जूनागढ़ लोकसभा सीट: बीजेपी के गढ़ में इस बार कांग्रेस के हौसले बुलंद

2019 के चुनाव में बीजेपी ने अपने मौजूदा सांसद राजेश चुडास्मा पर भरोसा जताया है. उनके मुकाबले में कांग्रेस ने अपने विधायक पुंजा वंश को उतारा है. 2014 के चुनाव में भी इन दोनों के बीच मुकाबला हुआ था. जिसमें राजेश चुडास्मा ने बाजी मारी थी.

News18Hindi
Updated: May 17, 2019, 12:58 PM IST
जूनागढ़ लोकसभा सीट: बीजेपी के गढ़ में इस बार कांग्रेस के हौसले बुलंद
जूनागढ़ लोकसभा सीट पर इस बार कांग्रेस और बीजेपी में टक्‍कर है.
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Updated: May 17, 2019, 12:58 PM IST
जूनागढ़ लोकसभा सीट 1991 से बीजेपी का गढ़ रही है. बीच में सिर्फ 2004 में इस सीट पर कांग्रेस को कामयाबी मिली. बीजेपी के राजेशभाई चुडास्मा यहां के मौजूदा सांसद हैं. इस बार बीजेपी के लिए जीत की राह आसान नहीं हैं. 2017 के विधानसभा चुनाव में इस सीट के अंतर्गत आने वाली सभी 7 विधानसभा सीटों पर बीजेपी को हार मिली थी. सभी सीटों पर कांग्रेस ने कब्जा जमाया था. पाटीदार आंदोलन के असर वाली इन सीटों पर किसानों की समस्या, पानी की कमी और महंगे खाद्य पदार्थ के मुद्दों से बीजेपी को नुकसान हो सकता है.

2019 के चुनाव में बीजेपी ने अपने मौजूदा सांसद राजेश चुडास्मा पर भरोसा जताया है. उनके मुकाबले में कांग्रेस ने अपने विधायक पुंजा वंश को उतारा है. 2014 के चुनाव में भी इन दोनों के बीच मुकाबला हुआ था. जिसमें राजेश चुडास्मा ने बाजी मारी थी. लेकिन इस बार हालात अलग हैं. बीएसपी ने इस सीट से देवेन गोविंदभाई को टिकट दिया है.



2014 में भी बीजेपी के राजेश भाई और कांग्रेस के पुंजा में मुकाबला था.
2014 में भी बीजेपी के राजेश भाई और कांग्रेस के पुंजा में मुकाबला था.


2014 के चुनाव का हाल

2014 के लोकसभा चुनाव में राजेश चुडास्मा ने जीत हासिल
की थी. इन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार पुंजाभाई वंश को 1.35 लाख वोटों के अंतर से हराया था. राजेश चुडास्मा को 5 लाख 13 हजार 179 वोट हासिल हुए थे. जबकि पुंजाभाई वंश को 3 लाख 77 हजार 347 वोट मिले थे. 2017 के पाटीदार आंदोलन का असर इसके इलाकों में रहा था. उसी का नतीजा था कि बीजेपी को विधानसभा में बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा. अब हार्दिक पटेल कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं. कांग्रेस के उत्साहित होने की एक वजह ये भी है.

जूनागढ़ सीट का राजनीतिक इतिहास
जूनागढ़ लोकसभा सीट पर पहला चुनाव 1962 में हुआ. इस चुनाव में कांग्रेस के चितरंजन राजा की जीत हुई. 1967 के चुनाव में यहां से स्वतंत्र पार्टी के उम्मीदवार विरेन शाह सांसद बने. 1971 में कांग्रेस को एक बार फिर कामयाबी मिली और नानजीभाई वेकारिया संसद पहुंचे. इमरजेंसी के बाद हुए 1977 के चुनाव में भारतीय लोकदल के नरेंद्र नाठवानी जीते.
यहां से बसपा ने भी अपना उम्‍मीदवार उतारा है.
यहां से बसपा ने भी अपना उम्‍मीदवार उतारा है.


1980 और 1984 के चुनाव में कांग्रेस के मोहनभाई पटेल ने जीते. 1989 के चुनाव में जनता दल के उम्मीदवार को कामयाबी मिली. यहां से गोविंदभाई शेखाड़ा चुनाव जीते. 1991 से लेकर 1999 के चुनावों में लगातार 4 बार बीजेपी की भावना चिखलिया ने जीत हासिल की. 2004 के चुनाव मे भावना चिखलिया को कांगर्स के जशूभाई बराड़ ने शिकस्त दी. 2009 और 2014 में फिर से बीजेपी ने यहां बाजी मारी. 2009 में दीनूभाई सोलंकी और 2014 में राजेश चुड़ास्मा यहां से सांसद बने.
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