OPINION: भ्रष्टाचार पर मोदी सरकार का कड़ा हमला

Anil Rai | News18Hindi
Updated: August 22, 2019, 12:32 PM IST
OPINION: भ्रष्टाचार पर मोदी सरकार का कड़ा हमला
मोदी सरकार का भ्रष्‍टाचार पर कड़ा हमला.

बीजेपी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जो वादा किया वो जरुर पूरा होगा. सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री का दावा है कि अभी तो ये शुरुआत है आगे और दिग्गज सलाखों के पीछे होंगे.

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भ्रष्टाचार के मामले में जिस तरह सीबीआई और ईडी ताबड़तोड़ कारर्वाइयां कर रहे हैं ऐसे पहले कभी देखने को नहीं मिला था. चाहें आम आदमी हो या खास इन जांच एजेंसियों की नजर सब पर है. ताजा मामला कांग्रेस के दिग्गज नेता और देश के पूर्व गृह और वित्त मंत्री पी चिदबंरम और एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे का है. दोनों के खिलाफ जिस तरह का कड़ा रुख अख्तियार किया गया है, भ्रष्टाचार के मामले में वैसा पहले कभी नही दिखा. आम तौर पर दिग्गज राजनेताओं का नाम आने के बाद जांच एजेसियों की रफ्तार धीमी हो जाती थी.

मोदी सरकार में देरी हो सकती है लेकिन भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई होगी जरुर
भारतीय जनता पार्टी 2014 के चुनावों में पहली बार जब पूर्ण बहुमत की सरकार में आई तो उसका चुनावी मुद्दा यूपीए सरकार का भ्रष्टाचार ही थी. ऐसे में 2019 के चुनावों में प्रधानमंत्री मोदी लगातार भ्रष्टाचार के आरोपियों को जेल भेजने की बात कहते नजर आते थे. साफ था बीजेपी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जो वादा किया वो जरुर पूरा होगा. सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री का दावा है कि अभी तो ये शुरुआत है आगे और दिग्गज सलाखों के पीछे होंगे. कानूनी अड़चनों के कारण पिछले पांच साल कार्रवाई की रफ्तार थोड़ी धीमी जरूर पड़ी थी लेकिन अब वो और तेज होगी.

जांच एजेसिंयों ने दिखाया देश में आम जनता और वीआईपी में अंतर नहीं

जिस तरह सीबीआई और ईडी ने हाईकोर्ट से अरेस्ट स्टे खत्म होने के तुरंत बाद कांग्रेस के इस दिग्गज नेता के खिलाफ आनन-फानन में कड़ी कार्रवाई की. उससे साफ हो गया कि इन एजेंसियों के लिए देश के आम आदमी और वीआईपी में कोई खास अंतर नहीं है. इसके पहले की सरकारों में जब भी भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की बात आती थी तो आम आदमी की गिरफ्तारी तो आनन-फानन में हो जाती थी लेकिन वीआईपी के मामले में जांच एजेंसियों के अधिकारी सीधी कार्रवाई करने से बचते नजर आते थे.

एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे से ईडी पूछताछ कर रही है.
एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे से ईडी पूछताछ कर रही है.


मोदी सरकार के कड़े रुख से जनता में बढ़ेगा भरोसा
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वरिष्ठ पत्रकार अंबिकानंद सहाय का मानना है कि जनता में धीरे-धीरे ये भ्रम पैदा हो गया है कि देश के बड़े राजनेता आपस में मिले हुए हैं और एक दूसरे के खिलाफ कार्रवाई नही करते. भ्रष्टाचार केवल चुनावी मुद्दा है क्योंकि 1977 में इंदिरा गांधी सरकार के भ्रष्टाचार और इमरजेंसी के खिलाफ चुनाव जीतकर सरकार में आई जनता पार्टी की सरकार ने इंदिरा गांधी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की. इसके बाद जनता पार्टी का क्या हश्र हुआ सबने देखा.

कुछ यही हाल विश्वनाथ प्रताप सिंह और उनकी पार्टी जनता दल का हुआ. 1989 के चुनावों में राजीव गांधी के खिलाफ वोफोर्स का मुद्दा बनाकर चुनाव जीतने वाले विश्वनाथ प्रताप सिंह ऐसी कोई कार्रवाई नहीं कर पाए जिससे जनता में ये विश्वास दिला पाएं कि राजीव गांधी की सरकार में भ्रष्टाचार हुआ और उनकी सरकार उस पर कार्रवाई कर रही है. उसके बाद जनता दल का भी वही हाल हुआ जो जनता पार्टी का हुआ था.

अरविंद केजरीवाल भी भ्रष्‍टाचार को मुद्दा बनाकर ही सत्‍ता में आए थे.
अरविंद केजरीवाल भी भ्रष्‍टाचार को मुद्दा बनाकर ही सत्‍ता में आए थे.


2012 के उत्तर प्रदेश के चुनावों में मायावती के भ्रष्टाचार के खिलाफ चुनाव जीतकर आने वाली समाजवादी पार्टी का हाल भी कुछ यही हुआ. पूर्ण बहुमत से पहली बार सरकार बनाने वाली समाजवादी पार्टी 2017 के चुनावों में तीन अंको में भी नहीं पहुंच पाई. केजरीवाल-शीला दीक्षित समेत तमाम ऐसे उदाहरण हैं जो भ्रष्टाचार के मुद्दे पर चुनाव जीतकर तो आए लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं कर पाए. सहाय मानने हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भ्रष्टाचार के खिलाफ इस अभियान से जनता में ये विश्वास जाएगा कि पार्टियां जिस मुद्दे पर चुनाव लड़ती हैं. उस पर कार्रवाई करती हैं. साथ ही देश का कानून सबके लिए एक है चाहें वह दिग्गज नेता हों या आम आदमी.

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First published: August 22, 2019, 12:14 PM IST
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