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इंदिरा और राजीव गांधी सरकार में देश के अटॉर्नी जनरल थे राम लला के वकील परासरन

भाषा
Updated: November 9, 2019, 10:45 PM IST
इंदिरा और राजीव गांधी सरकार में देश के अटॉर्नी जनरल थे राम लला के वकील परासरन
पराशरण पूर्व राज्यसभा सांसद और 1983 से 1989 के बीच भारत के अटॉर्नी जनरल रहे. इस दौरान वो इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की सरकारों में इस पद पर रहे.

देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने शनिवार को रामजन्मभूमि-बाबरी विवाद (Ramjanam Bhumi-Babri Dispute) में फैसला सुना दिया. इस केस में हिंदू पक्ष की तरफ से वकील के. परासरन ने दलीलें रखीं.

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नई दिल्ली. देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने शनिवार को रामजन्मभूमि-बाबरी विवाद (Ramjanam Bhumi-Babri Dispute) में फैसला सुना दिया. इस केस में हिंदू पक्ष की तरफ से वकील के. परासरन ने दलीलें रखीं. उम्र के नौ दशक पार करने के बावजूद पूरी ऊर्जा से अयोध्या मामले में अकाट्य दलीलें रखने वाले परासरन को भारतीय वकालत का ‘भीष्म पितामह’ यूं ही नहीं कहा जाता.

सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त में जब अयोध्या मामले की रोजाना सुनवाई का फैसला किया तो विरोधी पक्ष के वकीलों ने कहा था कि उम्र को देखते हुए उनके लिए यह मुश्किल होगा लेकिन 92 बरस के परासरन ने 40 दिन तक घंटों चली सुनवाई में पूरी शिद्दत से दलीलें पेश की.

कुर्सी पर बैठकर दलील देने से इंकार
सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को सर्वसम्मति के फैसले में अयोध्या में 2.77 एकड़ विवादित भूमि पर राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ करते हुए केन्द्र को निर्देश दिया कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद निर्माण के लिए किसी वैकल्पिक लेकिन प्रमुख स्थान पर पांच एकड़ का भूखंड आवंटित किया जाए. न्यायालय में परासरन को बैठकर दलील पेश करने की सुविधा भी दी गई लेकिन उन्होंने यह कहकर इनकार कर दिया कि वह भारतीय वकालत की परंपरा का पालन करेंगे.

भगवान अय्प्पा के भी थे वकील
रामलला विराजमान से पहले सबरीमाला मामले में भगवान अयप्पा के वकील रहे परासरन को भारतीय इतिहास, वेद पुराण और धर्म के साथ ही संविधान का व्यापक ज्ञान है और इसकी बानगी न्यायालय में भी देखने को मिली. उन्होंने स्कन्द पुराण के श्लोकों का जिक्र करके राम मंदिर का अस्तित्व साबित करने की कोशिश की.

राम सेतु मामले में भी रह चुके हैं वकील
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परासरन ने सबरीमाला मंदिर विवाद के दौरान एक आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश नहीं देने की परंपरा की वकालत की थी. राम सेतु मामले में दोनों ही पक्षों ने उन्हें अपनी ओर करने के लिए सारे तरीके आजमाए लेकिन धर्म को लेकर संजीदा रहे परासरन सरकार के खिलाफ गए. ऐसा उन्होंने सेतुसमुद्रम प्रोजेक्ट से रामसेतु को बचाने के लिए किया. उन्होंने अदालत में कहा, 'मैं अपने राम के लिए इतना तो कर ही सकता हूं.'

कई पुरस्कारों से सम्मानित
नौ अक्टूबर 1927 को जन्मे परासरन पूर्व राज्यसभा सांसद और 1983 से 1989 के बीच भारत के अटॉर्नी जनरल रहे. इस दौरान वो इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की सरकारों में इस पद पर रहे. पद्मभूषण और पद्मविभूषण से नवाजे जा चुके परासरन को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने संविधान के कामकाज की समीक्षा के लिए ड्राफ्टिंग एंड एडिटोरियल कमिटी में शामिल किया था. इतिहास में जब भी अयोध्या मसले पर बरसों तक चली कानूनी लड़ाई का जिक्र होगा तो परासरन का नाम सबसे ऊपर लिया जायेगा.
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First published: November 9, 2019, 10:40 PM IST
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