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अरुण जेटली के तेवर : सुप्रीम कोर्ट में सक्रिय है नेक्सस, विपक्ष के हैं दोहरे मापदंड

News18Hindi
Updated: January 17, 2019, 3:28 PM IST
अरुण जेटली के तेवर : सुप्रीम कोर्ट में सक्रिय है नेक्सस, विपक्ष के हैं दोहरे मापदंड
अरुण जेटली

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपने फेसबुक ब्लॉग में लिखा है कि कुछ लोग स्वार्थ के कारण एनडीए सरकार की सत्ता में वापसी नहीं चाहते हैं इसलिए सरकार के खिलाफ लगातार दुष्प्रचार कर रहे हैं. जजों के मामले पर जेटली के तेवर कुछ ऐसे दिखे.

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  • Last Updated: January 17, 2019, 3:28 PM IST
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केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कई अहम मुद्दों पर विपक्ष पर बड़ा हमला बोला. जेटली ने एक बार फिर अपने ब्लॉग के ज़रिए नोटबंदी, जीएसटी, सीबीआई, आरबीआई, राफेल सौदे, सुप्रीम कोर्ट और जज लोया की मौत को लेकर जवाब दिया. सीबीआई केस में ज़रूर उन्होंने मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम लिया लेकिन बाकी मामलों में वह किसी का नाम लेने से बचते हुए दिखाई दिए.

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जजों के मामले पर: जेटली उवाच
करीब एक साल पहले सुप्रीम कोर्ट के चार माननीय जजों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी जिसके कारण देश की न्याय व्यवस्था को जो धक्का लगा, वह कई लोगों की सोच से भी परे था. इसके कारण जज अपने ही क्षेत्र में संघर्ष करते हुए और जनता के सामने धड़ों में बंटे हुए दिखे.

अन्य न्यायालयों की तरह सुप्रीम कोर्ट में भी कुछ अति उत्साही वकील प्रैक्टिस कर रहे हैं. इनका मकसद कोर्ट में दबदबा बनाना है. ये लोग केस से वॉकआउट करने की धमकी देते हैं, अपनी राजनीतिक क्षमताओं और पहुंच का प्रयोग करते हुए अभियोग चलाने की भभकियां देते हैं और जजों पर जनता के सामने के कमेंट करते हैं. ये लोग कोर्ट को डराने के लिए मीडिया का इस्तेमाल करते हैं.

पूर्व चीफ जस्टिस धुर विरोधियों का निशाना बने थे. ये विरोधियों जो ज़ोर आज़माइश करते हैं, उसका नतीजा यह होता है कि भारत की न्यायपालिका की स्वतंत्रता के खतरा पैदा करने वाला एक दबाव बनता है.

धुर विरोधियों के इशारे पर चलने वाले एक अखबार में कॉलेजियम की कार्यवाहियों और मंत्रणाओं को पिछले दो सालों से लगातार रिपोर्ट किया जा रहा है लेकिन यह एक दुष्प्रचार ही है. सुप्रीम कोर्ट में नियुक्तियों के संबंध में जैसा कि पिछले साल किया गया, अगर विधि मंत्री वरिष्ठता का सिद्धांत लागू करते हैं, तो ये विरोधी इसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमला करार देते हैं.
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ताज्जुब की बात यह है कि जब यही विरोधी खुद वरिष्ठता के आधार पर नियुक्ति के नियम की वकालत करते हैं, तो इसे व्यवस्था की स्वतंत्रता के लिए लड़ाई के तौर पर प्रचारित करते हैं, जो कि हाल में हमने भी किया लेकिन तब उनका रुख कुछ और था. ये दोहरे मापदंड हैरान करने वाले हैं.

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First published: January 17, 2019, 3:28 PM IST
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