ISO सर्टिफिकेशन की राह पर दिल्ली का ये 'हैरीटेज' रेलवे स्टेशन

पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन (Old Delhi Railway Station) जल्द ही ISO Certified होने जा रहा है. 1864 में बना ये स्टेशन राजधानी दिल्ली (Delhi) का सबसे साफ (Clean) और प्रदूषण मुक्त (Pollution free) स्टेशन है. यहां का रख-रखाव 15 सालों के लिए निजी हाथों में दिया जा रहा है. यहां की सफाई व्यवस्था पहले से ही निजी हाथों में है.

Chandan Kumar | News18India
Updated: August 9, 2019, 6:46 PM IST
ISO सर्टिफिकेशन की राह पर दिल्ली का ये 'हैरीटेज' रेलवे स्टेशन
ISO सर्टिफिकेशन की राह पर पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन
Chandan Kumar | News18India
Updated: August 9, 2019, 6:46 PM IST
पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन  (Old Delhi Railway Station) राजधानी दिल्ली (Delhi) का पहला ISO सर्टिफाइड रेलवे स्टेशन बनने जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक इसके लिए रेलवे ने औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है. ISO सर्टिफिकेट पाने के लिए स्टेशन परिसर में वाटर रि-यूज़ की सुविधा, प्रदूषण मुक्त परिसर (Pollution free) और कूड़े का बेहतर प्रबंधन जैसी कई सुविधाएं मौजूद होना ज़रूरी है.

इतना पुराना है पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन
पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन दिल्ली का सबसे पुराना रेलवे स्टेशन है. इसका निर्माण 1864 में अंग्रेज़ों के ज़माने में हुआ था. यह एक हेरिटेज बिल्डिंग भी है, इसलिए इसके मूल ढांचे में बदलाव किए बगैर यहां रेलवे की तरफ से कई तरह के रिन्नोवेशन के काम हो रहे हैं. दिल्ली स्टेशन (पुरानी दिल्ली) से हर रोज़ 236 ट्रेनें होकर गुज़रती हैं. यहां हर रोज़ करीब 3 लाख मुसाफ़िर सफर के लिए आते हैं. दिसंबर महीने तक पुरानी दिल्ली के सभी 16 प्लेटफॉर्म पर स्केलेटर लगाने का काम भी पूरा हो जाएगा.

Heritage - पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन का निर्माण सन 1864 में हुआ था.
पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन का निर्माण सन 1864 में हुआ था.


रख-रखाव, व्यवसाय निजी हाथों में
जबकि यहां कई जगहों को बिल्ट ऑन ट्रांसफर के हिसाब से निजी क्षेत्र को दिया जा रहा है. इस प्रक्रिया में 15 साल के लिए निजी क्षेत्र ही निर्माण, रख-रखाव और व्यवसाय का काम करेगा. 15 साल बाद यह वापस रेलवे के अधीन आ जाएगा. निजी क्षेत्र के नाम से भले ही कुछ लोगों को आपत्ति हो लेकिन कई बार यह ज़्यादा कारगर भी साबित होता है. दिल्ली रेलवे स्टेशन पर सफाई का काम निजी हाथों में देने के बाद इसकी साफ सफाई भी बेहतर हुई है.

Heritage - निजी हाथों में देने के बाद इसकी साफ सफाई बेहतर हुई है
निजी हाथों में देने के बाद इसकी साफ सफाई बेहतर हुई है

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कम पैसों में बेहतर साफ सफाई
निजी हाथों में देने के बाद रेलवे के खर्च में भी भारी कम आई है. निजी हाथों में पूरे स्टेशन परिसर, प्लेटफॉर्म, ऑफिस और कमरों की सफाई सौंपे जाने के बाद रेलवे को 50 लाख रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं. इसके लिए निजी ठेकेदार के 252 सफाई कर्मचारी अलग-अलग शिफ़्ट में काम करते हैं. जबकि 2 साल पहले जब तक यह काम सरकारी कर्मचारियों के हाथों में था, तो रेलवे को हर महीने अपने कर्मचारियों पर 16 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते थे.

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First published: August 9, 2019, 6:23 PM IST
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