लाइव टीवी

कांग्रेस के गढ़ में कैसे भगवा हुई सियासी फिजा?

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: October 9, 2019, 1:49 PM IST
कांग्रेस के गढ़ में कैसे भगवा हुई सियासी फिजा?
हरियाणा में बीजेपी ने 75 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है

Haryana Assembly Election 2019: अपने ही गढ़ में कांग्रेस बैकफुट पर है तो इसकी बड़ी वजह बीजेपी नहीं बल्कि खुद कांग्रेस भी है, जिसमें पांच साल से कोई जिलाध्यक्ष तक नहीं है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 9, 2019, 1:49 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. हरियाणा विधानसभा चुनाव (Haryana Assembly Election 2019) में भारतीय जनता पार्टी (BJP) अति आत्मविश्वास में है और कांग्रेस (Congress) अपना अस्तित्व बचाने की लड़ाई लड़ने मैदान में उतरी है. बीजेपी लंबी लड़ाई के बाद इस रणक्षेत्र पर दोबारा कब्जा करती नजर आ रही है. 2014 में उसने हरियाणा में पहली बार अपनी सरकार बनाई थी. बीजेपी ने उस नंबर को अपना बेस टारगेट बनाया है जो आज तक ताऊ देवीलाल (Devi Lal) के अलावा कोई हासिल नहीं कर सका है. उसने 90 सीट में से 75 प्लस का नारा दिया है. जबकि पिछली बार 48 सीट थी. बड़ा सवाल यह है कि क्या बीजेपी नया रिकॉर्ड कायम कर पाएगी?

पार्टी नेताओं को मोदी लहर पर यकीन इतना है कि अपने बड़े से बड़े नेताओं की नाराजगी का वो परवाह नहीं कर रही. जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटने के बाद उसके हौसले बुलंद हैं. क्योंकि हरियाणा सैनिकों का प्रदेश है. जहां से किसी भी और प्रदेश के मुकाबले सैनिक ज्यादा हैं. गुजरात से बाहर पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की यह कर्मभूमि है. वो यहां 1995 से लेकर 2000 तक प्रभारी रहे, इसलिए उनके हरियाणा प्रेम को भी भुनाने की कोशिश है.

कुल मिलाकर यहां बीजेपी का मनोबल भारी है. सीएम मनोहरलाल खट्टर से ज्यादा मोदी पर भरोसा है. बीजेपी का मुकाबला कांग्रेस से होगा, जबकि इनेलो, जेजेपी, बसपा और आम आदमी पार्टी वोटकटवा की भूमिका में नजर आ रही हैं.

BJP candidate list, बीजेपी प्रत्याशियों की सूची, Haryana assembly election, हरियाणा विधानसभा चुनाव, BJP, बीजेपी, Narendra Modi, नरेंद्र मोदी, Amit Shah, अमित शाह, Subhash Barala, सुभाष बराला
हरियाणा में पीएम मोदी के नाम पर ही लड़ा जाएगा चुनाव!


सियासी कुरुक्षेत्र का यह मैदान कांग्रेस, इनेलो और हरियाणा विकास पार्टी गढ़ रहा है. उसमें बीजेपी बहुत धैर्य से धीरे-धीरे खड़ी हुई है. 1991 में जिस बीजेपी ने यहां सिर्फ 2 सीटें जीती थीं और 70 पर उसके प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी, आज उसकी टिकट के लिए हर नेता लालायित है. दूसरी पार्टियों के 12 मौजूदा विधायक इसकी शरण में आ चुके हैं. बीजेपी के टिकट वितरण से यह झलकता है कि उसने इस बार संगठन के नेताओं पर ज्यादा भरोसा किया है. जबकि कांग्रेस ने अपने ज्यादातर पुराने चेहरों पर ही दांव लगाया है.

