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कीमत पर अंकुश तो लग नहीं रहा, प्याज के जेंडर में भी हैं कई परतें

RajKumar Pandey
Updated: December 9, 2019, 12:25 PM IST
कीमत पर अंकुश तो लग नहीं रहा, प्याज के जेंडर में भी हैं कई परतें
प्याज इस कदर कीमती हो गई है (या गया है) कि इसके लूट और चोरी की की घटनाएं भी हो रही है.

कीमतों की तरह परत दर परत उलझी है प्याज की कहानी, क्या इसे पियाज़ लिखना चाहिए या फिर प्याज और इसका प्रयोग पुरुषवाची होना चाहिए या फिर स्त्रीवाची ये सवाल भी हल करना आसान नहीं है.

  • Last Updated: December 9, 2019, 12:25 PM IST
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पियाजी आंसुओं की हर ओर चर्चा है. अब प्याज ही रुला रहा है तो आंसू पियाजी ही होंगे. खबर में है तो न्यूज रूम में चर्चा होगी ही. यहां तक तो ठीक है. दिक्कत तो तब होती है जब कोई प्याज को पुरुषवाची लिखता है और कोई इसका प्रयोग स्त्रीवाची रूप में करता है. यानी प्याज होता है कि प्याज होती है, इसको लेकर कन्फ्यूजन है. इससे भी बड़ी दिक्कत तब आती है जब किसी न्यूज रूम में होता है और होती के सवाल पर दो अलग-अलग पक्ष तैयार हो जाते हैं.राजस्थान और मध्य प्रदेश से आने वाले इसे पुरुषवाची मानते हैं. जबकि उत्तर प्रदेश से आने वाले स्त्रीवाची. इससे निपटने के लिए डिक्शनरी देखने पर मामला और उलझ गया.

पियाज या प्याज
भार्गव साहेब की डिक्शिनरी में तो प्याज शब्द मिला ही नहीं. अलबत्ता पियाजी शब्द जरूर मिला. इसके मायने दिया गया था प्याज के रंग वाला. यानी इस शब्द कोश में प्याज का जिक्र है. बहरहाल बात नहीं बनी. चूंकि ये शब्द संस्कृत से सीधा आया तो नहीं दिख पड़ता, लिहाजा मद्दाह साहेब की डिक्शिनरी में तलाश किया गया. वहां ये मिला तो, लेकिन पियाज के रूप में. उसमें प्याज शब्द नहीं है. हर्श्व ई की मात्रा के साथ पूरा प यानी पियाज लिखा है. फारसी का शब्द है. उनकी डिक्शनरी में स्त्रीवाची प्रयोग के लिए कहा गया है. इस शब्दकोश को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान ने प्रकाशित किया है और इसे प्रामाणिक माना जाता है.

उर्दू की राय

उर्दू जानने वाले साथियों को दिखाने पर उन्होंने बताया कि पे, ये अलिफ़ और ज़े तीनों से पियाज लिखा गया है. हालांकि उर्दू लिखने वाले साथियों ने भी इसे प्याज के तौर पर ही इस्तेमाल किया है. इसके लिए उन्होंने पे और ये के साथ अलिफ को मिला दिया और ज़े लिख दिया. इस तरह से उन्हें प्याज मिल गयी (या मिल गया). कहने की जरूरत नहीं है उर्दू के लोग इसे स्त्रीवाची ही मानते है. यानी प्याज होती है.

शब्दकोष में बताया गया प्याज का अर्थ और उसका उच्चारण.


'शब्दों के सफर' के लेखक की रायसवाल अब भी बचा रहा गया कि प्याज होता है कि प्याज होती है. इस बारे में शब्दों के मूल उत्पत्ति की तलाश करने वाले और 'शब्दों का सफर' नाम से 3 खंड़ों वाले ग्रंथ के लेखक, पत्रकार अजित वडनेरकर से जब बात की गई तो उन्होंने सीधे कहा – ‘राजस्थान और मध्य प्रदेश में तो प्याज होता है.’ उनकी ये भी दलील है कि मद्दाह साहेब की डिक्शनरी में स्त्रीवाची शब्द के तौर पर लिखा होने से जरूरी नहीं है कि हिंदी में भी इसे स्त्रीवाची ही प्रयोग किया जाए.

एक हद तक अजित जी की दलील सही भी है. फारसी और अरबी के बहुत से शब्दों को हम हिंदी में लेते हैं और बोलने लिखने में उनका लिंग परिवर्तन कर देते हैं. जैसे कलम. कलम का प्रयोग अपने मूल रूप में पुरुषवाची होता है. पहले के तमाम शेरों में इसी रूप में कलम का जिक्र आता है. सब्जा उगता है. सब्जी उगती है.

लोकभाषाओं में पियाजु
इस लिहाज से कहा जा सकता है कि पियाज को हिंदी में लाया गया होगा, तो कंद होने के कारण इसे पुलिंग यानी पुरुषवाची प्रयोग में ला दिया गया होगा. लेकिन ये भी ध्यान देने वाली बात है कि भोजपुरी और अवधी जैसी लोकभाषाओं में पियाज को पियाजु तक कहा जाता रहा है. पुराने लोग पियाजु खाने और न खाने की बात करते रहे हैं. साथ ही स्त्रीवाची क्रिया के साथ इसका प्रयोग करते रहे हैं. हो सकता है वे प्याज को सब्जी के तौर पर देखते हो और उसे स्त्रीवाची रूप में प्रयोग करते हो.

कंद से रिश्ता
ये भी ध्यान देने वाली बात है कि महाराष्ट्र और गुजरात में इसे कांदा कहा जाता है. जाहिर है कांदा शब्द कंद से ही बना होगा. इसका प्रयोग वहां पुरुषवाची रूप में किया जाता है. दुनिया भर की भाषाओं के शब्दों के बीच रिश्ते तलाश कर उन्हें स्थापित करने वाले पत्रकार वडनेरकर संकेत करते हैं कि अभी संस्कृत के किसी शब्द से प्याज की ऐसी रिश्तेदारी नहीं मिली है जिससे कहा जा सके इस शब्द से प्याज बना है. उनके मुताबिक पलाण्डु शब्द कहीं कहीं आता है. अब भाषा विज्ञान के नियमों से देखने से ये शब्द प्याज या फिर पियाज के रूप में सामने आए ऐसा नहीं कहा जा सकता.

परत दर परत उलझन
बहरहाल इसमें कोई दो राय नहीं है कि ये कंद ,होता हो या होती हो मूल स्वरूप में होता तो परतों में ही है. परत दर परत उधेड़े जाने की जरूरत है. न्यूज रूम अपने हिसाब से स्टाइलशीट बना कर भले ही तय कर ले कि प्याज होता है या होती है, लेकिन जो इसे जिस रूप में मानता है उसी रूप में मानता रहेगा. इसका प्रमाण ये है कि गूगल बाबा भी इसे दोनों रूपों में दिखाते हैं.

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First published: December 4, 2019, 1:22 PM IST
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