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अब GPS लगाने के बाद भी महफ़ूज़ नहीं आपकी कार!

नासिर हुसैन
Updated: December 8, 2017, 4:07 PM IST
अब GPS लगाने के बाद भी महफ़ूज़ नहीं आपकी कार!
फाइल फोटो.
नासिर हुसैन
Updated: December 8, 2017, 4:07 PM IST
आपके पास एक सुंदर सी कार है. कार की सुरक्षा के लिए आपने उसमे जीपीएस डिवाइस लगवाई हुई है. डिवाइस लगवाने के बाद अब आप कार की चोरी से बेफिक्र हो गए हैं. अगर आप भी ऐसा सोचते हैं तो ये आपकी गलतफहमी है. अब आपकी कार में लगा जीपीएस काम नहीं करेगा.

जीपीएस को निष्क्रिय बनाने के लिए दिल्ली के बाजारों में जीपीएस जैमिंग सिस्टम आ गया है. कानून के हिसाब से तो जैमिंग सिस्टम बेचना और खरीदना दोनों ही गैरकानूनी है. लेकिन लेकिन दिल्ली के नेहरु प्लेस, गफ्फार मार्केट और शादीपुर में ये खुलेआम बिक रहा है.

सूत्रों की मानें तो शादीपुर को इसका गढ़ बताया जा रहा है. यहां बेखौफ होकर किसी को भी जैमिंग सिस्टम बेचा जा रहा है. इन दुकानदारों को पुलिस का भी खौफ नहीं है.

5 हजार से लेकर 40 हजार तक का है जैमिंग सिस्टम

सूत्रों की मानें तो शादीपुर में हर तरह के जैमिंग सिस्टम उपलब्ध हैं. जानकारों का कहना है कि सिस्टम की क्वालिटी के मानक और रेट उसकी दूरी के हिसाब से तय होते हैं. मतलब ये कि अगर जैमिंग सिस्टम 10 मीटर की दूरी तक काम करता है तो उसके रेट 5 हजार रुपये हैं.

अगर सिस्टम 25 मीटर की दूरी तक काम कर रहा है तो उसके रेट 40 हजार रुपये हैं. ये सिस्टम वजन में बहुत हल्के और छोटे हैं. आसानी से इन्हें एक जगह से दूसरी जगह तक ले जाया जा सकता है.

पता है गैरकानूनी है, फिर भी रहे हैं बेच

शादीपुर में जब एक दुकानदार ने बिना किसी कागजी लिखा-पढ़ी और बिना कोई पहचान पत्र लिए एक जैमिंग सिस्टम बेचा तो उससे पूछा गया कि क्या आपको इसके कानूनी या गैरकानूनी होने की जानकारी है, तो बोला कि हमे अच्छी तरह से पता है कि इससे बेचने पर सजा भी हो सकती है.

वाहन चोरों के लिए बना मजबूत हथियार

पुलिस से जुड़े सूत्रों की मानें तो गैरकानूनी तरीके से बाजार में बिक रहा जैमिंग सिस्टम वाहन चोरों के लिए हथियार बन गया है. वाहन चोर अब बड़ी ही आसानी से वाहन को चुराकर फरार हो जाते हैं. जब चोरी गए वाहन को ट्रेस करने की कोशिश की जाती है तो वाहन में जैमिंग सिस्टम ऑन होने की वजह से जीपीएस काम नहीं करता है और लाख कोशिशों के बाद भी चोरी गया वाहन ट्रेस नहीं हो पाता है.


क्या कहते हैं साइबर लॉ एक्सपर्ट

जैमिंग सिस्टम के कानूनी और गैरकानूनी होने के बारे में जब पुख्ता जानकारी लेने के लिए साइबर लॉ एक्सपर्ट पवन दुग्गल से बात की गई तो उन्होंने बताया कि जीपीएस ही नहीं मोबाइल फोन और दूसरी डिवाइस को भी जाम करना एक कानूनी अपराध है. इसके लिए सजा का प्रावधान भी है.

जाम करने वाली डिवाइस को बेचना ही नहीं खरीदना भी जुर्म है. क्योंकि इस तरह की डिवाइस को इस्तेमाल करने का हक सिर्फ सरकार के पास है. किसी विषम परिस्थिति में ऐसा करने के लिए सरकार से अनुमति लेनी होती है.

इस बारे में जब दिल्ली वेस्ट पुलिस के डीसीपी विजय सिंह से बात करने की कोशिश की गई तो उनका मोबाइल नहीं उठा. इस बारे में जानने के लिए जब मोबाइल पर मैसेज भेजा गया तो उसका भी जबाव नहीं आया.
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