अपनी ही जमीन पर कैसे बढ़ी कांग्रेस की चुनौती

बीते लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी की आंधी चली है. इसका असर इतना है कि हरियाणा में दस की दस सीटों पर बीजेपी ने कब्जा कर लिया है. यहां तक कि कांग्रेस के सबसे बड़े नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उनके पुत्र दीपेंद्र सिंह हुड्डा को भी हार का मुंह देखना पड़ा. पूरा चौटाला परिवार हार गया. बिश्नोई परिवार की भी दाल नहीं गली. रोहतक जैसा कांग्रेस का गढ़ उसके हाथ से फिसल गया. क्या इसकी वजह सिर्फ बीजेपी है? नहीं, खुद कांग्रेस खुद है.
Loading...

कांग्रेस में गुटबाजी चरम पर है और जमीन पर संगठन कहीं दिखता नहीं. 2014 में विधानसभा चुनाव हारने के बाद से ही पार्टी बिखरी हुई है. सभी जिला और ब्लॉक कमेटियां भंग हैं. जिसकी वजह से किसी भी जिले में न पार्टी की मासिक बैठक हो रही है न तो सामूहिक रूप से सरकार के खिलाफ कोई धरना-प्रदर्शन. जब संगठन की ये स्थिति है तो कांग्रेस बीजेपी का मुकाबला कैसे कर पाएगी?

 haryana assembly election 2019, हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019, bjp, बीजेपी, congress, कांग्रेस, inld, इनेलो, narendra modi, नरेंद्र मोदी, Bhupinder Singh Hooda, भूपेंद्र सिंह हुड्डा, manohar lal khattar, मनोहरलाल खट्टर, JJP, AAP, BSP, जेजेपी, बसपा, आम आदमी पार्टी
हरियाणा में कांग्रेस गुटबाजी से उबर नहीं पा रही


कांग्रेस के लिए वजूद की लड़ाई

2014 में कांग्रेस ने 17 सीटें जीतीं. इस बार भी वो निश्चित तौर पर अपना वजूद बचाने के लिए लड़ रही है. ज्यादातर प्रत्याशियों को हश्र पता है. पार्टी विधानसभा चुनाव को लेकर कभी सीरियस नहीं दिखी. क्या कोई पार्टी बिना संगठन के चुनाव जीत सकती है? लेकिन कांग्रेस को इसका पूरा यकीन था और वो बिना जिलाध्यक्षों के ही लोकसभा चुनाव के मैदान में भी उतर गई. परिणाम सबके सामने है.

भूपेंद्र हुड्डा और तंवर की अदावत

लगातार दस साल तक सीएम रहे भूपेंद्र सिंह हुड्डा को सत्ता जाने के बाद 2014 से ही पार्टी ने किनारे कर दिया था. कमान दलित नेता अशोक तंवर के हाथ थी. जो जेएनयू से पढ़े हैं. सौम्य व्यक्ति हैं लेकिन जमीनी तौर पर सियासत में वे जम नहीं पाए. हुड्डा गुट उन्हें परेशान करता रहा. जब हुड्डा हाशिए पर थे तो तंवर गुट के खिलाफ मोर्चा खोले हुए थे. अब हुड्डा को कमान मिली है तो तंवर अपने समर्थकों को लेकर टिकट के लिए सोनिया गांधी के घर के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं.

jat and non-Jat politics, जाट और नान जाट पॉलिटिक्स, Haryana BJP Candidate List, हरियाणा बीजेपी के प्रत्याशियों की पहली सूची, Haryana Assembly Election 2019, हरियाणा विधानसभा चुनाव, BJP, बीजेपी, jatland haryana, जाटलैंड हरियाणा, सुभाष बराला, Subhash barala, जाट आरक्षण आंदोलन, Jat Reservation Agitation, Captain Abhimanyu, कैप्टन अभिमन्यु, Om Prakash Dhankar, ओम प्रकाश धनखड़, भूपेंद्र सिंह हुड्डा, Bhupinder Singh Hooda
कांग्रेस और हुड्डा: एक दूसरे की मजबूरी (File Photo)


कांग्रेस के गुट

दरअसल, कांग्रेस गुटबाजी से पार नहीं पा रही. इस समय हरियाणा में इसके कम से कम पांच गुट बने हुए हैं. ये गुट हैं पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा, प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर, पूर्व केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा, पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला और भजनलाल के पुत्र कुलदीप बिश्नोई के समर्थकों का.

