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कोर्ट का अनोखा फैसला, 4 साल पहले सोशल मीडिया पर घोषित हुआ था अपराधी, अब हुआ बरी

Sushil Pandey | News18Hindi
Updated: October 28, 2019, 3:13 PM IST
कोर्ट का अनोखा फैसला, 4 साल पहले सोशल मीडिया पर घोषित हुआ था अपराधी, अब हुआ बरी
छेड़खानी के मामले में एक व्यक्ति को 4 साल बाद बरी किया गया है.

आरोपी का वीडियो वायरल (Vedio Viral) होने के बाद उसी आधार पर दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने एफआईआर (FIR) दर्ज की थी. इसके बाद मामला कोर्ट (Court) में पहुंच गया था.

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  • Last Updated: October 28, 2019, 3:13 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट का एक मामला सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है. छेड़खानी के मामले में एक व्यक्ति को 4 साल बाद बरी किया गया है. ये वो ही शख्स है जिसकी छेड़खानी के आरोप में सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल की गई थी. उसे छेड़खानी का आरोपी बनाया गया था. वीडियो अपलोड करने वाली महिला की सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी तारीफ की थी. लेकिन अब कोर्ट ने उसे बाइज्जत बरी कर दिया है.

ये था छेड़खानी के आरोप वाला मामला

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ एक वीडियो तो आपको याद ही होगा जिसमे एक लड़का सिर पर टोपी लगाए हुए थे. इस युवक पर अगस्त 2015 में ट्रैफिक सिग्नल पर आम आदमी पार्टी (आप) की सदस्य के साथ अश्लील कमेंट करने, छेड़छाड़ करने और धमकी देने के का आरोप लगाया गया था. इसके बाद आरोप लगाने वाली महिला ने इस युवक का वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया था.

जहां देखते ही देखते वीडियो वायरल हो गया था. महिला का आरोप था कि अभियुक्त तिलक नगर के अग्रवाल चौक के ट्रैफिक सिग्नल पर गलत दिशा से बाइक से आया और शिकायतकर्ता महिला को धक्का मारने ही वाला था, लेकिन शिकायतकर्ता अपने को बचाते हुए युवक से भिड़ गई.

तीस हजारी कोर्ट ने ये सुनाया फैसला

तीस हजारी कोर्ट की मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट सोनम गुप्ता ने युवक को बरी करने का आदेश दिया. मजिस्ट्रेट ने आरोपी युवक को अश्लील टिप्पणी करने, आपराधिक धमकी देने और इशारे अथवा शब्दों के माध्यम से किसी महिला की लज्जा को भंग करने के आरोपों से बरी कर दिया. अदालत ने कहा कि मामले और गवाहों के बयानों पर गौर करने के बाद पाया गया कि महिला का उद्देश्य आरोपी की विनम्रता का अपमान करना था.

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि शिकायतकर्ता ने अलग-अलग जगह पर दिए गए अपने बयानों में बदलाव किया. शिकायतकर्ता के बयानों में विरोधाभास है, जिसे नजरअदांज नहीं किया जा सकता. अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता के बयान विश्वसनीय नहीं है, जो कि इस मामले की सबसे गंभीर खामी है. अदालत बगैर पुख्ता आधार के किसी को दोषी नहीं ठहरा सकती.
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बेटे की वीडियो देख पिता को आया था हार्ट अटैक

कोर्ट से बरी होने के बाद युवक ने बताया कि 4 साल की लम्बी लड़ाई लड़ने के बाद मुझे इंसाफ मिला है. लेकिन इस दौरान मेरी सामाजिक इज्जत धूल में मिल गई. सोशल मीडिया पर मेरी वीडियो देखकर पिता हार्ट के पेशेंट हो गए. मुझे धक्का तो बहुत लगा, लेकिन इसके बाद भी मैं कोर्ट के चक्कर काटता रहा.

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First published: October 28, 2019, 3:13 PM IST
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