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अंबाला कैंट: हरियाणा के तीन लालों के दौर में भी इस विधानसभा सीट पर चला बीजेपी सिक्का!

News18Hindi
Updated: October 5, 2019, 1:01 PM IST
अंबाला कैंट: हरियाणा के तीन लालों के दौर में भी इस विधानसभा सीट पर चला बीजेपी सिक्का!
अंबाला कैंट में पंजाबी वोटरों का दबदबा है

विज्ञान नगरी की इस सीट पर सुषमा स्वराज पहली बार 1977 में विधायक चुनी गईं थीं, यहां 12 बार हुआ चुनाव, 4 बार लहराया भगवा झंडा!

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  • Last Updated: October 5, 2019, 1:01 PM IST
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नई दिल्ली.भारतीय जनसंघ (BJS) का जिन चुनिंदा सीटों पर प्रभाव रहा है उनमें से अंबाला कैंट (Ambala Cantt) भी एक है. इस शहर को हरियाणा की विज्ञान नगरी (Science City) भी कहा जाता है. क्योंकि यहां उद्योगों में वैज्ञानिक उपकरण बनते हैं. भारत के वैज्ञानिक उपकरणों का लगभग 40 फीसद प्रोडक्शन अंबाला में ही होता है. चंडीगढ़ के शेरशाह सूरी मार्ग पर स्थित यह एक एतिहासिक जगह है. यहां पंजाबी वोटरों का दबदबा है. भाजपा (BJP) की वरिष्ठ नेत्री सुषमा स्वराज (Sushma Swaraj ) पहली बार 1977 में इसी सीट से विधायक चुनी गईं थीं. उनके खिलाफ स्वामी अग्निवेश ने चुनाव लड़ा था. सुषमा चुनाव जीतकर देवीलाल की सरकार में सिर्फ 25 साल की उम्र में ही मंत्री बनने का रिकॉर्ड बनाया. तब सुषमा जनता पार्टी में थीं.

हरियाणा की राजनीति में जब देवीलाल, बंसीलाल और भजनलाल की तूती बोलती थी तब भी इस सीट पर जनसंघ और बीजेपी या उसके विचारों के समर्थक विधायक बनते रहे हैं. अक्सर अपने बयानों से सुर्खियों में रहने वाले हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज सबसे ज्यादा चार बार यहां के विधायक चुने गए हैं. इस साल के विधानसभा चुनाव (Haryana Assembly Election) के लिए भी वो बीजेपी की ओर से फिर टिकट की दौड़ में हैं.

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इस सीट पर जनसंघ, बीजेपी का दबदबा रहा है


साल 1966 में हरियाणा प्रदेश के गठन हुआ. इसके एक साल के बाद विधानसभा चुनाव हुए. तब यहां कांग्रेस के डीआर आनंद पहले विधायक चुने गए. उन्होंने भारतीय जनसंघ के प्रत्याशी को हराया था. राजनीतिक परिस्थितियां कुछ ऐसी बनीं कि 1967 में दोबारा चुनाव हुए. कांग्रेस ने डीआर आनंद को फिर मैदान में उतारा. लेकिन जनसंघ ने अपना प्रत्याशी बदल दिया. उसने लाला भगवान दास सहगल को टिकट दिया. जो पाकिस्तान के जिला झंग के छोटे से गांव कोट उस्सर से बंटवारे के समय खाली हाथ भारत आए थे. मजदूरी करते-करते आढ़ती बने और फिर जनसंघ का नेता. भगवान दास ने कांग्रेस को हरा दिया.

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इस सीट पर सबसे अधिक बार अनिल विज विधायक बने हैं


सुषमा स्वराज को इस सीट से 1987 के चुनाव में बीजेपी ने मैदान में उतारा और वो चुनाव जीत गईं. अनिल विज इस सीट से पहली बार 1996 में विधायक बने, लेकिन तब वो निर्दलीय थे. साल 2000 में भी उन्होंने निर्दलीय ही चुनाव जीता. लेकिन 2009 और 2014 में उन्होंने बीजेपी की टिकट पर जीत हासिल की. देखना यह है कि क्या इस सीट पर वो नया रिकॉर्ड बनाएंगे या फिर उन्हें हराकर कोई उनका गढ़ तोड़ पाएगा.  हरियाणा के वरिष्ठ पत्रकार नवीन धमीजा कहते हैं कि अंबाला पंजाबी सीट मानी जाती है. पंजाबी वोटर जिसके साथ है वही विधानसभा पहुंचता है.

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First published: October 5, 2019, 1:01 PM IST
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