Home /News /delhi-ncr /

क्षेत्रीय पार्टियों के सामने बौनी क्यों होती जा रही है राहुल गांधी की कांग्रेस!

क्षेत्रीय पार्टियों के सामने बौनी क्यों होती जा रही है राहुल गांधी की कांग्रेस!

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी (फाइल फोटो)

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी (फाइल फोटो)

क्षेत्रीय पार्टियां नहीं चाहतीं कि कांग्रेस आगे बढ़े, कांग्रेस मजबूत होगी तो वो कमजोर होंगी. क्षेत्रीय दलों की ताजपोशी कमजोर कांग्रेस ही कर सकती है न कि मजबूत कांग्रेस.

    राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनवाने का ख्वाब देख रही कांग्रेस पर छोटी-छोटी पार्टियों ने बड़ा दबाव बना दिया है. ऐसा दबाव जिसमें छोटी पार्टियों का कद लगातार बढ़ रहा है और कांग्रेस उनके सामने बौनी नजर आती है. सबसे ज्यादा वक्त तक सत्ता में रही कांग्रेस पार्टी के साथ आने से भाजपा के घोर विरोधी दल भी परहेज करने लगे हैं. ममता बनर्जी, चंद्रशेखर राव, चंद्रबाबू नायडू, अखिलेश यादव और मायावती जैसे नेता थर्ड फ्रंट को मजबूती से आगे बढ़ाने की कोशिश में हैं और कांग्रेस को इग्नोर कर रहे हैं. आखिर इसकी वजह क्या है?

    रविवार को हुई नीति आयोग की बैठक से एक दिन पहले दिल्ली पहुंचे चंद्रबाबू नायडू, ममता बनर्जी,  एचडी कुमारस्वामी अरविंद केजरीवाल के समर्थन की घोषणा करते हुए उनसे मुलाकात की कोशिश की. उनके परिवार से मुलाकात की. लेकिन उन्होंने राहुल गांधी से मुलाकात जरूरी नहीं समझी.

    एचडी कुमारस्वामी की पार्टी जेडीएस के साथ तो उनका सबसे ताजा गठबंधन हुआ है, फिर भी वो राहुल गांधी से मिलने नहीं गए. तीसरे मोर्चे की कवायद में जुटे नेता राहुल गांधी की इफ्तार पार्टी से नदारद रहे. ममता बनर्जी, मायावती, अखिलेश यादव, आरएलडी नेता अजीत सिंह, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला और एनसीपी प्रमुख शरद पवार भी इफ्तार पार्टी में शामिल नहीं हुए, जबकि इस पार्टी को विपक्षी एकता दिखाने के एक बड़े मौके की तरह देखा जा रहा था.

     कांग्रेस, राहुल गांधी, congress, rahul gandhi,mamta banerjee, mayawati, akhilesh yadav, ममता बनर्जी, मायावती, अखिलेश यादव, Aam Aadmi Party, आम आदमी पार्टी, अरविंद केजरीवाल, arvind kejriwal, Third Front, तीसरा मोर्चा, federal front, फेडरल फ्रंट, TMC, 2019 lok sabha election, RJD, sharad pawar, BJP, आरजेडी, शरद पवार, चंद्र बाबू नायडू, loksabha election 2019, तृणमूल कांग्रेस, बीजू जनता दल, टीआरएस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, आम आदमी पार्टी, एआईयूडीएफ, जनता दल सेक्युलर, नेशनल कांफ्रेंस, बहुजन समाज पार्टी, आरएलडी, Trinamool Congress, Biju Janata Dal, TRS, Samajwadi Party, Nationalist Congress Party, Rashtriya Janata Dal, AIUDF, Janata Dal (BJD), JDS, Jharkhand Mukti Morcha, National Conference, Bahujan Samaj Party, DMK, RLD, Narendra modi, rahul gandhi, BJP, Congress, madhya pradesh assembly election 2018, मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2018        अरविंद केजरीवाल के घर चार राज्यों के मुख्यमंत्री
    कुल मिलाकर अभी छोटी पार्टियां कांग्रेस को ज्यादा तवज्जो नहीं दे रही हैं. राज्यसभा के उप-सभापति पद के चुनाव में भी कांग्रेस को छोटी पार्टियों का सहयोग मिलता नहीं दिख रहा है. गैर-कांग्रेसी विपक्षी नेता आपस में बातचीत रहे हैं. समझा जाता है कि ये नेता इस चुनाव का इस्तेमाल नवीन पटनायक के बीजू जनता दल (बीजेडी) को साथ लाकर गैर-एनडीए गठबंधन के विस्तार के लिए करना चाहते हैं. राज्यसभा में 9 सदस्यों वाली बीजेडी और 6 सदस्यों वाली टीआरएस (तेलंगाना राष्ट्रीय समिति) पहले ही घोषणा कर चुकी हैं कि वह उप-सभापति के चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार का समर्थन नहीं करेंगी.

