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आर्थिक अपराध शाखा के रडार पर कांग्रेसी नेता जगदीश टाइटलर और उनकी पत्नी, जानें वजह

News18India
Updated: October 29, 2019, 1:57 PM IST
आर्थिक अपराध शाखा के रडार पर कांग्रेसी नेता जगदीश टाइटलर और उनकी पत्नी, जानें वजह
अपराध शाखा के निशाने पर है कांग्रेसी नेता जगदीश टाइटलर (फाइल फोटो)

जगदीश टाइटलर (Jagdish Tytler) सहित करीब एक दर्जन लोगों पर फर्जीवाड़े का है आरोप है. वहीं, उनकी पत्नी सहित तमिलनाडू के कई लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज हुआ है.

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  • Last Updated: October 29, 2019, 1:57 PM IST
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दिल्ली. दिल्ली पुलिस (Delhi Police) की आर्थिक अपराध शाखा (EoW) के रडार पर एक और कांग्रेसी नेता और उसकी पत्नी आ गए हैं. आर्थिक अपराध शाखा ने कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर (Jagdish Tytler) और उनकी पत्नी सहित अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. कहा जा रहा है कि आर्थिक अपराध शाखा ने मामले की तफ्तीश करने के दौरान कई महत्वपूर्ण सबूतों को इकट्ठा किया है. हालांकि, इस मामले पर पूछने पर आर्थिक अपराध शाखा के सूत्रों ने यह बताया कि ये एफआईआर पटियाला कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज किया गया है. दर्ज आरोप के मुताबिक, दिल्ली के करोलबाग में करोड़ों रुपए की जमीन पर गलत तरीके से कब्जा जमाने का मामला है. इस मामले में आर्थिक अपराध शाखा में विजय सेखरी नाम के एक शख्स ने शिकायत दर्ज करवाई थी. प्राथमिक जांच करने के बाद इस मामले को दर्ज किया गया है. मामला दर्ज करने के बाद उस एफआईआर पर कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है. इस मामले में जल्द ही सभी आरोपियों को पूछताछ का नोटिस भेजा जा सकता है.

जमीन कब्जाने का क्या है मामला
कांग्रेसी नेता जगदीश टाइटलर सहित कई आरोपियों के खिलाफ आर्थिक अपराध शाखा में इसी साल नौ जुलाई को एक शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके तहत ये आरोप लगाया गया था कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों रुपए की जमीन पर कब्जा किया गया है. ये शिकायत दिल्ली के छतरपुर इलाके के रहने वाले विजय सेखरी ने दर्ज करवाई थी. जिसमें जगदीश टाइटलर और उनकी पत्नी जेनीफर टाइटलर सहित कई लोगों का नाम शामिल है. शिकायतकर्ता विजय ने तमिलनाडु की सन रियल इस्टेट प्राइवेट लिमिटेड, चेन्नई के वेंकटासुभा राव, विजय भास्कर, हरीश मेहता, संजय ग्रोवर, रवीन्द्र नाथ बाला कवि और दिल्ली के करोलबाग स्थित कंपनी मेसर्स गोल्डन मूमेंटस के खिलाफ मामला दर्ज करवाया था.

29 साल से भी पुराना है मामला

जानकारी के मुताबिक, यह मामला लगभग 29 साल से भी पुराना है. शिकायतकर्ता विजय सेखरी उस वक्त कांग्रेस नेता जगदीश टाइटलर के कारोबारी मित्र थे. दोनों के बीच काफी अच्छी दोस्ती थी. उसी दौरान जगदीश टाइटलर और विजय सेखरी की कंपनी ने साझा तौर पर सहमति बनाते हुए दिल्ली के करोलबाग इलाके में दो रिहाइशी संपत्तियों को खरीदा था. इसके लिए दोनों ने 50- 50 फीसदी की हिस्सेदारी से समझौता किया था. लेकिन यह मामला तब तूल पकड़ा जब वही रिहाइशी संपत्तियों को व्यवसायिक कैटेगरी यानी कॉमर्शियल श्रेणी में बदलने पर इसकी कीमत करोड़ों रुपये में हो गई.

आपसी खींचतान से बढ़ा मामला
जब पैसों की बात को लेकर आपसी खींचतान बढ़ी तो मामला आर्थिक अपराध शाखा तक पहुंच गया. क्योंकि विजय सेखरी को कई वर्षों के बाद करीब साल 2009 में इस बात की जानकारी मिली कि जगदीश टाइटलर और उसकी कंपनी ने उस संपत्ति का मालिकाना हक अपनी कंपनी के नाम से करवा लिया है. उसके बाद शुरुआती दौर में मामला कंपनी लॉ बोर्ड में गया, जहां से विजय को भी उस संपत्ति में से हिस्सा देने की बात आई. इसके विरोध में जगदीश टाइटलर हाईकोर्ट चले गए. इसलिए ये मामला पिछले कई वर्षों से इसी तरह विवादों में पड़ा रहा. लेकिन अब दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा को उम्मीद है कि इस मामले में सही कार्रवाई होनी चाहिए. फिलहाल, यह देखना लाजमी होगा कि इस मामले का समाधान कब होता है.
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First published: October 29, 2019, 11:07 AM IST
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