छपरा गैंगरेप पर निर्भया की मां बोलीं, 2012 की चीजें फिर दोहराई जा रहीं

निर्भया (Nirbhaya) की मां कहती हैं कि ऐसा लगता है जैसे इस देश में सिर्फ मुजरिमों (accused) को ही अधिकार हैं, पीड़‍ितों को न्‍याय (Justice) पाने का कोई अधिकार ही नहीं है. 2012 में दिल्‍ली की निर्भया के दोषियों (delhi nirbhaya culprits) को ही अभी तक फांसी के फंदे पर नहीं लटकाया गया है.

News18Hindi
Updated: August 11, 2019, 11:18 AM IST
छपरा गैंगरेप पर निर्भया की मां बोलीं, 2012 की चीजें फिर दोहराई जा रहीं
छपरा गैंगरेप पर बोलीं निर्भया की मां, 2012 दोहराया जा रहा.
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Updated: August 11, 2019, 11:18 AM IST
बिहार के छपरा (Chhapra gangrape) में छात्रा के साथ हुई हैवानियत पर निर्भया (Nirbhaya) की मां ने दुख व्‍यक्‍त किया. देशभर में हो रही घटनाओं पर निर्भया की मां (Nirbhaya mother) ने कहा कि अब फिर से 2012 की चीजें दोहराई जा रही हैं. ऐसी ही घटनाएं आए दिन सुनने को मिल रही हैं. देश और दुनिया के तमाम काम हो रहे हैं लेकिन महिलाओं की सुरक्षा (Women Safety) पर अभी भी कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है. कभी दिल्‍ली, कभी बलिया तो कभी छपरा की बेटी भेंट चढ़ रही हैं.

News18hindi से बातचीत में निर्भया की मां कहती हैं कि 2012 में निर्भया के साथ हुई दरिंदगी के बाद ऐसा लगता है जैसे उस घटना से मुजरिमों ने संदेश ले लिया. मुजरिमों (Accused) ने सीख लिया कि कैसे महिलाओं को निशाना बनाना है और उन्‍हें मारना है लेकिन प्रशासन, सरकार और व्‍यवस्‍था (Government and system) ने कोई सबक नहीं लिया. बहुत दबाव पड़ने पर बस अपराधियों को जेल में डाल दिया जाता है. उसके बाद सजा के बीच में उनके मानवाधिकार (Human Rights) आड़े आ जाते हैं.

ऐसा लगता है जैसे इस देश में सिर्फ मुजरिमों को ही अधिकार हैं, पीड़‍ितों को कोई न्‍याय पाने का कोई अधिकार ही नहीं है. 2012 में दिल्‍ली की निर्भया के दोषियों को ही अभी तक फांसी के फंदे पर नहीं लटकाया गया है. ऐसे में दरिंदों के हौसले क्‍यों न बुलंद हों? ये घटनाएं आखिर कैसे रुकें?

2012 से अभी तक कितने कानून बने लेकिन क्‍या किसी भी घटना के दोषी (Culprit) को फांसी के फंदे पर लटकाया गया? सरकार दुनिया की चीजें ठीक कर रही है लेकिन कुछ महिलाओं के लिए भी कर दे. जब तक दोषियों को तय समय में दंड (Punishment) नहीं दिया जाएगा, इनमें भय नहीं होगा. देश की बेटियां इसी तरह कुर्बान होती रहेंगी.

निर्भया की मां कहती हैं कि निर्भया के केस को लड़ते-लड़ते आज सात साल हो गए लेकिन अब कोई पूछने नहीं आ रहा कि न्‍याय (justice) मिला या नहीं. आज भी वे न्‍याय के लिए भटक रही हैं.

उन्‍नाव में बैठे रहे घंटों लेकिन बिना मिले लौटा दिया
वे कहती हैं, 'आज हालात यह हैं कि मुजरिम को संरक्षण देने के लिए पूरी कायनात खड़ी हो जाती है. उन्‍नाव के मामले को ही देख लें. मैं उन्‍नाव की रेप पीड़‍िता (Unnao rape survivor) से मिलने के लिए उन्‍नाव गई. वहां हमें घंटों बिठाए रखा गया और तमाम तरह के सवाल पूछे गए. हमने कहा कि पीड़ि‍ता की हालत नाजुक है तो न मिलाएं लेकिन परिवार से ही मिलने दें. लेकिन किसी से भी मिलवाए बगैर वहां से हमें वापस भेज दिया गया.'
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अगर पीड़‍ितों से लोग जुड़ेंगे और मिलेंगे नहीं तो उनके लिए आवाज कैसे उठाएंगे. जिन महिलाओं की कोई पहुंच नहीं है आज वे न्‍याय के लिए भटक रही हैं. किसी भी जगह की बेटी के साथ ऐसा होता है तो तकलीफ होती है. ऐसी दरिंदगी किसी भी बेटी के साथ न हो.

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First published: August 11, 2019, 10:54 AM IST
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