    हालांकि, राहुल गांधी यह ऐलान कर चुके हैं कि उनकी पार्टी सभी राज्यों के प्रभावशाली क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर काम करने की इच्छा रखती है. वह इसके लिए पूरी तरह से तैयार हैं. कांग्रेस के लिए कोई भी अछूत नहीं है. इसके बावजूद बहुजन समाज पार्टी ने मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में 230 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का एलान कर दिया है. समाजवादी पार्टी भी वहां मैदान में अकेले ही उतर रही है.

    क्‍या कहते हैं ममता, अखिलेश और नायडू के ट्वीट
    याद कीजिए, कर्नाटक में येदियुरप्पा के इस्तीफे के बाद ममता बनर्जी, अखिलेश यादव और चंद्रबाबू नायडू ने जो ट्वीट किए, उसमें कर्नाटक में बीजेपी पर मिली विपक्ष की सियासी कामयाबी का सेहरा राहुल गांधी के सिर नहीं बांधा. बनर्जी ने जीत का श्रेय पहले कर्नाटक की जनता को दिया, फिर एचडी देवगौड़ा, कुमारस्वामी और अंत में कांग्रेस को. लेकिन उसमें राहुल गांधी का जिक्र नहीं किया. अखिलेश यादव और चंद्रबाबू नायडू ने भी अपने ट्वीट में न तो कांग्रेस को श्रेय दिया और न ही राहुल गांधी को.







    सियासी जानकारों का कहना है कि ममता बनर्जी, अखिलेश यादव और चंद्रबाबू नायडू सहित कई क्षेत्रीय पार्टियों के नेता 2019 में प्रधानमंत्री पद के लिए विपक्ष के प्रत्याशी के तौर पर राहुल गांधी को नकारते नजर आ रहे हैं.

    कांग्रेस को क्यों किनारे कर रहीं पार्टियां?
    यूपीए की कमान कांग्रेस के हाथ में है. लेकिन उसमें सिर्फ 10 पार्टियां रह गई हैं. संसद सदस्य सिर्फ 52 हैं. लोकसभा इलेक्शन के सबसे बड़े रणक्षेत्र उत्तर प्रदेश में हुए गोरखपुर और फूलपुर उप चुनावों में कांग्रेस का कहीं अता-पता नहीं था. जबकि सपा और बसपा ने मिलकर बीजेपी से उसकी यह सीटें छीन लीं. इसके बाद तय हो गया कि अब कम से कम यूपी में कांग्रेस भाजपा विरोधी दलों को लीड करने की हैसियत में नहीं है. हिमाचल और गुजरात चुनाव में मायावती कांग्रेस के साथ समझौता करके सीट चाहती थीं लेकिन कांग्रेस ने ऐसा नहीं किया. उधर, ममता बनर्जी और कांग्रेस की पुरानी सियासी खटपट है.

     कांग्रेस, राहुल गांधी, congress, rahul gandhi,mamta banerjee, mayawati, akhilesh yadav, ममता बनर्जी, मायावती, अखिलेश यादव, Aam Aadmi Party, आम आदमी पार्टी, अरविंद केजरीवाल, arvind kejriwal, Third Front, तीसरा मोर्चा, federal front, फेडरल फ्रंट, TMC, 2019 lok sabha election, RJD, sharad pawar, BJP, आरजेडी, शरद पवार, चंद्र बाबू नायडू, loksabha election 2019, तृणमूल कांग्रेस, बीजू जनता दल, टीआरएस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, आम आदमी पार्टी, एआईयूडीएफ, जनता दल सेक्युलर, नेशनल कांफ्रेंस, बहुजन समाज पार्टी, आरएलडी, Trinamool Congress, Biju Janata Dal, TRS, Samajwadi Party, Nationalist Congress Party, Rashtriya Janata Dal, AIUDF, Janata Dal (BJD), JDS, Jharkhand Mukti Morcha, National Conference, Bahujan Samaj Party, DMK, RLD, Narendra modi, rahul gandhi, BJP, Congress, madhya pradesh assembly election 2018, मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2018         क्या 2019 में मोदी के सामने टिक पाएंगे राहुल गांधी?

    कांग्रेस से परहेज के पीछे क्या ये है रणनीति?
    कांग्रेस के साथ पार्टी और पार्टी अध्यक्ष की इमेज से भी जुड़े सवाल हैं. दरअसल, बीजेपी सबसे ज्यादा कांग्रेस को टारगेट करती है तो इसके पीछे सोची-समझी रणनीति है. भाजपा में ही कुछ लोग यह मानते हैं कि जब तक कांग्रेस के पास राहुल गांधी जैसा नेतृत्व रहेगा, तब तक हमारे लिए कांग्रेस का मुकाबला करना बेहद आसान रहेगा.