कांग्रेस और हुड्डा: एक दूसरे की मजबूरी

विधानसभा चुनाव के लिए करीब एक माह पहले सोनिया गांधी ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा को नेतृत्व दिया. अशोक तंवर के बदले कुमारी सैलजा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया. पार्टी ने दलित और जाट वोटरों को साधने की रणनीति के तहत इस तरह की फील्डिंग की. जाट नेता दावा करते हैं कि हरियाणा में उनकी आबादी करीब 25 फीसदी है. जबकि दलितों की आबादी तो सरकारी रिकॉर्ड में 21 परसेंट है. कांग्रेस को मजबूरी में अपने सबसे बड़े क्षेत्रीय क्षत्रप हुड्डा को उतारना पड़ा. उनके हाथ कमान आने के बाद स्थितियां थोड़ी बदली हैं. हालांकि कोई बड़ा उलटफेर कर पाने की संभावना बहुत कम है.

टिकट वितरण और जातीय गणित

बीजेपी का टिकट वितरण होने के बाद कांग्रेस को अपने पत्ते सेट करने का पूरा मौका मिला. उसने बीजेपी को जातीय जाल में घेरने की पूरी कोशिश की है. फरीदाबाद में वैश्य प्रत्याशी के सामने वैश्य, बादशाहपुर में यादव के सामने यादव उतारा है. इसी तरह बल्लभगढ़ में ब्राह्मण बनाम ब्राह्मण, तिगांव में गुर्जर बनाम गुर्जर, कोसली में यादव बनाम यादव और नूह, फिरोजपुर झिरका में मुस्लिम बनाम मुस्लिम का मुकाबला बनाकर लड़ाई दिलचस्प बना दी है.

jat and non-Jat politics, जाट और नान जाट पॉलिटिक्स, Haryana BJP Candidate List, हरियाणा बीजेपी के प्रत्याशियों की पहली सूची, Haryana Assembly Election 2019, हरियाणा विधानसभा चुनाव, BJP, बीजेपी, jatland haryana, जाटलैंड हरियाणा, सुभाष बराला, Subhash barala, जाट आरक्षण आंदोलन, Jat Reservation Agitation, Captain Abhimanyu, कैप्टन अभिमन्यु, Om Prakash Dhankar, ओम प्रकाश धनखड़, भूपेंद्र सिंह हुड्डा, Bhupinder Singh Hooda
हरियाणा में बीजेपी सभी 90 सीटों पर लड़ रही है


बीजेपी की चुनौती, अपनों ने बढ़ाई मुसीबत

बीजेपी ने सभी 90 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं. पार्टी में दूसरी पार्टियों के 12 मौजूदा विधायक शामिल हुए हैं जिनमें से कई लोगों को टिकट नहीं मिली है. वो भितरघात कर सकते हैं. दक्षिण हरियाणा में राव इंद्रजीत सिंह के चार समर्थक विधायकों की टिकट काट दी गई है. राव की बेटी आरती राव को टिकट नहीं दी गई है, इसके लिए इंद्रजीत नाराज बताए जाते हैं. राजनीति के जानकार बता रहे हैं कि इस क्षेत्र में भितरघात की बड़ी संभावना है. बादशाहपुर से विधायक और पीडब्ल्यूडी मंत्री रहे राव नरबीर सिंह और फरीदाबाद से विधायक और उद्योग मंत्री रहे विपुल गोयल की टिकट काट दी गई है. इन दोनों पर भी बीजेपी की दुश्वारियां बढ़ गई हैं.

