नसीरुद्दीन शाह ने सड़क दुर्घटना के पीड़ितों की मदद के लिए उठाया कदम! आप कब आगे बढ़ेंगे?

एक सड़क दुर्घटना के शुरुआती नाज़ुक पलों में सबसे पहले मदद के लिए आगे आने वाले लोगों की कोशिशों से न सिर्फ एक जान बचाई जा सकती है, बल्कि घायल व्यक्ति को आनेवाली चोटों की गंभीरता भी कम की जा सकती है.

News18Hindi
Updated: June 14, 2019, 4:52 PM IST
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Updated: June 14, 2019, 4:52 PM IST
हमारी दुनिया तेज़ी से बदल रही है. हर क्षेत्र में विशाल प्रगति हो चुकी है. लेकिन हम इंसान अपने मूल सिद्धांतों और इंसानियत को भी उसी रफ्तार से गंवा रहे हैं. हमारे अंदर खत्म हो चुकी संवेदनशीलता उस वक्त बेहद साफ झलकती है, जब हमारे सामने कोई सड़क दुर्घटना होती है. इस वक्त दुर्घटना के शिकार हुए बेबस लोगों के लिए हमारी जो प्रतिक्रिया होती है वो अकल्पनीय होती है.

किसी भी दुर्घटना स्थल पर आसपास खड़े लोग चिंता की बजाय उत्सुकता से सब कुछ देखते रहते हैं. यह स्थिति तब बदतर हो जाती है, जब इनमें से ही कुछ लोग तुरंत अपना स्मार्टफोन निकालकर इस भीषण दुर्घटना की फोटो खींचने या वीडियो रिकॉर्ड करने लगते हैं, ताकि सोशल मीडिया पर पोस्ट कर सकें. अफसोस की बात है कि कोई भी शख्स घायलों की मदद के लिए एंबुलेंस को फोन नहीं करता या फिर प्राथमिक उपचार देने के लिए आगे नहीं आता.



इस स्थिति को बदलने के लिए लोगों को शिक्षित करने की ज़रूरत होगी. आम जनता को यह बताना होगा कि एक सड़क दुर्घटना के पहले 60 मिनटों में घायलों की जान बचाने के सबसे अच्छे तरीके क्या हैं? बॉलीवुड के उत्कृष्ट अभिनेताओं तथा निर्देशकों में से एक नसीरुद्दीन शाह ने भी इस पहल का समर्थन किया है. भारत में हर घंटे 18 लोग सड़क दुर्घटनाओं के शिकार होते हैं. दुर्घटना के बाद का पहला घंटा बेहद नाज़ुक होता है और इसलिए ये गोल्डन आवर कहलाता है. नसीरुद्दीन शाह ने लोगों से अपील की है कि हमें अधिक संवेदनशीलता दिखाते हुए इस गोल्डन आवर में एक ज़िंदगी बचाने के लिए आगे आना चाहिए.

मदद से क्यों डरते हैं लोग?

- यह पता नहीं होता कि एंबुलेंस के आने तक घायल व्यक्ति को सुरक्षित रखने का तरीका क्या है? सड़क पर चलते लोगों को इसलिए भी डर लगता है कि कहीं घायल को दुर्घटनास्थल से उठाकर पास किसी सुरक्षित स्थान पर ले जाने से उसके शरीर को और नुकसान तो नहीं होगा?
- पुलिस केस में उलझने और अस्पताल एवं पुलिस स्टेशन के बार-बार चक्कर लगाने का डर लगता है.
- पुलिस द्वारा परेशान किये जाने का डर. अपना काम छोड़कर पीड़ित की मदद करने में खुद का समय ही खर्च होगा. हालांकि, दिल्ली में तो सरकार की ओर से दुर्घटना के पीड़ित की मदद करने वाले किसी भी व्यक्ति को रु. 2000 का नगद ईनाम दिया जाता है.
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- पुलिस की पूछताछ और गवाही देने जैसे कानूनी प्रक्रियाओं से गुज़रना.
- एक दुर्घटना के मामले में होने वाले कई सारे कानूनी पचड़ों में फंसने का डर.

