आणंद लोकसभा सीट: कांग्रेस के भरतसिंह सोलंकी इस सीट को दोबारा हासिल कर पाएंगे?

बीजेपी ने मितेश पटेल को अपना उम्मीदवार बनाया है. कांग्रेस की तरफ से भरतसिंह सोलंकी उम्मीदवार हैं. भरतसिहं सोलंकी यहां से दो बार (2004 और 2009) सांसद रह चुके हैं. जबकि बीजेपी के मितेश पटेल पहली बार सांसद का चुनाव लड़ रहे हैं.

News18Hindi
Updated: May 17, 2019, 1:36 PM IST
आणंद लोकसभा सीट: कांग्रेस के भरतसिंह सोलंकी इस सीट को दोबारा हासिल कर पाएंगे?
कांग्रेस के सामने इस सीट को दोबारा हासिल करना चुनौती बन गया है.
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Updated: May 17, 2019, 1:36 PM IST
दूध की नगरी आणंद पर फिलहाल बीजेपी का कब्जा है. यहां से बीजेपी के दिलीप पटेल मौजूदा सांसद हैं. हालांकि इस बार उनका टिकट काटकर बीजेपी ने मितेश पटेल को अपना उम्मीदवार बनाया है. कांग्रेस की तरफ से भरतसिंह सोलंकी उम्मीदवार हैं. भरतसिहं सोलंकी यहां से दो बार (2004 और 2009) सांसद रह चुके हैं. जबकि बीजेपी के मितेश पटेल पहली बार सांसद का चुनाव लड़ रहे हैं. आणंद लोकसभा सीट कांग्रेस का गढ़ रही है. कांग्रेस यहां से 10 बार चुनाव जीत चुकी है. जबकि बीजेपी ने 1989, 1999 और 2014 के चुनाव में भगवा लहराया है. इस सीट से बीएसपी ने रमेशभाई वल्जीभाई को उम्मीदवार बनाया है. लेकिन मुख्य मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी के बीच है.

आणंद लोकसभा सीट का इतिहास


2014 के मोदी लहर में इस सीट से दो बार सांसद रहे भरतसिंह सोलंकी को बीजेपी
के दिलीप पटेल ने शिकस्त दी थी. दिलीप पटेल को कुल 4 लाख 90 हजार 829 वोट हासिल हुए थे. जबकि कांग्रेस के भरतसिंह सोलंकी को 4 लाख 27 हजार 403 वोट मिले थे.

2004 और 2009 के चुनाव में लगातार जीत हासिल करके भरतसिंह सोलंकी ने इस क्षेत्र का सांसद के तौर पर प्रतिनिधित्व किया था. 1999 में ये सीट बीजेपी के खाते में गई थी. जबकि उसके पहले 1991, 1996 और 1998 के चुनाव में यहां से कांग्रेस के उम्मीदवार ईश्वरभाई चावड़ा ने जीत हासिल की थी.

आणंद लोकसभा सीट कांग्रेस का गढ़ रही है. कांग्रेस यहां से 10 बार चुनाव जीत चुकी है.
आणंद लोकसभा सीट कांग्रेस का गढ़ रही है. कांग्रेस यहां से 10 बार चुनाव जीत चुकी है.


आणंद लोकसभा सीट का जातीय समीकरण
भरतसिंह सोलंकी ओबीसी वर्ग के क्षत्रिय ठाकोर जाति से
आते हैं. इस जाति के यहां 7.5 लाख वोटर्स हैं. जबकि मितेश पटेल पाटीदार समुदाय से संबंध रखते हैं. इस क्षेत्र में पाटीदारों के 2.42 लाख वोटर्स हैं. मुस्लिम समुदाय की आबादी 1.70 लाख है. जातीय समीकरण कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में हैं. जबकि बीजेपी को पीएम मोदी की इमेज और सरकार के अच्छे कामकाज से उम्मीद लगाए बैठे हैं.
2014 की तरह 2019 में भी इस सीट पर कब्‍जा जमाने के लिए बीजेपी कोशिश कर रही है.
2014 की तरह 2019 में भी इस सीट पर कब्‍जा जमाने के लिए बीजेपी कोशिश कर रही है.


2017 के विधानसभा में कांग्रेस को मिली थी 5 सीटें
आणंद लोकसभा सीट के अंतर्गत विधानसभा की 7 सीटें आती हैं. इनमें खंभात, बोरसद, आंकलाव, उमरेठ, आणंद, पेटलाद और सोजित्रा हैं. 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 2 सीटों पर जीत मिली थी. जबकि 5 सीटों पर कांग्रेस ने कब्जा जमाया था. कांग्रेस ने बोरसद, आंकलाव, आणंद, पेटलाद और सोजित्रा सीट पर जीत हासिल की थी. बीजेपी के कब्जे में खंभात और उमरेठ सीट गई थी. हालांकि इनदोनों सीटों पर जीत का अंतर काफी कम था.
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