साबरकांठा लोकसभा सीट: बीजेपी के दीप सिंह राठौड़ के सामने सीट बचाने की चुनौती

बीजेपी के दीप सिंह राठौड़ के मुकाबले कांग्रेस ने राजेंद्र ठाकोर को चुनाव मैदान में उतारा है. वहीं बीएसपी ने इस सीट से विनोद भाई जेठाभाई को टिकट दिया है. इसके अलावा कई क्षेत्रीय पार्टियां और निर्दलीय भी चुनाव मैदान में हैं. मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच है.

News18Hindi
Updated: May 17, 2019, 12:31 PM IST
साबरकांठा लोकसभा सीट: बीजेपी के दीप सिंह राठौड़ के सामने सीट बचाने की चुनौती
साबरकांठा में बीजेपी और कांग्रेस में टक्‍कर है.
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गुजरात की साबरकांठा लोकसभा सीट पर बीजेपी का कब्जा है. यहां से दीप सिंह राठौड़ सांसद हैं. 2009 के चुनाव में भी बीजेपी ने कामयाबी पाई थी. 2019 के चुनाव में बीजेपी ने एक बार फिर अपने मौजूदा सांसद पर भरोसा जताया है. बीजेपी के दीप सिंह राठौड़ के मुकाबले कांग्रेस ने राजेंद्र ठाकोर को चुनाव मैदान में उतारा है. वहीं बीएसपी ने इस सीट से विनोद भाई जेठाभाई को टिकट दिया है. इसके अलावा कई क्षेत्रीय पार्टियां और निर्दलीय भी चुनाव मैदान में हैं. मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच है.

2014 के चुनाव का हाल


2014 के लोकसभा चुनाव में यहां से बीजेपी के दीप सिंह राठौड़ ने जीत हासिल
की थी. इन्होंने कांग्रेस के शंकर सिंह वाघेला को शिकस्त दी थी. दीप सिंह राठौड़ ने 5 लाख 52 हजार 205 वोट हासिल किए थे. जबकि शंकर सिंह वाघेला को 4 लाख 67 हजार 750 वोट मिले थे. बाकी सारे उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी.

साबरकांठा सीट का राजनीतिक इतिहास

साबरकांठा सीट कांग्रेस का गढ़ रहा है. यहां से गुलजारी लाल नंदा और मधुसूदन मिस्त्री जैसे कांग्रेस के दिग्गज सांसद चुने गए हैं. 1951 में हुए पहले चुनाव में यहां से गुलजारी लाल नंदा ने जीत हासिल की. वो लगातार 3 बार 1951, 1957 और 1962 के चुनावों में यहां से जीतकर संसद पहुंचे.

पिछले लोकसभा चुनाव में यहां से बीजेपी उम्‍मीदवार ने जीत दर्ज की थी.
पिछले लोकसभा चुनाव में यहां से बीजेपी उम्‍मीदवार ने जीत दर्ज की थी.


1967 के चुनाव में यहां से सीसी देसाई ने जीत हासिल की. देसाई बाद में कांग्रेस से अलग हुए धड़े ऑर्गेनाइजेशन कांग्रेस में चले गए और 1971 का चुनाव जीते. 1977 की जनता पार्टी की लहर में यहां से एच एम पटेल ने जीत हासिल की. 1980 में एक बार फिर कांग्रेस ने वापसी की और शांतुभाई पटेल जीते.
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1984 के चुनाव में जीतकर एच एम पटेल दूसरी बार सांसद बने. 1989 में ये सीट जनता दल के खाते में गई और 1991 के चुनाव में यहां से पहली बार बीजेपी को सफलता मिली. अरविंद त्रिवेदी जीतकर संसद पहुंचे. इसके बाद 1996 से लेकर 2009 तक इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहा. 1996, 1998 और 1999 के चुनाव में निशा चौधरी ने जीत हासिल की. 2001 से लेकर 2009 तक यहां से मधुसूदन मिस्त्री सांसद रहे. 2009 के चुनाव में बीजेपी ने कामयाबी पाई और महेंद्रसिंह चौहान सांसद बने.

यहां से कांग्रेस के गुलजारी लाल नंदा जैसे दिग्‍गज सांसद रह चुके हैं.
यहां से कांग्रेस के गुलजारी लाल नंदा जैसे दिग्‍गज सांसद रह चुके हैं.


इस सीट पर विधानसभा की 7 सीटें
साबरकांठा लोकसभा सीट के अंतर्गत विधानसभा की 7 सीटें आती हैं. इनमें हिम्मतनगर, भिलोडा, ईडर, मोडासा, बायड, खेडब्रह्मा और प्रांतिज विधान सभा सीटें शामिल हैं. इनमें भिलोडा और खेडब्रह्मा अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है, जबकि ईडर अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है.
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