महानगर के बहुत सारे हिस्से देख कर लगता है- ये शीला दीक्षित की दिल्ली है

कनॉट प्लेस को नया रूप देना हो या दिल्ली के यातायात को सहज औऱ जाम मुक्त बनाने वाले फ्लाई ओवरों की बात की जाय तो इसमें शीला दीक्षित का मुख्यमंत्री के तौर पर न भूलने वाला योगदान है.

RajKumar Pandey | News18Hindi
Updated: July 20, 2019, 8:12 PM IST
महानगर के बहुत सारे हिस्से देख कर लगता है- ये शीला दीक्षित की दिल्ली है
फ्लाई ओवरों की बात की जाय तो इसमें शीला दीक्षित का मुख्यमंत्री के तौर पर न भूलने वाला योगदान है. (File Photo)
RajKumar Pandey | News18Hindi
Updated: July 20, 2019, 8:12 PM IST
दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, कॉमनवेल्थ की तैयारियों में महानगर को सजाने और फ्लाइ ओवरों के जरिए यातायात सुगम बनाने के लिए लंबे समय तक याद की जाएंगी. दिल्ली और खासतौर से नई दिल्ली के कई रूप है. आज जो रूप हमारे सामने है, उसे शीला की दिल्ली कहा जाय तो कोई गलत नहीं होगा. इसका सुबूत ये है कि अगर किसी के दिमाग में 2010 से पहले की दिल्ली के रास्तों का नक्शा है तो बहुत से रास्तों पर वो भटक जाएगा. मुख्यमंत्री के तौर पर शीला दीक्षित ने दिल्ली का रंग रूप कुछ ऐसा सजाया कि उन्हें इसके लिए लंबे समय तक याद रखा जाएगा.

जाम मुक्त बनाने में अहम योगदान
कनॉट प्लेस को नया रूप देना हो या दिल्ली के यातायात को सहज औऱ जाम मुक्त बनाने वाले फ्लाई ओवरों की बात की जाय तो इसमें शीला दीक्षित का मुख्यमंत्री के तौर पर न भूलने वाला योगदान है. कनॉट प्लेस हमेशा से दिल्ली के सबसे आकर्षक स्थान के तौर पर रहा है, लेकिन वक्त की गर्द ने इस शानदार बाजार की रौनक को खत्म कर दिया था. कॉमनवेल्थ के गेम्स से पहले इसका जो कायाकल्प किया गया वो अपने आप में लाजवाब है. इसकी वजह से कनॉट प्लेस का रंग रूप दुनिया भर के सबसे सुंदर बाजारों में एक बन गया.

एम्स या सफदरजंग पहुंचना हुआ आसान

आश्रम के पास से जो वारापुला एम्स औऱ सफदजंग अस्पतालों तक बिना किसी रेडलाइट के लोगों को पहुंचाता है, वो शील दीक्षित के दौर में ही बना. ध्यान रखने वाली बात है कि बारापुला से महज आने जाने में ही सुविधा नहीं हुई है, बल्कि इससे उन लोगों को बहुत बड़ा फायदा मिला है, जो इमरजेंसी में इस तरफ से एम्स या सफदरजंग पहुंचना चाहते हैं. दरअसल इससे दिल्ली के सबसे महत्वपूर्ण अस्पताल की दूरी कम हुई है.

देश के चारों महानगरों में सबसे तेज दिल्ली की स्पीड
इस समय दिल्ली की औसत स्पीड देश के चारों महानगरों में सबसे तेज है. इसका मतलब ये है कि दिल्ली की सड़कें देश के सभी महानगरों की तुलना में अधिक सुविधाजनक हैं. वाहनों की बढ़ती संख्या और भीड़ की वजह से ऑफिस टाइम में भले ही दिल्ली की सड़कों पर कई बार जाम की स्थिति दिख जाती है, लेकिन दूसरे महानगरों की तुलना में यहां यातायात की स्पीड काफी अधिक है. शीला दीक्षित के कार्यकाल में ही सार्वजनिक परिवहन के लिए लो फ्लोर वाली एयरकंडीशन बसें शुरू की गईं, जो अब लोगों के लिए बहुत ही सुविधा जनक बन गई है. सार्वजनिक परिवहन की बात की जाय तो दिल्ली मेट्रो का काम-काज भी दरअसल कामनवेल्थ की तैयारियों के दौर में बहुत तेजी से हुआ था.
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ये भी ध्यान रखने वाली बात है कि 15 वर्ष तक मुख्यमंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल में शीला दीक्षित ने 1998 में मुख्यमंत्री पद की कुर्सी संभालने के बाद केंद्र में एनडीए की सरकार आ गई. उस दौर में बीजेपी के पसंद के उप राज्यपाल से मुख्यमंत्री खटपट भी रही. बावजूद इसके सरकार का कामकाज चलता रहा और आज जैसा राज्यपाल बनाम मुख्यमंत्री का मसला सड़क तक आ गया है, वैसा उस दौर में नहीं रहा. दरअसल अपने काम काज के बूते लगातार तीन चुनाव जीतने वाली शीला दीक्षित को इसका मौका भी मिल सका कि वे शीला की दिल्ली बना सकें.

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First published: July 20, 2019, 8:12 PM IST
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