. अगर आपका अपराध साबित भी हो जाए तो आप दोबारा गलती ना करने की कोर्ट से गुहार लगा सकते हैं. ऐसे में अदालत आपका जुर्माना कम कर सकती है. अगर किसी वजह से आप अदालत नहीं जा सकते तो मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 208 के तहत आप अदालत में अपनी बात रख सकते हैं. किसी कारण से पुलिस आपकी गाड़ी जब्त कर लेती है तो आप अदालत में ओरिजनल कागज पेशकर अपनी गाड़ी वापस पा सकते हैं. चालान जिस इलाके में कटा है, कार्यवाही उसी इलाके की अदालत में होगी.

अक्सर मामले साबित नहीं कर पाती पुलिस
सुप्रीम कोर्ट के वकील विष्णु जैन का कहना है कि पुलिस चालान तो काट देती है लेकिन अधिकतर मामलों में अपना केस साबित नहीं कर पाती. क्योंकि मोटर व्हीकल एक्ट के मुताबिक, चालान पर कम से कम एक गवाह के साइन होना जरूरी है और कई मामलों में ये साइन फर्जी पाए जाते हैं.

यही नहीं, आपकी सुविधा के लिये दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में पायलट प्रॉजेक्ट के तौर पर वर्चुअल कोर्ट पोर्टल यानी vcourts.gov.in शुरू किया गया है. जहां ट्रैफिक चालान का ऑनलाइन भुगतान आसानी से किया जा सकता है. फिलहाल इन विकल्पों को आजमाकर आप ट्रैफिक पुलिस की भारी भरकम जुर्माने से अपना बचाव कर सकते हैं.

(सुशील पांडेय न्यूज़ 18 दिल्ली)


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First published: September 11, 2019, 8:23 PM IST
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