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पुलिसकर्मियों के परिवारवाले बोले- त्योहार में घर से दूर ड्यूटी निभाने का इनाम पिटाई है?

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Updated: November 6, 2019, 5:52 PM IST
पुलिसकर्मियों के परिवारवाले बोले- त्योहार में घर से दूर ड्यूटी निभाने का इनाम पिटाई है?
दिल्ली पुलिस के परिवारवालों ने पूछा है कि क्या पुलिसवालों का कोई मानवाधिकार नहीं होता है? (प्रतीकात्मक तस्वीर)

पुलिस (Police) और वकीलों (Lawyers) के बीच दिल्ली (Delhi) की तीस हजारी कोर्ट (Tis Hazari Court) में हुई झड़प को लेकर विवाद इतना बढ़ा कि पुलिसकर्मियों हेडक्वार्टर के बाहर मंगलवार पूरे दिन धरना दिया.

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  • Last Updated: November 6, 2019, 5:52 PM IST
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प्रियंका कांडपाल
नई दिल्ली.
 दिल्ली पुलिस (Police) और वकीलों (Lawyers) के बीच दिल्ली (Delhi) की तीस हजारी कोर्ट (Tis Hazari Court) में हुई झड़प को लेकर विवाद इतना बढ़ा कि पुलिसकर्मियों ने हेडक्वार्टर के बाहर मंगलवार को पूरे दिन धरना दिया. ऐसा शायद पहली बार हुआ हो. पुलिसवालों ने अपने ही डिपार्टमेंट के खिलाफ नारेबाजी की. दिनभर पुलिस और मीडिया का जमावड़ा पुलिस हेडक्वार्टर पर रहा. शाम को खबर आई कि पुलिकर्मियों के परिवारवाले इंडिया पहुंचेंगे.

इंडिया गेट की तरफ बढ़ रहे थे बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग
तकरीबन चार बजे दो बसों से महिलाएं, बच्चे और कुछ बुजुर्ग हाथ में तख्तियां लिए मान सिंह रोड से इंडिया गेट की तरफ मार्च करने लगे. इन सभी के चेहरों पर लगभग एक से ही भाव थे. गुस्सा, मायूसी, डर और सबसे ज्यादा बेबसी. ये वो लोग थे, जिनके परिवार वाले पुलिस में है. महिलाएं सबसे ज्यादा संख्या में थीं. महिलाएं गुस्से में थीं. एक महिला का कहना था कि अगर कोई शख्स पुलिस की वर्दी में सुरक्षित नहीं, तो आम लोगों की सोचिए.

महिलाओं का फूटा गुस्सा
महिलाओं में गुस्सा तो था ही, पर दर्द उससे भी ज्यादा था. एक महिला का कहना है कि पुलिस वाले 36-36 घंटे नौकरी करते हैं. जब जरूरत पड़ती है तो घर से निकल पड़ते हैं. एक भी त्योहार में अपने घर पर नहीं होते. इसके बदले सरकर उन्हें ये इनाम दे रहे रही है? एक महिला अपने पांच महीने के बच्चे के साथ वहां आई थी. उनके पति पुलिस में हैं. उन्होंने कहा- 'मेरे पति जब तक नौकरी से लौटकर घर नहीं आते, वो डर के साये में जीती हैं. आज भी न्याय मांगने के लिए वो अपने दूध पीते बच्चे को लेकर आई हैं.'

'पुलिसवालों का मनोबल न टूटे'
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एक महिला बेहद गुस्से में थी. हाथों में काला बैंड लगाए वो सबसे पूछ रही थी क्या पुलिस वालों का कोई मानवाधिकार नहीं होता? क्या वो मार खाने के लिए देश सेवा कर रहे हैं? एक बुजुर्ग महिला ने यहां तक कहा- 'अपने बच्चे मैंने पुलिस में इसलिए नहीं भेजे थे कि वो काले कोट वाले गुंडों से पिटें.' सभी महिलाओं का ये कहना था कि सरकार और डिपार्टमेंट को ये देखना चाहिए कि पुलिस का मनोबल न टूटे.

क्या बोली धरने में शामिल छोटी बच्ची
एक छोटी बच्ची भी इस शांतिपूर्ण धरने में शामिल हुई. उसने कहा कि मैं अपने पापा और उनके दोस्तों के लिए न्याय मांगने आई हूं. अमर जवान ज्योति के पास पहुंचकर सभी ने मोमबत्तियों को रोशन किया. यही सोचके कि इसकी रोशनी पुलिस हेडवक्वार्टर में बैठे आला अधिकारियों तक पहुंचे.

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First published: November 6, 2019, 5:30 PM IST
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