सिक्किम: एंटी इनकंबेंसी से बिगड़ सकता है सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट का खेल

2019 के चुनाव में सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट ने अपना उम्मीदवार बदल दिया है. मौजूदा सांसद प्रेमदास राय का टिकट काटकर डेक बहादुर कटवाल को चुनावी मैदान में उतारा गया है. हालांकि सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट को इस बार एंटी इनकंबेसी का भी सामना करना पड़ सकता है.

News18Hindi
Updated: May 23, 2019, 12:04 PM IST
सिक्किम: एंटी इनकंबेंसी से बिगड़ सकता है सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट का खेल
सिक्किम में एक ही लोकसभा सीट है. यहां से पिछली बार सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट के उम्‍मीदवार ने चुनाव जीता था.
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Updated: May 23, 2019, 12:04 PM IST
मतगणना के चलते 23 मई को सिक्किम विधानसभा चुनावों के साथ लोकसभा चुनाव के भी नतीजे आ रहे हैं और कई तरह के समीकरणों पर नज़र बनी हुई है. ऐसे में एंटी इनकंबेंसी का ज़िक्र भी ज़रूरी हो गया है. सिक्किम में लोकसभा की एक सीट है. इस सीट से सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट के प्रेमदास राय सांसद हैं. 2009 के चुनाव में भी प्रेमदास राय ने जीत हासिल की थी. सिक्किम लोकसभा सीट पर सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट का वर्चस्व रहा है. पार्टी 1996 से लगातार इस सीट को जीतती आ रही है.

2019 के चुनाव में सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट ने अपना उम्मीदवार बदल दिया है. मौजूदा सांसद प्रेमदास राय का टिकट काटकर डेक बहादुर कटवाल को चुनावी मैदान में उतारा गया है. हालांकि सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट को इस बार एंटी इनकंबेसी का भी सामना करना पड़ सकता है.



सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा काफी वक्त से सत्ताशीन पार्टी का विरोध कर रही है. सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा ने कटवाल के मुकाबले में इंद्राहंद सुब्बा को टिकट दिया है. कांग्रेस ने भारत बैसनेट को उतारा है और बीजेपी की ओर से लातेन शेरिंग शेरपा चुनाव लड़ रहे हैं.

यहां मुख्‍य मुकाबला सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट और सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा के बीच है लेकिन बीजेपी और कांग्रेस ने भी उम्‍मीदवार उतारे हैं.
यहां मुख्‍य मुकाबला सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट और सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा के बीच है लेकिन बीजेपी और कांग्रेस ने भी उम्‍मीदवार उतारे हैं.


2014 के चुनाव का हाल
2014 के लोकसभा चुनाव में सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट के प्रेम दास राय ने जीत हासिल की थी. उन्होंने सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा के टेकनाथ ढकाल को 41 हजार 742 वोटों से हराया था. प्रेमदास राय को एक लाख 63 हजार 698 वोट मिले थे. जबकि टेकनाथ ढकाल ने 1 लाख 21 हजार 956 वोट हासिल किए थे.

सिक्किम का राजनीतिक इतिहाससिक्किम स्वायत्तशासी इलाका था. 1975 में ये भारत में शामिल हो गया. 1977 में हुए पहले चुनाव में यहां से कांग्रेस के छत्र बहादुर छेत्री ने जीत हासिल की. 1980 के चुनाव में सिक्किम जनता परिषद के पहल मन सुब्बा सांसद चुने गए. इसके बाद 1984 में हुए चुनाव में एक निर्दयील उम्मीदवार नर बहादुर भंडारी विजयी रहे. इसके बाद हुए अगले तीन चुनावों में सिक्किम संग्राम परिषद के उम्मीदवार जीतते रहे. 1985 के उपचुनाव में दिल कुमारी भंडारी, 1989 के चुनाव में नंदू थापा और 1991 के चुनाव में एक बार फिर दिल कुमारी भंडारी इस सीट से सांसद बने.

 कांग्रेस ने भारत बैसनेट को उतारा है और बीजेपी की ओर से लातेन शेरिंग शेरपा चुनाव लड़ रहे हैं.
कांग्रेस ने भारत बैसनेट को उतारा है और बीजेपी की ओर से लातेन शेरिंग शेरपा चुनाव लड़ रहे हैं.


1996 से अब तक इस सीट पर सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट का कब्जा है. पार्टी लगातार 6 बार जीत हासिल कर चुकी है. 1996 से लेकर 2004 तक इस सीट से भीम प्रसाद दहल सांसद रहे. 2004 से लेकर 2009 तक नकुल दास राय ने इस सीट का प्रतिनिधित्व किया. 2009 और 2014 के चुनाव में यहां से प्रेमदास राय ने जीत हासिल की.

यहां कांग्रेस और बीजेपी जैसी राष्ट्रीय पार्टियों का असर ज्यादा नहीं है.
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