हरियाणा में अकाली दल बीजेपी से नाराज है. वो अलग चुनाव लड़ रहा है. कलांवली सीट से अकाली दल की एकमात्र विधायक बलकौर सिंह को बीजेपी ने ज्वाइन करवाना इसका बड़ा कारण बताया गया है.

जाटलैंड में गैर जाट सियासत

इस बार बीजेपी ने 2014 के मुकाबले जाटों को 7 टिकट कम दी है. पिछली बार 27 जाट नेता मैदान में थे जबकि इस बार सिर्फ 20 हैं.  पार्टी ने नान जाट प्रत्याशियों पर ज्यादा भरोसा जताया है. जबकि इस प्रदेश की सत्ता बनाने और बिगाड़ने में जाट समुदाय की बड़ी भूमिका रही है.

भले ही पिछले विधानसभा और बीते लोकसभा चुनाव में बीजेपी को इस वर्ग का खुलकर साथ न मिला हो, लेकिन वह इसकी अनदेखी भी नहीं कर सकती. इसीलिए उसे कुछ अहम पदों पर प्रतिनिधित्व देना पड़ा है. पार्टी के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला जाट समाज से आते हैं. कैप्टन अभिमन्यु और ओम प्रकाश धनखड़ को कैबिनेट मंत्री का पद मिला हुआ था. रोहतक, सोनीपत, जींद, कैथल, सिरसा, झज्जर, फतेहाबाद और भिवानी जिले की 23 विधानसभा सीटों पर जाटों का अच्छा प्रभाव है.

जाटलैंड की चुनौती

लोकसभा चुनाव का विधानसभा क्षेत्र के हिसाब से विश्लेषण किया जाए तो उसे 90 में से 89 सीटों पर बढ़त मिली थी. लेकिन 11 सीटों पर वो पीछे थी. इनमें नारनौद, बादली, गढ़ी सांपला-किलोई, बेरी और महम प्रमुख हैं. ये जाटलैंड की सीटें हैं. जाहिर है कि बीजेपी की आंधी के बावजूद उससे जाटलैंड में वोटर नहीं सधे थे.

Haryana Assembly Election 2019, बीजेपी प्रत्याशियों की लिस्ट, BJP Candidate list, Haryana Election 2019, Haryana politics, BJP, subhash barala, हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019, हरियाणा चुनाव 2019, हरियाणा की राजनीति, भाजपा, सुभाष बराला, Assembly election ticket, विधानसभा चुनाव की टिकट, Bhupinder Singh Hooda, भूपेंद्र सिंह हुड्डा, बीजेपी विधायक, bjp MLA
क्या जाट समाज को साध पाएंगे बराला?


बिखर चुकी है जाटों की पार्टी इनेलो!

हरियाणा की सियासत जाटों के इर्द-गिर्द घूमती रही है. ज्यादार जाटों का विश्वास चौटाला परिवार में रहा है. लेकिन 2018 में इसमें फूट पड़ गई. चौटाला के बड़े बेटे अजय चौटाला के दोनों बेटों दुष्यंत और दिग्विजय ने मिलकर जन नायक जनता पार्टी (जेजेपी) के नाम से अपनी नई पार्टी बना ली. लेकिन वो भी अब तक अपना आधार नहीं बना पाई है. हालात ये हैं कि इनेलो के 10 वर्तमान विधायक बीजेपी में शामिल हो चुके हैं. जबकि जेजेपी में शामिल हुए 4 विधायक अयोग्य घोषित कर दिए गए हैं. ऐसे में जाट असमंजस में हैं कि वो किसके साथ जाएं.

ये भी पढ़ें:

BJP Candidates List: नवरात्रि में बीजेपी दिया इन नौ महिलाओं को टिकट का तोहफा!

हरियाणा विधानसभा चुनाव: दो मंत्रियों के टिकट कटने की ये है पूरी कहानी!

 

 

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए Delhi से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: October 5, 2019, 7:08 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...