चुनाव आयोग ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा, कैदियों को नहीं है वोटिंग का अधिकार

चुनाव आयोग ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत कैदियों को मतदान का अधिकार नहीं है और उच्चतम न्यायालय ने इसे बरकरार रखा है.

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Updated: August 5, 2019, 10:31 PM IST
चुनाव आयोग ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा, कैदियों को नहीं है वोटिंग का अधिकार
चुनाव आयोग ने दिल्ली हाईकोर्ट से कहा, कैदियों को नहीं है वोटिंग का अधिकार. (फाइल फोटो)
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Updated: August 5, 2019, 10:31 PM IST
चुनाव आयोग ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत कैदियों को मतदान का अधिकार नहीं है और उच्चतम न्यायालय ने इसे बरकरार रखा है. चुनाव आयोग ने कहा कि वोट देने के हक को जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 62 के तहत वैधानिक अधिकार बनाया गया है तथा कानून के तहत, “वोट के अधिकार को वैधानिक अधिकार बनाने की व्याख्या जनप्रतिनिधित्व कानून में शर्तों के अंतर्गत है.’’

चुनाव आयोग ने कैदियों के वोटिंग के अधिकार के खिलाफ उच्चतम न्यायालय के 1997 के फैसले का हवाला दिया. चुनाव आयोग ने न्यायमूर्ति डीएन पटेल और न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर की पीठ के समक्ष हलफनामे में यह कहा है. कानून के तीन छात्रों ने एक याचिका दायर कर मांग की थी कि देश भर की जेलों में बंद सभी लोगों को मतदान का अधिकार प्रदान किया जाए.

याचिका में जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 62 (5)  की वैधानिकता को चुनौती दी गई जिसके तहत कैदियों को वोट के अधिकार से वंचित किया जाता है. कानून के तीन छात्रों प्रवीण कुमार चौधरी, अतुल कुमार दुबे और प्रेरणा सिंह ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि कैदियों के वोट देने के अधिकार पर प्रतिबंध संविधान की मूल भावना के विपरीत तथा समानता के बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन है.

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First published: August 5, 2019, 10:31 PM IST
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