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निर्भया मामला: सबसे कम उम्र का दोषी सबसे ज्यादा परेशान, जेल अधिकारी रोजाना कर रहे बातचीत

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Updated: January 15, 2020, 9:00 PM IST
निर्भया मामला: सबसे कम उम्र का दोषी सबसे ज्यादा परेशान, जेल अधिकारी रोजाना कर रहे बातचीत
निर्भया गैगरेप और मर्डर केस में दोषियों को फांसी देने की कोर्ट ने तारीख तय कर दी है (Demo Pic)

दिल्ली की निर्भया (nirbhaya) को इंसाफ मिलने वाला है. पीड़िता के चारों गुनहगारों को जल्द ही फांसी दिया जाना सुनिश्चित हुआ है. जहां बचाव पक्ष दोषियों की सजा टालने की कोशिश में लगा है तो वहीं फांसी की तैयारी में तिहाड़ जेल प्रशासन जुटा है.

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नई दिल्ली. निर्भया गैंगरेप और हत्या (Nirbhaya Gangrape Case) के मामले में फांसी की सजा पाए चार दोषियों में सबसे कम उम्र के विनय शर्मा (Vinay Sharma) को तिहाड़ जेल में अपनी कोठरी में सबसे ज्यादा परेशान हाल में टहलते हुए देखा जा रहा है. चारों दोषियों को मिली मौत की सजा पर असमंजस की स्थिति बरकरार है. जेल के सूत्रों ने बताया कि 26 वर्षीय कैदी को जेल में नियम तोड़ने के लिए सबसे ज्यादा सजा मिली.

चारों कैदियों- विनय, अक्षय, मुकेश और पवन को 22 जनवरी को फांसी की सजा दी जानी तय हुई थी. बुधवार को दिल्ली सरकार ने हाई कोर्ट को सूचित किया कि निर्धारित दिन फांसी नहीं दी जा सकेगी क्योंकि चार में से एक दोषी मुकेश ने दया याचिका दायर की है.

जेल अधिकारी कैदियों से रोजाना बातचीत करते हैं
इनमें से विनय ने जेल में चित्रकला सीखी और सात साल बंद रहने के दौरान उसे जेल के नियम न मानने के लिए 11 बार सजा मिली. इसी दौरान जेल के नियम तोड़ने के लिए पवन को आठ बार, मुकेश को तीन बार और अक्षय को एक बार सजा मिली. चारों कैदियों को कभी छोटे-मोटे झगड़ों के लिए परिजनों से मिलने के वक्त में कटौती की सजा मिली तो कभी बड़ा झगड़ा और मारपीट करने के लिए उनके बैरक बदल दिए गए. सूत्रों ने बताया कि जेल अधिकारी कैदियों से रोजाना बातचीत करते हैं ताकि उनके मानसिक स्वास्थ्य का पता चलता रहे.

तैयारी में जुटा तिहाड़ जेल प्रशासन 
बता दें, दिल्ली की निर्भया को इंसाफ मिलने वाला है. पीड़िता के चारों गुनहगारों को जल्द ही फांसी दिया जाना सुनिश्चित हुआ है. जहां बचाव पक्ष दोषियों की सजा टालने की कोशिश में लगा है तो वहीं फांसी की तैयारी में तिहाड़ जेल प्रशासन जुटा है. इसी बीच उन्नाव की जिला कारागार में जेल सुधारक प्रदीप रघुनंदन ने तिहाड़ जेल प्रशासन के सामने गरुड़ पुराण सुनाने का प्रस्ताव रखा है.

लिखित आदेश आते ही पहुंचेंगे तिहाड़ जेलगरुड़ पुराण में मृत्यु के मानसिक भय से मुक्ति और आत्मा की सद्गति की आस्था का हवाला देकर जेल सुधारक प्रदीप रघुनंदन ने महानिदेशक तिहाड़ कारागार से इसकी अनुमति मांगी है. प्रदीप रघुनंदन की मानें तो उन्हें आश्वासन तो मिल चुका है, लेकिन अभी तक लिखित आदेश नहीं आया है. लिखित आदेश आते ही वह तिहाड़ जेल पहुंचेंगे.

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First published: January 15, 2020, 8:34 PM IST
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