पहले 60 मिनट में घायल की जान कैसे बचाएं?
- एक एंबुलेंस बुलाने के लिए 108 डायल करें.
- शहरी सीमा में दुर्घटना होने पर 100 नंबर डायल कर पुलिस को सूचित करें.
- राष्ट्रीय हाईवे पर दुर्घटना होने पर 1033 डायल करें. यह नंबर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा संचालित, देश के किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग पर होने वाली दुर्घटना या आपात स्थिति की सूचना देने के लिए एक खास टोल-फ्री हेल्पलाईन है. यह नंबर आम जनता के लिए 24 घंटे सक्रिय रहता है. इस नंबर पर कॉल करें और मदद की प्रतीक्षा करें. https://ihmcl.com/24x7-national-highways-helpline-1033/
- घायल व्यक्ति का मोबाइल निकालकर उसके कॉन्टेक्ट लिस्ट में उसके परिवार का नंबर खोजें और उन्हें कॉल कर सूचित करें. पीड़ित का फोन लॉक होने पर भी फोन की होम स्क्रिनपर ‘इन केस ऑफ इमरजेंसी’ (ICE) यानि आपात स्थित में संपर्क किये जाने वाले नंबर देखे जा सकते हैं.
- दुर्घटना स्थल पर जमा हुई भीड़ को शांत करते हुए थोड़ा पीछे हटने के लिए कहें, ताकि घायल व्यक्ति तक पूरी हवा और ऑक्सीजन पहुंच सके.
- वहां खड़े कुछ लोगों से आग्रह करें कि वो दुर्घटना स्थल के आसपास से गुज़रने वाले वाहनों को रुकने से मना करें ताकि सड़क पर ट्रैफिक जाम न लगने पाए.
- यह सुनिश्चित करें कि एंबुलेंस की बिना किसी रुकावट के तुरंत पहुंचने के लिए सड़क की दाईं लेन पर ट्रैफिक न हो. दुर्घटना स्थल से गुज़रने वाले सभी वाहनों को बाईं लेन से जाने के लिए कहें और यह भी कि वे अपनी गति धीमी न करें.
- अगर पीड़ित व्यक्ति ने हेलमेट पहना हुआ है, तो बिल्कुल धीरे से, उसके सर को झटका दिये बिना हेलमेट के फीते खोलें या हेलमेट को बाहर निकालें.
- घायल के कपड़ों को गले, सीने और कमर से ढीला कर दें. अगर आपको प्राथमिक उपचार देने की जानकारी है तभी ऐसा करने की कोशिश करें. अन्यथा, सबसे अच्छा यही होगा कि पैरामेडिकल कर्मियों या अन्य बचाव कर्मियों के आने की प्रतीक्षा करें.
- अगर पीड़ित के शरीर के किसी हिस्से में घाव नज़र आए और उससे खून बह रहा हो तो यह देखें कि वहां कुछ फंसा हुआ तो नहीं है. अगर कुछ नज़र आए तो उसे निकालने की कोशिश ना करें क्योंकि इससे रक्त वाहिनियां और नसें क्षतिग्रस्त हो सकती हैं और काफी अधिक खून बहने लगेगा.
- खून बहने से रोकने के लिए खुले घाव पर एक साफ कपड़ा बांधने की कोशिश करें.
- अगर हाथ या पैर से खून बह रहा है तो उसे ऊपर उठाकर खून रोकने की कोशिश करें.
- अगर पीड़ित व्यक्ति के मुंह से खून निकल रहा है या उल्टी हो रही है, तो उसे करवट दिलाकर दम घुटने से बचाएं.
- खुले घाव के किसी भी तरफ हल्का दबाव बनाते हुए, आसपास की त्वचा को आगे सरकाते हुए घाव के मुंहाने को बंद करने की कोशिश करें. इससे खून बहना कम हो जाएगा और हो सकता है कि अधिक खून बहने से पाड़ित की मौत होने से बच जाए.
- अगर पीड़ित को काफी अधिक चाटें आई है और जल्दी मदद आने की संभावना नहीं है तो उसे तुरंत किसी निकटतम अस्पताल में ले जाने की कोशिश करें. ऐसा करने से सबसे नाज़ुक एक घंटे यानि गोल्डल आवर में ही उसका इलाज हो सकेगा और एक सुरक्षित माहौल में उसकी हालत स्थिर बनाई जा सकेगी.

निष्कर्ष
ध्यान रहे कि डर और उदासीनता आपको एक जिम्मेदार नागरिक और एक अच्छा इंसान बनने से न रोक पाएं. 2016 में भारत के राष्ट्रपति ने श्री रामनाथ कोविंद गुड समैरिटन विधेयक को मंज़ूरी प्रदान की है और सुप्रीम कोर्ट एक गुड समैरिटन कानून पारित कर चुका है. यह कानून सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों की मदद करने वाले नागरिकों को कानूनी उलझनों एवं परेशानियों से सुरक्षा प्रदान करता है. अपनी इंसानियत और अपने अंदर के नेक इंसान को प्रोत्साहित करें और दुर्घटना के शिकार लोगों की मदद के लिए आगे आएं. दुर्घटना में होने वाली मौतों की संख्या घटाने में मदद करें. यह पहल नेटवर्क 18 और डिएजियो द्वारा समर्थित है. यह वीडियो देखकर जानिये कि समाज में बदलाव की लहर शुरु करने के लिए सही कदम कैसे उठाएं.
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