बारामूला लोकसभा सीट: नेशनल कॉन्फ्रेंस, PDP और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस में मुकाबला

मैदान में नौ प्रत्याशी हैं. लेकिन तीन के बीच ही मुकाबला माना जा रहा है. नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के उम्मीदवार ही रेस में दिख रहे हैं. अगर इन तीनों के बीच कोई और असर दिखा सकता है तो इंजीनियर राशिद हैं.

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Updated: May 17, 2019, 10:43 AM IST
बारामूला लोकसभा सीट: नेशनल कॉन्फ्रेंस, PDP और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस में मुकाबला
बारामूला को कुछ समय पहले ही आतंक मुक्‍त इलाको घाेषित किया गया था. यहां पहले चरण में 11 अप्रैल को चुनाव हुए.
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Updated: May 17, 2019, 10:43 AM IST
बारामूला जम्मू-कश्मीर में झेलम नदी के किनारे बसा हुआ है. एलओसी से सटे हुए इस इलाके को कुछ समय पहले आतंकवाद से मुक्त घोषित किया गया था. जम्मू-कश्मीर पुलिस के मुताबिक, प्रदेश के बारामूला जिले में अब कोई भी सक्रिय आतंकी नहीं है. बारामूला लोकसभा क्षेत्र में जहां पहले चरण में चुनाव हुए थे, 17 मतदान केंद्रों पर एक भी वोट नहीं पड़ा था. यहां करीब 35 फीसदी मतदान हुआ.

कौन हैं प्रत्याशी?
मैदान में नौ प्रत्याशी हैं. लेकिन तीन के बीच ही मुकाबला माना जा रहा है. नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी और पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के उम्मीदवार ही रेस में दिख रहे हैं. अगर इन तीनों के बीच कोई और असर दिखा सकता है तो इंजीनियर राशिद हैं. नौ प्रत्याशियों में कांग्रेस के हाजी फारूक अहमद मीर, बीजेपी के मोहम्मद मकबूल वार, जेकेएनपीपी के जहांगीर खान, जेकेपीडीपी के अब्दुल कयूम वानी, जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के मोहम्मद अकबर लोन, जेकेपीस के मोहम्मद अकबर अली और निर्दलीय जावेद अहमद कुरैशी और इंजीनियर राशिद हैं.

कर्मचारी संगठन के नेता रहे अब्दुल कयूम वानी को पीडीपी ने अपना उम्मीदवार बनाया है. वानी के साथ कर्मचारी संगठनों के वोट हैं. इसके अलावा बारामूला और आसपास के इलाकों में पीडीपी का अच्छा खास जनाधार है. महबूबा मुफ्ती ने भी इस इलाके में जो रैलियां की हैं, उनमें लोगों की भीड़ बताती है कि वानी चुनाव में कड़ी टक्कर दे रहे हैं.

बारामूला लोकसभा सीट पर पीडीपी और बीजेपी ने अपने अपने उम्‍मीदवार उतारे हैं.
बारामूला लोकसभा सीट पर पीडीपी और बीजेपी ने अपने अपने उम्‍मीदवार उतारे हैं.


सज्जाद गनी लोन के नेतृत्व वाली पीपुल्स कॉन्फेंस के उम्मीदवार राजा एजाज अली को अपने निजी वोट बैंक के अलावा लोन और शिया नेता इमरान रजा अंसारी के समर्थकों का पूरा साथ मिलेगा. इसके अलावा राजा एजाज अली पहाड़ी हैं और उन्हें पहाड़ी समुदाय का सहयोग मिलने की उम्मीद है.

पिछले चुनाव का हाल
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जम्मू-कश्मीर की छह लोकसभा सीटों में बारामूला नेशनल कॉन्फ्रेंस का गढ़
रही है. हालांकि 2014 में पीडीपी ने इस गढ़ को ढहाकर पहली बार सीट जीतने में कामयाबी पाई. उसके टिकट पर मुजफ्फर हुसैन बेग चुनाव जीते थे. उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस के शरीफुद्दीन शारिक को हराया था. मुजफ्फर बेग जम्मू-कश्मीर के डिप्टी मुख्यमंत्री रहे हैं. इस बार वो चुनाव नहीं लड़ रहे हैं.

यहां से नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता सैफुद्दीन सोज भी चार बार सांसद रहे थे. 1999 में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अटल बिहारी सरकार को समर्थन दिया था. इससे नाराज होकर सोज ने नेशनल कॉन्फ्रेंस से इस्तीफा दे दिया और अटल बिहारी सरकार के खिलाफ में वोट किया था. इस कारण 13 महीने की अटल बिहारी सरकार गिर गई थी. 2003 में सोज ने कांग्रेस पार्टी जॉइन की और वह 2006 में राज्यसभा भेजे गए.

यह लोकसभा सीट नेशनल कान्‍फ्रेंस का गढ़ रही है.
यह लोकसभा सीट नेशनल कान्‍फ्रेंस का गढ़ रही है.


1977 से 1989 तक लगातार पांच चुनावों में यहां से नेशनल कॉन्फ्रेंस जीती. इसमें तीन बार सैफुद्दीन सोज जीते. 1996 में कांग्रेस के गुलाम रसूल को कामयाबी मिली. 1998 में सैफुद्दीन सोज चौथी बार सांसद बने. एक साल बाद 1999 और 2004 में नेशनल कॉन्फ्रेंस के अब्दुल रशीद शाहीन जीते. 2009 में इसी पार्टी के शरीफुद्दीन शारिक जीते. 2014 में वो हार गए. तब पीडीपी के मुजफ्फर हुसैन बेग ने उन्हें हराया.

मुजफ्फर हुसैन बेग ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रत्याशी शरीफुद्दीन शारिक को करीब 29 हजार वोटों से शिकस्त दी. तीसरे नंबर पर सज्जाद लोन की पार्टी पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के प्रत्याशी सलामुद्दीन बजाद करीब 71 हजार वोट पाकर रहे. श्रीनगर और अनंतनाग सीट की तरह इस सीट पर बीजेपी प्रत्याशी अपना जमानत नहीं बचा पाया. बीजेपी के गुलाम मोहम्मद मीर को सिर्फ 6558 वोट मिले थे.

सामाजिक समीकरण
बारामूला लोकसभा सीट के अंतर्गत 15 विधानसभा सीट आती हैं. इनमें से 2014 के विधानसभा चुनाव में पीडीपी ने सात, नेशनल कॉन्फ्रेंस ने तीन, कांग्रेस ने दो सीटों, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस ने दो और निर्दलीय प्रत्याशी ने एक सीट पर जीत दर्ज की थी. यहां करीब 13,17,738 मतदाता हैं. इस पूरे क्षेत्र में लगभग 98 फीसदी  मतदाता मुस्लिम ही हैं. अन्य दो प्रतिशत मतदाताओं में सिख, कश्मीरी पंडित व अन्य अल्पसंख्यक हैं. कश्मीरी पंडित मतदाताओं में करीब 10 हजार विस्थापित हैं.
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