आयुष्मान भारत के बिना भी ऐसे हो सकता है गंभीर बीमारियों का मुफ्त में इलाज, ये है तरीका

मोदी सरकार कुछ ऐसे अस्पतालों को भी फंड जारी करती है, जो आर्थिक रूप से गरीब लोगों को मुफ्त में या कम पैसे में इलाज करते हैं.

Ravishankar Singh | News18Hindi
Updated: July 29, 2019, 4:28 PM IST
आयुष्मान भारत के बिना भी ऐसे हो सकता है गंभीर बीमारियों का मुफ्त में इलाज, ये है तरीका
देश के कुछ बड़े अस्पतालों में आपका इलाज कम पैसों में और मुफ्त में संभव है
Ravishankar Singh
Ravishankar Singh | News18Hindi
Updated: July 29, 2019, 4:28 PM IST
अगर आप किसी गंभीर बीमारी से अचानक ग्रस्त हो गए हैं तो परेशान मत होइए. अगर आप आयुष्मान भारत योजना या राज्य सरकार की किसी भी हेल्थ स्कीम में रजिस्टर्ड नहीं हैं तो भी निराश मत होइए. देश के कुछ बड़े अस्पतालों में आपका इलाज कम पैसों में या मुफ्त में संभव है. मोदी सरकार राष्ट्रीय आरोग्य निधि के तहत कुछ अस्पतालों को फंड जारी करती है, जिसकी वजह से आर्थिक रूप से गरीब लोगों को मुफ्त में या कम पैसे में इलाज कराने में मदद मिलती है.

भारत सरकार की राष्ट्रीय आरोग्य निधि  (आरएनएन) योजना के अंतगर्त कोई भी गरीब आदमी अपना इलाज करवा सकता है. यह योजना गरीबी रेखा से नीचे के रोगियों को आर्थिक मदद देती है. इस योजना का लाभ लेने के लिए कुछ जरूरी दस्तावेज आपको पेश करने होंगे और आप देश के सरकारी सुपर स्‍पेशिएलिटी अस्‍पताल में अपना इलाज करवा सकते हैं.

इस समय देश के अलग-अलग राज्यों के 13 केन्‍द्रीय सरकारी अस्‍पतालों में यह सुविधा उपलब्ध है
इस समय देश के अलग-अलग राज्यों के 13 केंद्रीय सरकारी अस्‍पतालों में यह सुविधा उपलब्ध है


बता दें कि राष्ट्रीय आरोग्य निधि (आरएनएन) के तहत वित्‍तीय सहायता प्राप्‍त करने के लिए रोगी को निम्‍नलिखित दस्‍तावेज प्रस्‍तुत करना आवश्‍यक है.

1-सरकारी अस्‍पताल / संस्‍थान के उपचार करने वाले चिकित्‍सक के हस्‍ताक्षर के साथ मेडिकल सुपरिटेंडेंट के भी आवेदन पत्र पर हस्ताक्षर अनिवार्य
2-आय प्रमाण पत्र की भी प्रतिलिपि लगानी अनिवार्य है. गरीबी रेखा से नीचे का कागज
3-राशन कार्ड की प्रतिलिपि भी अनिवार्य है.
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इन अस्पतालों में मुफ्त सुविधा
इस समय देश के अलग-अलग राज्यों के 13 केंद्रीय सरकारी अस्‍पतालों में यह सुविधा उपलब्ध है. प्रत्येक संस्थान में प्रत्‍येक मामले में 2 लाख रुपये तक का उपचार हेतु देने का प्रावधान किया गया है. वित्‍तीय सहायता देने के लिए अस्पतालों को उनके अधिकार में 50 लाख रुपये तक (ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस-एम्स नई दिल्ली के मामले मे 90 लाख रुपये तक) की राशि स्वीकृत है. अगर मरीज के 2 लाख रुपये से अधिक उपचार में खर्च हो रहे हैं तो इसके लिए यह राशि स्वीकृत करने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय को भेजा जाता है.

इस समय देश के अलग-अलग राज्यों के 13 केन्‍द्रीय सरकारी अस्‍पतालों में यह सुविधा उपलब्ध है.
इस समय देश के अलग-अलग राज्यों के 13 केंद्रीय सरकारी अस्‍पतालों में यह सुविधा उपलब्ध है.


इस समय देश के अलग-अलग राज्यों के 13 केंद्रीय सरकारी अस्‍पतालों में यह सुविधा उपलब्ध है.

1-अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली
2-डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल, नई दिल्ली
3-सफदरजंग अस्पताल, नई दिल्ली
4- लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज और श्रीमती सुचेता कृपलानी अस्पताल, नई दिल्ली
5- स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान ससंस्थान (पीजीआईएमईआर) चंडीगढ़
6- जवाहरलाल स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (जेआईपीजीएमआर) (जिपमेर)-पुडुचेरी
7- राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान(एनआईएमएिएएनएस) निम्हांस, बेंगलुरु
8-संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीटयूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एसजीपीजीआईएमएस), लखनऊ
9- चितरंजन राष्ट्रीय कैंसर संस्थान, कोलकाता
10- गांधी मेमोरियल और एसोसिए़़टेड हाॉस्पिटल (केजीएमसी) लखनऊ
11- पूर्वोत्तर इंदिरा गांधी क्षेत्रीय स्वास्थ्य एवं आयुर्विज्ञान संस्थान, एनईआईजीआरआईएएमएस-शिलांग
12-क्षेत्रीय आयु्र्विज्ञान संस्थान (आरआईएमएस)-इम्फाल
13 शेरे कश्मीर आयुर्विज्ञान संस्थान, श्रीनगर

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First published: July 29, 2019, 4:03 PM IST
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