पहाड़ में फंसे लोगों को बचाने के लिए ITBP ने बनाया 'रेसक्‍यू फोर्स', इन इलाकों में होगा तैनात

आईटीबीपी का ये विशेष बचाव दल जम्मू कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणांचल प्रदेश में तैनात रहेगा.

अमित पांडेय | News18Hindi
Updated: July 8, 2019, 7:03 PM IST
पहाड़ में फंसे लोगों को बचाने के लिए ITBP ने बनाया 'रेसक्‍यू फोर्स', इन इलाकों में होगा तैनात
रेसक्‍यू फोर्स में करीब 20 से 30 आइटीबीपी के जवान में रहेंगे.
अमित पांडेय
अमित पांडेय | News18Hindi
Updated: July 8, 2019, 7:03 PM IST
देश के पहाड़ी इलाकों में सीमा की रक्षा करने वाली महत्वपूर्ण फोर्स आइटीबीपी यानि भारतीय तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) अब पहाड़ी इलाकों के हादसों में फंसे लोगों की जान बचाने का भी काम करेगी. इसके लिए आईटीबीपी ने विशेष बचाव दल यानी रेसक्‍यू फोर्स बनाया है. आइटीबीपी की ये यूनिट देश की सुरक्षा में तैनात अन्य यूनिट के साथ ही रहेगी और जरूरत पड़ने पर तुरंत इसका डेप्लॉयमेंट किया जाएगा.

क्यों किया इस यूनिट का गठन?
दरअसल, पहाड़ी इलाकों में लगातार पर्यटकों का दबाव बढ़ता जा रहा है, इस वजह से आए दिन लगातार हादसे भी होते रहते हैं और पहाड़ पर मौजूद लोगों को बचाव की सख्त जरूरत होती है. अभी तक स्थानीय प्रशासन हादसे के बाद इलाके में तैनात आईटीबीपी की यूनिट को संपर्क करता था और इसके बाद आईटीबीपी के कुछ जवानों को बचाव कार्य में लगाया जाता था, लेकिन अब इस विशेष यूनिट के बन जाने से इन जवानों को हादसे की जगह तुरंत तैनात किया जाएगा.

इस यूनिट के गठन की एक और बड़ी वजह है नंदा देवी हादसा और उसके बाद इस हादसे में मारे गए 7 पर्वतारोहियों के पार्थिव शरीर को आइटीबीपी द्वारा दुर्गम पहाड़ी इलाकों से निकालना है.

24 दिन चला ऑपरेशन डेयरडेविल
नंदा देवी हादसे के दौरान आईटीबीपी ने बचाव के कार्य को ऑपरेशन डेयरडेविल का नाम दिया था. 24 दिनों तक चले इस ऑपरेशन में आइटीबीपी के 12 जवानों की टीम ने हिस्सा लिया और आखिरकार विश्व के सबसे दुर्गम पहाड़ी इलाकों में से एक माने जाने वाले नंदा देवी से सात शवों को निकाल लिया गया. इस हादसे में जिन कठिनाइयों का टीम ने सामना किया उससे भी निपटने की तैयारी उन पांचों विशेष बचाव दल में रहेंगी.

कौन-कौन लोग होंगे विशेष बचाव टीम में
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रेसक्‍यू फोर्स में करीब 20 से 30 आइटीबीपी के जवान में रहेंगे, जिनको रेसक्‍यू टीम भी कहा जाएगा. बचाव दल की सारी टीम के सदस्यों को दुर्गम इलाकों में पर्वतारोहण का अनुभव होगा और उनके पास बचाव के सारे उपकरण मौजूद रहेंगे. दिन में नियमित अंतराल पर इनका स्थानीय प्रशासन के कंट्रोल रूम से संपर्क रहेगा जिसके मुताबिक यह जवान अलग-अलग जगहों पर तैनात किए जाएंगे. यूनिट का नेतृत्‍व कमांडेंट या फिर डीआईजी स्तर का अधिकारी ही करेगा.

इन इलाकों में ये यूनिट तैनात रहेगी
आईटीबीपी का ये विशेष बचाव दल जम्मू कश्मीर के लद्दाख क्षेत्र, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणांचल प्रदेश में तैनात रहेगा. इन इलाकों में हिमालय की दुर्गम पहाड़ियां हैं और हर साल देश-विदेश से भारी तादात में टूरिस्ट यहां आते हैं. इन पांच इलाकों में लैंडस्लाइड, एवलांच यानि बर्फीला तूफान, बारिश और पैर फिसलने का खतरा हमेशा रहता है और इन्ही खतरों से निपटने के लिए यहां विशेष यूनिट की तैनाती की गई है.

यूनिट को लेकर ये बोले देसवाल

इस यूनिट के गठन पर डीजी आईटीबीपी एसएस देसवाल ने न्यूज18 इंडिया से कहा, 'हमने देखा है कि हिमालयन माउंटेन विश्वस्तरीय पर्वतों की श्रृंखला है और न केवल देश में बल्कि दुनियाभर से लोग यहां पर आते है. हादसे भी होते रहते हैं यहां आने वाले लोगों के साथ तो उन लोगों को तुरंत सहायता मिल सके इसलिए हमने फोर्स का गठन किया. हमेशा इनके पास उपकरण होंगे और इनके पास सारी ऐसी चीजें होंगी जो समय पर जरूरतमंद लोगों को मदद पहुंचा सकें.'

इसके अलावा उन्‍होंने कहा, 'सुरक्षा के अलावा इस काम को भी हम बखूबी से अंजाम देंगे ऐसी हमारी लगातार कोशिश रहेगी. भारत में माउंटिनियरिंग कर रहे लोगों को जरूरत के वक्त विश्वस्तरीय सहायता मिले यह आईटीबीपी की कोशिश हमेशा रहेगी.'

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First published: July 8, 2019, 5:58 PM IST
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