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एक पद, एक ही काम लेकिन कहीं वेतन 1 हजार तो कहीं 19 हजार

नासिर हुसैन | News18Hindi
Updated: November 22, 2019, 10:15 AM IST
एक पद, एक ही काम लेकिन कहीं वेतन 1 हजार तो कहीं 19 हजार
एमएचआरडी की ओर से जारी एक रिपोर्ट की मानें तो देशभर के स्कूलों में 24.25 लाख रसोईए काम कर रहे हैं.(Demo Pic)

मिड डे मील बनाने वाले रसोइयों को कहीं पर मानदेय के तौर पर एक हजार रुपये मिल रहे हैं तो कहीं पर 19 हजार रुपये.

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  • Last Updated: November 22, 2019, 10:15 AM IST
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नई दिल्ली. देश के सरकारी स्कूलों (Government School) में पढ़ने वाले करोड़ों बच्चे हर रोज गर्मा-गरम मिड-डे-मील (MDM) खाते हैं. स्कूलों में एमडीएम बनाने के लिए लाखों की संख्या में रसोईए (Cook) रखे गए हैं. हर महीने उन्हें मानदेय (मेहनताना) भी दिया जाता है. लेकिन हैरत की बात ये है कि एक पद और एक जैसा काम होने के बावजूद देश में रसोइयों को कहीं एक हजार रुपये महीना मिल रहा है तो कहीं 10 और 19 हजार रुपये. देश की राजधानी दिल्ली (Delhi) में एक हजार रुपये दिया जा रहा है तो पड़ोसी राज्य हरियाणा (Haryana) में 3500 रुपये मानदेय दिया जा रहा है.

यहां मिल रहा है 19 हजार रुपये मानदेय
मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) देशभर में एमडीएम के लिए बजट जारी करता है. उसी बजट से गेहूं-चावल, तेल, मसाले, गैस सिलेंडर खरीदे जाते हैं. रसोइयों को भी मानदेय दिया जाता है. बजट में कुछ हिस्सा राज्य सरकार का भी होता है. बावजूद इसके 36 राज्यों में रसोइयों को अलग-अलग मानदेय दिया जा रहा है. यूपी और दिल्ली में एक हजार रुपये मानदेय दिया जा रहा है तो तमिलनाडु में 10083, केरल में 9 हजार, लक्ष्यदीप में 9500 और पुद्दूचेरी में 19 हजार रुपये मानदेय दिया जा रहा है.

किस राज्य में कितने हैं रसोईए

एमएचआरडी की ओर से जारी एक रिपोर्ट की मानें तो देशभर के स्कूलों में 24.25 लाख रसोईए काम कर रहे हैं. अगर राज्यों की संख्या पर निगाह डालें तो यूपी में 3.93 लाख, बिहार 2.38 लाख, मध्य प्रदेश 2.15 लाख, पश्चिम बंगाल 2.38 लाख, असम 1.18 लाख, कर्नाटक 1.17 लाख, ओडिशा 1.15 लाख, राजस्थान 1 लाख, तमिलनाडु में 1.28 लाख रसोईए हैं.

ये मिड डे मील का रोजाना का खर्च है.


मिड-डे-मील एक नजर में
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-एमडीएम खाने वाले कुल पंजीकृत छात्र   13.10 करोड़.

-हर रोज एमडीएम खाने वाले छात्र           9.65 करोड़.

-कक्षा 1 से 5 के प्रति छात्र रोजाना का खर्च

100 ग्राम गेहूं/चावल

4.13 रुपये गेहूं-चावल बनाने के लिए

ये मिड डे मील का सालाना बजट का हिसाब है.


कक्षा 6 से 8 के प्रति छात्र

150 ग्राम गेहूं/चावल रोजाना

6.18 रुपये गेहूं-चावल बनाने के लिए

-2.41 करोड़ का गेहूं/चावल रोज बनता है.

-48.25 करोड़ रुपये का तड़का लगता है.

देशभर में दिए जाने वाले मानदेय में ये है अंतर.


-एमडीएम वर्ष 2016-17 का बजट- 9478 करोड़.

- एमडीएम के लिए सरकार देती है 2 रुपये किलो गेहूं, 3 रुपये किलो चावल.

- स्कूलों में 8172 करोड़ की लागत से बने है रसोइघर.

स्त्रोत: मानव संसाधन विकास मंत्रालय और मिड-डे मील प्रधिकरण.

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First published: November 22, 2019, 8:37 AM IST
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