हिन्दू शरणार्थियों की मदद को जा रही टीम का बना मिजोरम एंट्री पास, लेकिन रूकने को नहीं दी जगह

टीम को 6 दिन से ज्यादा रुकने की अनुमति भी नहीं होगी. शरणार्थियों की मदद को आवाज़ उठाने के लिए भारत हितरक्षा अभियान चलाया जा रहा है.

नासिर हुसैन | News18Hindi
Updated: August 30, 2019, 9:51 AM IST
हिन्दू शरणार्थियों की मदद को जा रही टीम का बना मिजोरम एंट्री पास, लेकिन रूकने को नहीं दी जगह
फोटो- मिजोरम से बाहर रहने वाले किसी भी भारतीय को वहां जाने के लिए यह पास बनवाना जरूरी होता है.
नासिर हुसैन
नासिर हुसैन | News18Hindi
Updated: August 30, 2019, 9:51 AM IST
वैसे तो संविधान में एक खास दर्जे के चलते मिजोरम में एंट्री के लिए दो तरह का परमिट लेना होता है. लेकिन 22 साल से मिजोरम से बाहर रह रहे 40 हजार हिन्दू शरणार्थियों की मदद के लिए जा रही एक टीम को भी एंट्री पास बनवाना पड़ा.

लेकिन उसके साथ एक शर्त भी लगा दी कि टीम को मिजोरम में रहने के लिए कोई जगह नहीं दी जाएगी. और तो और टीम को 6 दिन से ज्यादा रुकने की अनुमति भी नहीं होगी. शरणार्थियों की मदद को आवाज़ उठाने के लिए भारत हितरक्षा अभियान चलाया जा रहा है.

2 सितम्बर से शुरु हो रहे इस अभियान के तहत टीम राष्ट्रपति, पीएम नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह से भी मुलाकात करेगी. उन्हें ज्ञापन सौंपे जाएंगे. इसके साथ ही टीम मिजोरम, त्रिपुरा की सरकार से भी मिलेगी. शरणार्थियों के बीच रुककर उनकी परेशानियों को जानेगी.

फोटो- 22 साल से ब्रू जनजाति के वैष्णव हिन्दू मिजोरम के बाहर शरणार्थी कैम्प में रह रहे हैं.


क्यों जरूरी है मिजोरम के लिए एंट्री पास

40 हजार हिन्दू शरणार्थियों की मदद के लिए जा रही टीम के वरिष्ठ सदस्य अभय कुमार जैन बताते हैं कि मिजोरम को संविधान में एक खास दर्जा मिला हुआ है. इसी के चलते देश के किसी भी नागरिक को मिजोरम में एंट्री करने के लिए पास बनवाना होता है. यह पास दो तरह 6 दिन और 6 महीने का होता है. पास बनवाने के लिए मिजोरम आने की वजह बतानी होती है. साथ ही एंट्री पास की फीस भी जमा करनी होती है. पास के साथ यह शर्त भी होती है कि किसी भी जगह मांगने पर आपको पास दिखाना होता. और पास जारी करने वाली ऑथरिटी पास को कैंसिल भी कर सकती है.

फोटो- कैम्प में रहने वाले हिन्दू शरणार्थियों को पीने का पानी भी इस तरह से जुटाना पड़ता है.

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150 लोगों की टीम का बना है 6 दिन का एंट्री पास

मिजोरम की ब्रू जनजाति (वैष्णव हिन्दू) के 40 हजार शरणार्थी 22 साल से त्रिपुरा की पहाड़ियों पर रह रहे हैं. एक इन्हीं शरणार्थियों की बात को मिजोरम सरकार के पास रखने के लिए 150 सदस्यों की एक टीम मिजोरम जा रही है. टीम मिजोरम सरकार से बात करने के साथ ही शरणार्थी कैम्प में जाकर उनकी समस्याओं को भी सुनेगी. 2 सितम्बर को यह टीम दिल्ली से मिजोरम के लिए रवाना होगी. टीम में करीब 150 लोग शामिल रहेंगे. खास बात यह है कि टीम के सभी 150 लोगों को मिजोरम में एंटी करने के लिए टैम्परेरी इनर लाइन पास बनवाना पड़ा है.

फोटो- भारत हितरक्षा अभियान के तहत इस तरह से जगह-जगह ज्ञापन देकर हिन्दू शरणार्थियों की आवाज़ को उठाया जा रहा है.


रहने को जगह नहीं दी तो अब ऐसे रुकेगी टीम

अभय कुमार जैन ने बताया कि मिजोरम का एंट्री पास जारी करते हुए प्रशासन ने साफ कर दिया था कि टीम को मिजोरम में रहने के लिए कोई जगह नहीं दी जाएगी. रहने और ठहरने के लिए खुद से इंतजाम करना होगा. इसे देखते हुए टीम को ठहराने के लिए जो रणनीति बनाई गई है उसके अनुसार मिजोरम में टीम के लोगों के जो परिचित हैं उनके घरों पर 5 से लेकर 10 सदस्य से ठहराए जाएंगे.

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First published: August 30, 2019, 9:51 AM IST
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