LOK SABHA ELECTIONS 2019: दिल्ली की उत्तर-पश्चिमी लोकसभा सीट से हंसराज हंस पर कमल खिलाने का है दारोमदार

हंसराज हंस ने साल 2017 के दिल्ली एमसीडी चुनाव में कई रैलियां और सभाएं कीं, जिसका नतीजा बीजेपी की जीत के रूप में देखा गया. इसीलिए बीजेपी ने दिल्ली की उत्तरी-पश्चिमी सीट से मौजूदा सांसद उदित राज का टिकट काट कर इस बार हंस को उम्मीदवार बनाया. साल 2016 में बीजेपी ज्वाइन करते समय हंसराज हंस ने कहा था कि मोदी बब्बर शेर हैं.

News18Hindi
Updated: May 20, 2019, 10:03 PM IST
LOK SABHA ELECTIONS 2019: दिल्ली की उत्तर-पश्चिमी लोकसभा सीट से हंसराज हंस पर कमल खिलाने का है दारोमदार
फोटो साभार: हंसराज हंस के फेसबुक वॉल से
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Updated: May 20, 2019, 10:03 PM IST
लोकसभा चुनाव 2019 में दिल्ली की उत्तरी-पश्चिमी सीट से बीजेपी ने जाने-माने सूफी गायक हंसराज हंस मैदान में उतारा है. हंसराज हंस का मुकाबला आम आदमी पार्टी के गुग्गन सिंह और कांग्रेस के राजेश लिलोठिया से हो रहा है. हंसराज हंस का जन्म 9 अप्रैल 1962 को जालंधर के शफीपुर में हुआ. हंस राज हंस ने 2009 में शिरोमणि अकाली दल से अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की. फिर पांच साल बाद 2014 में हंसरास हंस ने अकाली दल छोड़ कर कांग्रेस पार्टी का दामन थाम लिया. करीब दो साल कांग्रेस में रहने के बाद हंसराज हंस ने दिसंबर 2016 में बीजेपी ज्वाइन कर लिया.

हंसराज हंस ने साल 2017 के दिल्ली एमसीडी चुनाव में कई रैलियां और सभाएं कीं, जिसका नतीजा बीजेपी की जीत के रूप में देखा गया. इसीलिए बीजेपी ने दिल्ली की उत्तरी-पश्चिमी सीट से मौजूदा सांसद उदित राज का टिकट काट कर इस बार हंस को उम्मीदवार बनाया. साल 2016 में बीजेपी ज्वाइन करते समय हंसराज हंस ने कहा था कि मोदी बब्बर शेर हैं.



भारत का नक्शा


हंसराज हंस वाशिंगटन डीसी यूनिवर्सिटी और सैन जोस स्टेट यूनिवर्सिटी में संगीत के मानद प्रोफेसर भी हैं. हंस 1983 से लगातार म्यूजिक इंडस्ट्री में काम कर रहे हैं. उन्होंने ऊपर खुदा आसमां नीचे, टोटे-टोटे हो गया, तेरे बिन नई जीना, मर जान जैसे गानों से अपनी पहचान बनाई है.

हंसराज हंस का पंजाब के दोआबा क्षेत्र में अच्छा प्रभाव माना जाता है. पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले ये संभावना थी कि वे बीजेपी के टिकट पर अमृतसर से चुनाव लड़ सकते हैं, लेकिन ऐसा हुआ नहीं था. हंसराज हंस ने 2009 में शिरोमणी अकाली दल से लोकसभा चुनाव भी लड़ा था लेकिन वे हार गए थे.

बता दें कि मतदाताओं की संख्या को आधार पर नार्थ-वेस्ट सीट दिल्ली की सबसे बड़ी लोकसभा सीट है. सभी पार्टियां ये सीट जीतकर दिल्ली के दलित वोटरों पर अपनी पहुंच प्रदर्शित करना चाहती हैं. बीते पांच सालों में दलितों पर हुए अत्याचार की घटनाओं, एससी/एसटी एक्ट, 13 पॉइंट रोस्टर जैसे मुद्दों के चलते यह लोकसभा सीट काफी चर्चा में रही है.

बीजेपी का झंडा

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ये सीट 2008 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी. 2009 में यहां पहला लोकसभा चुनाव हुआ और कांग्रेस की कृष्णा तीरथ ने 56.8% वोट हासिल कर बीजेपी की मीरा कांवरिया को एक लाख 80 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था.

साल 2014 में आप की एंट्री ने कांग्रेस को सिरे से खत्म कर दिया. भले ही बीजेपी के उदित राज ने 46.4% वोटों के साथ जीत दर्ज की हो और आप की राखी बिड्लान को एक लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से हराया हो लेकिन राखी को भी 38.5% वोट मिले थे. कांग्रेस के लिए ये चुनाव बुरे सपने जैसे था और कृष्णा तीरथ को सिर्फ 11.6% वोट हासिल हुए थे. इस संसदीय क्षेत्र में दिल्ली के विशाल आवासीय और वाणिज्यिक क्षेत्र शामिल हैं, जैसे- सरस्वती विहार, रोहिणी, नरेला, मॉडल टाउन और मंगोलपुरी.

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