यदि संरक्षण नहीं किया तो 2030 तक पेयजल हो जाएगा समाप्त: रिपोर्ट

नीति आयोग की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि साल 2030 तक भारत की 40 प्रतिशत आबादी के पास पेयजल की कोई सुविधा नहीं होगी.

News18Hindi
Updated: June 20, 2019, 5:00 AM IST
यदि संरक्षण नहीं किया तो 2030 तक पेयजल हो जाएगा समाप्त: रिपोर्ट
प्रतीकात्मक फोटो
News18Hindi
Updated: June 20, 2019, 5:00 AM IST
नीति आयोग ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि अगर हम जल संरक्षण नहीं करते हैं तो साल 2030 तक पेयजल नहीं बचेगा. दूसरे शब्दों में कहें तो अगर आज बचत शुरू नहीं की तो 2030 तक पीने के पानी की एक-एक बूंद के लिए लोग तरस जाएंगे. साथ ही रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद सहित 21 भारतीय शहर 2020 तक भूजल से बाहर निकल जाएंगे, जिससे लगभग 100 मिलियन लोग प्रभावित होंगे.

40% आबादी को नहीं मिलेगा पीने का पानी 

आयोग की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि साल 2030 तक भारत की 40 प्रतिशत आबादी के पास पेयजल की कोई सुविधा नहीं होगी. ऐसे में यह रिपोर्ट सरकार और आम जनता के लिए चिंता की बात बन गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि चेन्नई में तीन नदियां, चार जल निकाय, पांच आर्द्रभूमि और छह जंगल पूरी तरह से सूख चुके हैं. बता दें कि चेन्नई में किसी भी अन्य मेट्रो शहरों की तुलना में बेहतर जल संसाधन और बारिश होती है, तब वहां का यह हाल है.

2030 तक पेयजल समाप्त हो जाएगा

ध्यान देने वाली बात यह है कि यदि साल 2030 तक पेयजल समाप्त हो जाएगा तो हम अपने बच्चों और आने वाली पीढ़ियों के लिए क्या छोड़ेंगे? क्योंकि प्यास को सिर्फ पानी ही बुझा सकता है. चाहे धनी आदमी हो या फिर गरीब सबकी प्यास पैसों से नहीं बल्कि पानी से ही बुझती है.

पानी की करें बचत 

राष्ट्रीय जल अकादमी के पूर्व निदेशक मनोहर खुशलानी ने कहा है कि यह सरकार और देश के लोगों की सामूहिक जिम्मेदारी है कि वे पानी की बचत करें और भूजल स्तर बढ़ाने में योगदान दें. बता दें कि खुशलानी वर्तमान में इंद्रप्रस्थ इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी दिल्ली में प्रोफेसर हैं. उन्होंने 'इरीगेशन प्रैक्टिस एंड डिजाइंड इन फाइव वाल्यूम' नामक किताब भी लिखी है.
Loading...

वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का करें उपयोग

बताते चलें कि पेजल संचय करना बहुत मुश्किल और महंगा नहीं है. बहुत ही सरल तरीके से वर्षा जल को संचित किया जा सकता है. कोई इसे आसानी से समूह हाउसिंग सोसाइटी या व्यक्तिगत रूप से कर सकता है. इसके लिए हमें जिम्मेदार बनाना होगा. साथ ही वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का उपयोग भी करना होगा. यदि हम आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी छोड़ना चाहते हैं तो उसकी बर्बादी को रोकना होगा.

ये भी पढ़ें- 

AES से बच्चों की मौत: SC में एक और जनहित याचिका दाखिल

चमकी बुखार: केजरीवाल ने की नीतीश सरकार को मदद की पेशकश 

 
First published: June 20, 2019, 4:37 AM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...