निर्भया कांड के बाद बना था 'निर्भया फंड', जानिए अब क्या है हालत

देश में बलात्कार (Rape) की घटनाओं में कमी आने का नाम नहीं ले रहा है. हर एक बलात्कार की घटना के बाद दूसरी बलात्कार की घटना सामने आ जाती है. ऐसे में सवाल उठता है कि साल 2012 में निर्भया गैंगरेप कांड (2012 Delhi Gang Rape) के बाद बनी निर्भया फंड (Nirbhaya Fund) का कितना उपयोग हो रहा है?

Ravishankar Singh | News18Hindi
Updated: August 13, 2019, 5:29 PM IST
निर्भया कांड के बाद बना था 'निर्भया फंड', जानिए अब क्या है हालत
निर्भया फंड में पीड़िताओं के मुआवजे की राशि के वितरण और प्रबंधन को लेकर ठोस नीति का अभाव है.
Ravishankar Singh
Ravishankar Singh | News18Hindi
Updated: August 13, 2019, 5:29 PM IST
देश में बलात्कार (Rape) की घटनाओं में कमी आने का नाम नहीं ले रहा है. हर एक बलात्कार की घटना के बाद दूसरी बलात्कार की घटना सामने आ जाती है. ऐसे में सवाल उठता है कि साल 2012 में निर्भया गैंगरेप कांड (2012 Delhi Gang Rape)  के बाद बनी निर्भया फंड (Nirbhaya Fund) का कितना उपयोग हो रहा है? आखिर कितने पीड़ितों को अब तक इस फंड से मदद मिल चुकी है? यूपीए सरकार ने फंड में कितना पैसा दिया और मोदी सरकार ने निर्भया फंड पर कितना खर्च किया? ये कुछ ऐसे सवाल हैं, जिसके बारे में लोग जानना चाहते हैं.

साल 2012 में दिल्ली में हुए निर्भया गैंगरेप कांड के बाद साल 2013-14 के आम बजट में निर्भया फंड की घोषणा हुई थी. निर्भया रेपकांड और हत्या ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था. इस घटना के बाद ही केंद्र की तत्कालीन यूपीए सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एक विशेष फंड की घोषणा की थी. इस फंड का नाम 'निर्भया फंड' रखा गया था.

मनमोहन सिंह सरकार के तात्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने शुरुआती तौर पर 1000 करोड़ रुपए का आवंटन किया.


उस समय के मनमोहन सिंह सरकार के तात्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने शुरुआती तौर पर 1000 करोड़ रुपए का आवंटन किया. 2014-15, 2016-17, 2018-19 में भी एक-एक हजार करोड़ रुपए इस फंड में आवंटित किए गए.

2015 में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय नोडल एजेंसी बना

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने भले ही ये पैसा आवंटित कर दिए हों, लेकिन सरकार इस पैसे को पीड़ितों तक नहीं पहुंचा पाई. पहले इस फंड का नोडल एजेंसी गृह मंत्रालय हुआ करती थी, लेकिन बाद में गृह मंत्रालय द्वारा इस फंड के लिए आवंटित धन का एक फीसदी भी पीड़ितों तक नहीं पहुंचने पर साल 2015 में मोदी सरकार ने इस मंत्रालय की जगह महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को नोडल एजेंसी बना दिया.

निर्भया फंड के तहत आवंटित बजट का 20% से भी कम उपयोग किया है.

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महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को नोडल एजेंसी बनाने के बाद भी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकारों ने साल 2015 और 2018 के बीच महिलाओं की सुरक्षा के लिए निर्भया फंड के तहत आवंटित बजट का  20% से भी कम उपयोग किया है. 2015  से 2019 के जून महीने तक 1 हजार 813 करोड़ रुपए कुल राशि बांटी गई है. साल 2018 तक तो सिर्फ 854 करोड़ 66 लाख रुपए ही आवंटित की गई थी.

