लद्दाख लोकसभा सीट: पिछली बार 36 वोटों के अंतर से हुआ था फैसला, इस बार क्या होगा

इस बार लद्दाख लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी ने जामयांग शेरिंग नामग्याल को चुनाव मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस ने रिगजिन स्पालबार पर दांव लगाया है. इसके अलावा असगर अली कर्बलाई और सज्जाद हुसैन बतौर निर्दलीय अपनी किस्मत आजमा रहे हैं.

News18Hindi
Updated: May 17, 2019, 10:19 AM IST
लद्दाख लोकसभा सीट: पिछली बार 36 वोटों के अंतर से हुआ था फैसला, इस बार क्या होगा
लद्दाख लोकसभा सीट पर पांचवे चरण में 6 मई को चुनाव हुआ है.
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Updated: May 17, 2019, 10:19 AM IST
देश का सबसे ठंडा और क्षेत्रफल के लिहाज से देश में सबसे बड़ा लोकसभा क्षेत्र लद्दाख है. हालांकि जनसंख्या बहुत कम है. यह एक दुर्गम रिहायशी इलाका है. कई मतदान केंद्रों पर बहुत कम मतदाता हैं. कुछ केंद्रों पर अधिकारियों को वायुमार्ग से भेजने की जरूरत पड़ती है. लद्दाख ऐसा इलाका है, जहां से बीजेपी को बड़ी उम्मीदें हैं. यहां पर पांचवें फेज में यानी छह मई को चुनाव हुआ. लद्दाख सीट के तहत दो जिलों लेह और कारगिल के इलाके आते हैं. यहां पर सबसे ऊंचे स्थान पर पोलिंग बूथ लेह जिले में था, जो 15 हजार फुट की ऊंचाई पर बनाया गया. यह बूथ पाकिस्तान की नियंत्रण रेखा से महज 50 मीटर दूर था.

कौन हैं प्रत्याशी?


इस बार लद्दाख लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी ने जामयांग शेरिंग नामग्याल को चुनाव मैदान
में उतारा है, जबकि कांग्रेस ने रिगजिन स्पालबार पर दांव लगाया है. इसके अलावा असगर अली कर्बलाई और सज्जाद हुसैन बतौर निर्दलीय अपनी किस्मत आजमा रहे हैं.

पिछले चुनाव का हाल

लद्दाख लोकसभा सीट से पिछली बार बीजेपी के थुपस्तान छेवांग ने जीत दर्ज की थी और यहां पहली बार कमल खिला था. बीजेपी के छेवांग को निर्दलीय प्रत्याशी गुलाम रजा ने कड़ी टक्कर दी थी. पिछले चुनाव में छेवांग को महज 36 वोटों से जीत मिली थी. छेवांग को 31 हजार 111 और गुलाम रजा को 31 हजार 75 वोट मिले थे.

लद्दाख लोकसभा सीट पर पहली बार 2014 लोकसभा चुनाव में कमल खिला था.
लद्दाख लोकसभा सीट पर पहली बार 2014 लोकसभा चुनाव में कमल खिला था.


तीसरे नंबर पर निर्दलीय प्रत्याशी सैयद मोहम्मद काजिम  रहे और उनको 28 हजार 234 वोट मिले. इसके साथ ही चौथे नंबर पर रहे कांग्रेस के सेरिंग सेम्फेल को 26 हजार 402 वोटों से संतोष करना पड़ा था. हालांकि छेवांग ने नवंबर 2018 में लोकसभा से इस्तीफा दे दिया था और पार्टी नेतृत्व से असहमति का हवाला देते हुए भारतीय जनता पार्टी छोड़ दी थी. इससे पहले छेवांग निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में 2004 का चुनाव जीते चुके हैं.
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कांग्रेस के ही टिकट पर 1977 में पार्वती देवी, 1980 और 1984 में पी. नामग्याल संसद पहुंचे. 1989 में निर्दलीय मोहम्मद हसन कमांडर जीतने में कामयाब रहे. 1991 में चुनाव नहीं हुआ. 1996 में तीसरी बार कांग्रेस के टिकट पर पी. नामग्याल चुनाव जीते. इसके बाद इस सीट पर पहली बार नेशनल कांफ्रेंस जीती थी. 1998 में नेशनल कांफ्रेंस के टिकट पर सैयद हुसैन और 1999 में हसन खान संसद पहुंचे थे. 2004 में निर्दलीय प्रत्याशी थुपस्तान छेवांग जीते थे. 2009 में यह सीट अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हो गई और इस सीट से निर्दलीय प्रत्याशी हसन खान जीतकर दूसरी बार संसद पहुंचे थे.

लद्दाख में सबसे ऊंचा पोलिंग बूथ 15 हजार फुट की ऊंचाई पर बनाया गया था.
लद्दाख में सबसे ऊंचा पोलिंग बूथ 15 हजार फुट की ऊंचाई पर बनाया गया था.


सामाजिक समीकरण
लद्दाख में एक लाख 74 हजार 618 वोटर हैं. लद्दाख लोकसभा सीट में चार विधानसभा क्षेत्र कारगिल, जानस्कर, लेह और नोबरा आते हैं. 2014 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने तीन और निर्दलीय ने एक सीट जीती थी. लद्दाख लोकसभा सीट अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित है.

माना जाता है कि लद्दाख में बौद्ध और मुस्लिम मदाताओं के बीच ध्रुवीकरण होता रहा है. बौद्ध मतदाताओं का शुरू से ही विचार रहा है कि उनका हित श्रीनगर के बजाय नई दिल्ली के नेताओं के हाथों में महफूज है. दूसरी तरफ मुस्लिम धार्मिक कारणों से घाटी के लोगों के साथ रहे हैं.
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