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Analysis: एक मास्टर स्ट्रोक से सबको ठिकाने लगा गए शरद पवार

Afsar Ahmad | News18Hindi
Updated: November 26, 2019, 5:48 PM IST
Analysis: एक मास्टर स्ट्रोक से सबको ठिकाने लगा गए शरद पवार
महाराष्ट्र में चले सियासी घटनाक्रम में शरद पवार ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उनके कंधे अभी झुके नहीं है (Demo Pic)

अजित पवार (Ajit Pawar) को दादा जरूर कहा जाता है लेकिन सियासत में 'दादा' शरद (Sharad Pawar) ही हैं, कांग्रेस को भी बड़ी ही आसानी से छोटे भाई की भूमिका में ला दिया.

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  • Last Updated: November 26, 2019, 5:48 PM IST
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नई दिल्ली. देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) के सीएम पद से इस्तीफे के ऐलान के बाद महाराष्ट्र के राजनीतिक क्षितिज पर छाई अनिश्चितता की धुंध छट चुकी है लेकिन जरा रुकिए और गौर करिए कि ये किसकी जीत और किसकी हार है. आप पाएंगे कि महाराष्ट्र (Maharashtra) की राजनीति में बीते कुछ दिनों में सिर्फ एक ही नाम बार-बार लोगों की जुबान पर आया, वो है शरद पवार.

शरद पवार जब बीते हफ्ते 20 तारीख को पीएम से मिलने गए तो एक वर्ग ने ये भी कहा कि पवार कुछ और करने के मूड में हैं लेकिन वो कुछ और हुआ नहीं और जो हुआ उसने ये साफ कर दिया कि यूं ही पवार को लोग मराठा क्षत्रप नहीं कहते. शरद पवार ने बीते एक हफ्ते में जबरदस्त मास्टर स्ट्रोक खेलते हुए तकरीब हर सवाल के जवाब को तय कर दिया है. पवार के एक वार ने बीजेपी को बैकफुट पर ला दिया. परिवार में सर उठाते विद्रोह को दबा दिया, कांग्रेस को अहसास कराया कि नए महाराष्ट्र का बड़ा भाई एनसीपी है और उद्धव की शिवसेना को राजनीतिक चतुराई से निरुत्तर करते हुए लंबे समय के लिए खामोश कर दिया.

ये शरद पवार ही थे, जिन्होंने 23 की सुबह अचानक हुए सत्ता परिवर्तन को साफ तौर पर स्वीकारने से इनकार कर दिया. एक वक्त ऐसा लगा कि भतीजे ने चचा को पटखनी दे ही दी है लेकिन शाम होते-होते शरद पवार ने एहसास कराया कि अभी उनके कंधे झुके नहीं हैं, राजनीति के 'दादा' अभी वो ही हैं. अचानक बदले घटनाक्रम ने कांग्रेस और शिवसेना दोनों को ही चौंकाया.

सिंघवी ने शरद पवार की मंशा पर उठाए थे सवाल

अभिषेक मनु सिंघवी ने शरद पवार की मंशा पर ही सवाल उठाते हुए ट्वीट कर डाला कि पवार तुस्सी ग्रेट हो- साफ था ये प्यार नहीं कांग्रेसियों का आशंका से भरा तंज था, उधर शिवसेना की भृकुटी तन गईं. संजय राउत ने 23 की सुबह ताना मारा कि अजित का रवैया बीती रात की मीटिंग में भी ठीक नहीं था. एक डर उन्हें शरद पवार को लेकर भी दिखा.

पर शरद पवार जानते थे कि उन्हें क्या करना है. उन्होंने सीधे उद्धव से बात की. ट्वीट किया और भतीजे की ताजपोशी से खुद को अलग कर लिया. शाम को उद्धव के साथ साझा पीसी करके उन्होंने शिवसेना और कांग्रेस दोनों का भरोसा हासिल कर लिया.

शरद पवार ने हार न मानते हुए सारे विधायकों को एकजुट करना शुरू कियाअभी उनके सामने चुनौती थी कि वो कैसे अपना घर यानी एनसीपी को ठीक रखें क्योंकि भतीजे के बाहर जाने का मतलब था कि उसके साथ कुछ विधायक भी गए हैं. शरद पवार ने हार न मानते हुए सारे विधायकों को एकजुट करना शुरू किया. वहीं रूठे भतीजे को मनाने की पुरजोर कोशिशें शुरू कर दीं. गौर कीजिए अजित के ऊपर किसी भी एनसीपी नेता ने तीखी टिप्पणी नहीं की. शरद जानते थे कि निदान तभी होगा जब अजित वापस होंगे. आज सुबह आखिरकार चचा भतीजे की गुप्त मुलाकात हुई और सुप्रिया ने सुलह की जो कोशिशें की थीं, वो परवान चढ़ने लगीं. दोपहर होते-होते साफ हो गया कि पवार ने राजनीतिक बिसात पर फिर से कब्जा हासिल कर लिया.

महाराष्ट्र में शरद पवार को हल्के में लेना अक्लमंदी नहीं
अगर हम इसे ठीक से समझें तो लंबे समय बाद बीजेपी के स्ट्रेटजिस्टों को किसी ने शतरंज की चाल में मात दी है, वो भी जोरदार. पवार इस तरह बीजेपी को यह संदेश देने में कामयाब रहे कि महाराष्ट्र में उन्हें हल्के में लेना अक्लमंदी नहीं होगा. दूसरी ओर शिवसेना जो हमेशा हर मुद्दे पर एनसीपी और कांग्रेस पर हमलावर रही है, नए हालात ने उसकी आक्रामकता को सीमित करके रख दिया है. अब सरकार तो बन रही है लेकिन शिवसेना को कॉमन मिनिमम प्रोग्राम के तहत कई बातों को मानना पड़ेगा. साथ ही पवार का उद्धव के सीएम पद पर सहमत होना, एक तरह से एनसीपी की शिवसेना पर मनोवैज्ञानिक जीत तो है ही.

वहीं कांग्रेस जो अब तक महाराष्ट्र में बड़े भाई की भूमिका में थी वो न सिर्फ नंबरों में पीछे हुई है बल्कि प्रभावी राजनीति में भी उसे एनसीपी का हाथ पकड़कर चलना होगा. शरद पवार की यह बड़ी जीत है. इस तरह शरद पवार ने बीते एक हफ्ते में एक साथ कई मामलों को लंबे वक्त तक के लिए सैटल कर दिया.

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First published: November 26, 2019, 4:52 PM IST
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