केन्द्रीय जांच एजेंसियों के रडार पर आया ये NGO, दिल्ली में बढ़ा रहा सक्रियता

जांच एजेंसियों के सूत्रों की अगर मानें तो इस एनजीओ का संबंध देश में प्रतिबंधिंत संगठन पीएफआई यानी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया से जुड़े कुछ संगठन से है, जिसके बाद ये जांच एजेंसियों के रडार पर आ गया है.

shankar Anand | News18 Uttar Pradesh
Updated: July 11, 2019, 2:26 PM IST
केन्द्रीय जांच एजेंसियों के रडार पर आया ये NGO, दिल्ली में बढ़ा रहा सक्रियता
एनजीओ की जांच को लेकर गृहमंत्रालय रिपोर्ट भेजी गई है.
shankar Anand
shankar Anand | News18 Uttar Pradesh
Updated: July 11, 2019, 2:26 PM IST
राजधानी दिल्ली में जांच एजेंसियों और केन्द्रीय खुफिया एजेंसियों के रडार पर एक बड़े स्तर का एनजीओ आ गया है. जिसकी कई गतिविधियां संदिग्ध मानी जा रही हैं. इस मामले की रिपोर्ट हाल में ही केन्द्रीय गृह मंत्रालय (MHA) को भी दी गई है. इस एनजीओ का नाम है NCHRO यानी नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ ह्यूमन राइट संगठन. जांच एजेंसियों के सूत्रों की अगर मानें तो इस एनजीओ का संबंध देश में प्रतिबंधिंत संगठन पीएफआई यानी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया से जुड़े कुछ संगठन से है, जिसके बाद ये जांच एजेंसियों के रडार पर आ गया है.

पॉप्युलर फ्रंट ऑफ इंडिया देश में काफी विवादास्पद गतिविधियों के लिए जाना जा रहा है. लिहाजा इस मामले में पिछले साल भी गृह मंत्रालय में काफी महत्वपूर्ण बैठक हुई थी, जिसमें इस संगठन से जुड़ी कई रिपोर्ट पर चर्चा हुई थी. उसके बाद ही उसको देश में प्रतिबंधित सूची में डालने की भी चर्चा हुई थी. लेकिन अब ये संगठन फिर से चर्चा में आ गया है. पता चला है कि ये देश के अंदर कई छोटे-बड़े संगठनों के साथ जुड़कर कई संदिग्ध गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश में जुटा हुआ है.

जांच एजेंसियों के सूत्रों की मानें तो केन्द्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी और एनआईए की टीम भी इस नए मामले की जांच के बाद मामला दर्ज कर सकती है. पॉप्युलर फ्रंट ऑफ इंडिया संगठन पर कट्टरपंथी मुस्लिम संगठन होने का आरोप है. इसके साथ ही इस संगठन के कई लोगों पर आतंकी गतिविधियो में शामिल होने, जबरन धर्म परिवर्तन कराने का भी आरोप है. जो देश के अंदर केरल, तमिलनाडु, झारखंड, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल में काफी सक्रिय है. हालांकि ये संगठन अपने आप को गैर सरकारी संगठन बताता है और जांच एजेंसी एनआईए और ईडी के आरोपों को हमेशा गलत और बेबुनियाद बताता है. संगठन के मुताबिक वो किसी भी संदिग्ध गतिविधियों में शामिल नहीं है.

एनजीओ क्यों आया चर्चा में?

हाल में ही राजधानी दिल्ली के अंदर 6 जुलाई को एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था. जिसमें सजायाफ्ता पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट की पत्नी श्वेता भट्ट ने संजीव भट्ट की रिहाई और उनके समर्थन में कार्यक्रम में शामिल हुई थी. कार्यक्रम के दौरान संजीव भट्ट की पत्नी ने ये भी आरोप लगाया कि उनके पति राजनीतिक प्रतिशोध के शिकार बने हैं और उनकी जान को फिलहाल जेल के अंदर खतरा है.

अगर संजीव भट्ट पर लगे आरोपों की अगर बात करें तो उनको 1990 में हिरासत में लिए गए एक शख्स की बाद में हुई मौत के बाद उनको उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. लिहाजा इसी मामले को ध्यान में रखकर ही ये कार्यक्रम दिल्ली में 6 जुलाई को कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में आयोजित किया गया था. जांच एजेंसियों की अगर मानें तो इस कार्यक्रम को आयोजित करवाने में एनसीएचआरओ नाम की एनजीओ ने श्वेता भट्ट को मदद की थी. इस कार्यक्रम में कई संदिग्ध लोगों ने शिरकत की थी.

प्रतिबंधित संगठन पीएफआई से संबंध पर उठ रहे सवाल
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एनसीएचआरओ एनजीओ की अगर बात करें तो इसी एनजीओ का काफी करीबी संबंध पीएफआई जैसे प्रतिबंधित संगठन से है, लिहाजा अब कई सवाल उठ रहे हैं. वैसे अब ये भी तफ्तीश का मसला बनता जा रहा है कि क्या उस कार्यक्रम को आयोजित करवाने से पहले इस बात की जानकारी उन आयोजकर्ताओं को थी या नहीं? इसके साथ ही सवाल ये भी उठ रहा है कि एनसीएचआरओ नाम की इस एनजीओ को आखिर इस मामले में मंशा क्या है? वो क्यों इस मामले में मदद करने के लिए उस कार्यक्रम को सपोर्ट कर रही थी. मामला यहां संजीव भट्ट का नहीं है बल्कि उस विवादास्पद और संदिग्ध गतिविधियों वाली एनजीओ का है. ऐसे कई सवाल हैं, जिसका जवाब जांच एजेंसियां और खुफिया एजेंसियां तलाश कर रही हैं. जल्द ही इस मामले में जांच एजेंसियों द्वारा औपचारिक तौर पर उस विवादास्पद एनजीओ के खिलाफ मामला दर्ज किया जा सकता है.

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First published: July 11, 2019, 2:25 PM IST
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