    राजनीति के कई जानकार नरेंद्र मोदी की इतनी बड़ी छवि के लिए राजनीतिक तौर पर उनके सामने खड़े राहुल गांधी की कमजोर छवि को जिम्मेदार बताते हैं. बीजेपी अन्य पार्टियों के मुकाबले बहुत आसानी से भ्रष्टाचार एवं अन्य मसलों पर कांग्रेस को घेर लेती है. बीजेपी ने राहुल गांधी की इमेज अभी नौसिखिए की बनाई हुई है. इसलिए कांग्रेस से दूरी बनाकर मोदी के सामने खड़े होने की कोशिश हो रही है.

    'क्षेत्रीय दलों को चाहिए कमजोर कांग्रेस'
    '24 अकबर रोड' नामक किताब लिखने वाले राशिद किदवई कहते हैं "क्षेत्रीय पार्टियां का जन्‍म कांग्रेस से ही हुआ है इसलिए वो नहीं चाहती हैं कि कांग्रेस आगे बढ़े. कांग्रेस मजबूत होगी तो वो कमजोर होंगी. क्षेत्रीय दलों की ताजपोशी कमजोर कांग्रेस ही कर सकती है. अभी क्षेत्रीय पार्टियां ऐसा माहौल बनाना चाहती हैं कि कांग्रेस मजबूरी में उनका समर्थन कर दे. वो आगे की जगह हाशिए पर रहे. उन्‍हें राहुल की ताजपोशी करने में कोई दिलचस्‍पी नहीं है. उनका स्‍वार्थ अपना किला मजबूत करने का है."

    वरिष्‍ठ पत्रकार किदवई के मुताबिक "कांग्रेस राहुल गांधी को पीएम बनवाने के लिए छटपटा रही है, इससे विपक्षी पार्टियों को दिक्‍कत है. सियासत में अगर आप मजबूत होंगे तो ही आपका मान सम्‍मान होगा. कांग्रेस इस समय बहुत कमजोर है इसलिए ऐसी बातें हो रही हैं. राहुल गांधी को ऐसी कोई जीत नहीं मिल रही है कि उनकी धाक जमे."

    '2019 में ज्यादा सीटों के लिए दबाव की सियासत'
    हालांकि, राजनीतिक विश्‍लेषक आलोक भदौरिया कहते हैं "राहुल गांधी अभी भाजपा विरोधी क्षेत्रीय दलों के स्‍वीकार्य नेता नहीं हैं, लेकिन अगर मध्‍य प्रदेश, छत्‍तीसगढ़ और राजस्‍थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस मजबूत हुई तो क्षेत्रीय दल कांग्रेस के साथ आ जाएंगे. एमपी में सपा, बसपा कांग्रेस के खिलाफ लड़ रहे हैं तो कांग्रेस को नुकसान जरूर होगा. लेकिन यह सिर्फ ज्‍यादा सीटें हथियाने की एक कोशिश भर है."

    federal front, mamta banerjee, TMC, 2019 lok sabha election, meesa bharti, RJD, sharad pawar, akhilesh, mayawati, BJP, loksabha election 2019, तृणमूल कांग्रेस, बीजू जनता दल, टीआरएस, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, आम आदमी पार्टी, एआईयूडीएफ, जनता दल सेक्युलर, झारखंड मुक्ति मोर्चा, नेशनल कांफ्रेंस, बहुजन समाज पार्टी, डीएमके, आरएलडी, Trinamool Congress, Biju Janata Dal, TRS, Samajwadi Party, Nationalist Congress Party, Rashtriya Janata Dal, Aam Aadmi Party, AIUDF, Janata Dal (BJD), JDS, Jharkhand Mukti Morcha, National Conference, Bahujan Samaj Party, DMK, RLD, Narendra modi, rahul gandhi, BJP, Congress,       अखिलेश-मायावती ने बढ़ाई कांग्रेस की बेचैनी

    "सपा, बसपा नेताओं को पता है कि मध्य प्रदेश में उनको कितना वोट मिलेगा. इसीलिए यह सिर्फ दबाव बनाने की कोशिश है. क्योंकि ये क्षत्रप यह मानकर चल रहे हैं कि लोकसभा चुनाव में जितनी सीटें राहुल गांधी लाएंगे उतनी तो वे भी निकाल लेंगे. लेकिन इन तीनों राज्‍यों में कांग्रेस का सीधा मुकाबला बीजेपी से है, ऐसे में वह यहां दबाव क्‍यों स्‍वीकार करेगी. हालांकि, लोकसभा चुनाव में असली रणक्षेत्र यूपी है, जहां उसे छोटा सहयोगी बनना स्‍वीकार करना पड़ेगा. क्‍योंकि वहां पार्टी की क्‍या हालत है यह बात राहुल गांधी अच्‍छी तरह से जानते हैं."

    Tags: Akhilesh yadav, Congress, Mamta Bannerjee, Mayawati, Rahul gandhi

    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर