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लाफ्टर योगा से पूरी दुनिया को खुश और सेहतमंद रखा जाता है- डॉ हरीश रावत

Bikram Singh | News18India
Updated: September 19, 2019, 12:03 AM IST
लाफ्टर योगा से पूरी दुनिया को खुश और सेहतमंद रखा जाता है- डॉ हरीश रावत
Laughter Yoga

डॉ हरीश रावत ने एक अनोखा कीर्तिमान हासिल किया है. उन्होंने लांगेस्ट लॉफ्टर योगा मैराथन में 36 घंटे 3 मिनट तक लगातार हंसने का रिकॉर्ड बनाया है.

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  • Last Updated: September 19, 2019, 12:03 AM IST
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आज लोगों ने हंसना बंद कर दिया है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाजेशन ने भी माना कि दुनिया में रहने वाली आधी से ज़्यादा आबादी डिप्रेशन से जूझ रही है. लोग बीमार और परेशान होकर डॉक्टर के पास जा रहे हैं. ऐसे में डॉ हरीश रावत जैसी शख्सियत आज भी इस देश में मौजूद हैं, जो हंसी और योग की जुगलबंदी से हिंदुस्तान को तनाव मुक्त बनाने में जी जान से जुटे हुए हैं.

योगा गुरु डॉ हरीश रावत का कहना है कि "लाफ्टर योगा से पूरी दुनिया को खुश और सेहतमंद रखा जा सकता है. हंसी और मुस्कान से दुनिया का दिल जीता जा सकता है."

आप सोच रहे होंगे कि ये लाफ्टर योगा गुरु डॉ हरीश रावत आख़िर है कौन? तो मैं बता दूं कि डॉ हरीश रावत योग गुरु से ज़्यादा एक बेहतरीन इंसान हैं. इन्होंने एक अनोखा कीर्तिमान हासिल किया है.

लॉन्गेस्ट लॉफ्टर योगा मैराथन में 36 घंटे 3 मिनट तक लगातार हंसने का विश्व रिकॉर्ड बनाया है. गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में इनका नाम दर्ज़ है. डॉ हरीश रावत ने लांगेस्ट लॉफ्टर योग मैराथन में 30 जून सुबह 9.35 मिनट से 1 जुलाई शाम 9.37 तक यानि 36 घंटे लगातार बिना रुके हंसने का अद्वितीय कारनामा कर वर्ल्ड रिकार्ड बनाया है. इससे पहले ये रिकार्ड दो इटालियन भाइयों के नाम था, जिन्होंने 24 घंटे 13 मिनट तक लगातार हंसने का रिकार्ड कायम किया था. यह मुकाम उन्हें उनकी सोच ने दिलाया. उनका मानना है कि नकारात्मकता को केवल हंस कर ही दूर किया जा सकता है.

Laughter Yoga
Laughter Yoga Dr. Harish Rawat

डॉ हरीश रावत कहते हैं कि अच्छे समय में हर कोई हंस सकता है, लेकिन आज की मॉर्डन लाइफ स्टाइल में कई चुनौतियों से घिरा कि इंसान के पास हंसने तक का समय नहीं है.

क्यों हंसाते हैं डॉ हरीश रावत?
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डॉ हरीश रावत एक कंपनी में काम करते हैं. वहां पर एक साथी को डिप्रेशन में जाते देखा. वह ऑफिस का प्रेशर नहीं झेल पाया और आत्म हत्या कर ली. इस घटना के बाद इन्होंने लोगों की ज़िंदगी से प्रेशर हटाने की ठानी. ऑफिस, स्कूल, कॉलेज और स्लम में जाकर लोगों को हंसाते हैं और उनकी ज़िंदगी बेहतरीन बनाते हैं.
दो मिनट से ज्यादा आजकल किसी के चेहरे पर मुस्कान आ जाए, तो बहुत बड़ी बात होती है. वैसे भी आज इंसान की हालत मशीन जैसी हो गई है, जो हर दिन अपनी हसरतों के पीछे भागता है और हर रात अपनी कोशिशों के नाकाम होने का मलाल करता है. ऐसे में अगर उसे तनाव हो जाए तो डॉ हरीश जैसे लोग ही उपाय के रूप में सामने उभरकर आते हैं.

भौतिक युग में हंसना तो दूर हम जीना भूल गए हैं. वाकई में आज डॉ हरीश रावत जैसे इंसान की जरूरत है.  अपनी मेहनत और लगन से हिन्दुस्तान को बदल रहे हैं.

 

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First published: September 19, 2019, 12:03 AM IST
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