600 से अधिक सेंटर बने थे

बता दें कि इस फंड के जरिए पूरे देश में रेप पीड़ितों के लिए 600 से अधिक सेंटर बने थे, जहां पर पीड़िताओं को कानूनी और आर्थिक मदद मुहैया कराई जाने की बात कही गई थी. केंद्र सरकार ने उस समय साफ कहा था कि पीड़िता की पहचान छुपे रहेंगे और उसको कानूनी मदद सरकार की तरफ से दी जाएगी. इस फंड से सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगने की बात कही गई थी.

रेप की घटनाओं पर लगातार विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं


लेकिन, पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया फंड के तहत यौन हिंसा की शिकार पीड़िताओं को दिए जाने वाले मुआवजे को लेकर नराजगी जाहिर की थी. सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) ने बताया कि विभिन्न राज्यों में दुषकर्म की शिकार मात्र 5-10 फीसदी पीड़िताओं को ही निर्भया फंड के तहत मुआवजा मिल रहा है. नालसा ने बताया कि आंध्र प्रदेश में उपलब्ध आंकड़ों की मानें तो पिछले साल यौन हिंसा के दर्ज 901 मामलों में सिर्फ एक पीड़िता को मुआवजा मिला.

क्यों फंड का इस्तेमाल ठीक से नहीं हो रहा है?

दरअसल निर्भया फंड में पीड़िताओं के मुआवजे की राशि के वितरण और प्रबंधन को लेकर ठोस नीति का अभाव है. सुप्रीम कोर्ट का साफ कहना है कि इस फंड से तीन मंत्रालय गृह मंत्रालय, वित्त मंत्रालय और महिला एवं विकास मंत्रालय जुड़े हैं. इसलिए भ्रम की स्थिति है कि किसे क्या करना है. सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि केंद्र सरकार इस फंड में धन मुहैया तो करा रही है, लेकिन राज्य सरकारों को यौन हिंसा संबंधी मुआवजा कब और किस चरण में देना है इसे लेकर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है.

बता दें कि पिछले छह वर्षों में आम बजट में निर्भया फंड में 3 हजार  600 करोड़ रुपए आवंटित हुए हैं, लेकिन फंड का सिर्फ 20 प्रतिशत ही इस्तेमाल हो पाया? हालांकि, निर्भया फंड को 2013 में स्थापित किया गया था, लेकिन इसकी गति 2015 से ही बढ़ी. शुरुआती एक-दो सालों में फंड का इस्तेमाल न के बराबर ही हुआ.

पूरे देश में निर्भया कांड के बाद बवाल मचा था


किन प्रमुख योजनाओं के तहत धन आवंटित किया जाता

जिन प्रमुख योजनाओं के तहत राज्यों को धन आवंटित किया गया है, उनमें इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम, सेंट्रल विक्टिम कॉम्पेंसेशन फंड, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराध रोकथाम, वन स्टॉप स्कीम, महिला पुलिस वालंटियर और महिला हेल्पलाइन योजना का सार्व भौमिकरण शामिल हैं.

पीड़िताओं के मुआवजे की राशि के वितरण और प्रबंधन को लेकर ठोस नीति का अभाव है.


निर्भया फंड के तहत विभिन्न योजनाओं में धन के उपयोग के मामले में शीर्ष पांच राज्यों में चंडीगढ़ (59.83%), मिजोरम (56.32%), उत्तराखंड (51.68%), आंध्र प्रदेश (43.63%) और नागालैंड (38.17%) हैं.

हालांकि, सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि चंडीगढ़ द्वारा केंद्रीय विक्टिम कॉम्पेंसेशन फंड के साथ-साथ महिला हेल्पलाइन स्कीम के तहत जितना पैसा आवंटित किया गया था, उससे अधिक धन का उपयोग किया गया. सबसे खराब पांच राज्यों में मणिपुर, महाराष्ट्र, लक्षद्वीप शामिल हैं, जिसमें एक पैसा भी खर्च नहीं हुआ है. इसके बाद पश्चिम बंगाल (0.76%) और दिल्ली (0.84%) का नंबर आता है.

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First published: August 12, 2019, 8:41 PM IST
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