OPINION: तीन तलाक पर कानून ने बंद कर दी है सबकी जुबान

अगर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और मौलाना पहले ही सुधार कर लिए होते तो कानून की जरूरत नहीं पड़ती, इस पर पहले ही कानून बन जाना चाहिए था.

News18Hindi
Updated: July 31, 2019, 11:12 PM IST
OPINION: तीन तलाक पर कानून ने बंद कर दी है सबकी जुबान
OPINION: तीन तलाक पर कानून ने बंद कर दी है सबकी जुबान
News18Hindi
Updated: July 31, 2019, 11:12 PM IST
ताहिरा हसन

तीन तलाक लंबे समय से मुस्लिम महिलाओं के सिर पर तलवार की तरह लटका रहा है. मैं तो कहती रही हूं कि ये गैर इस्लामिक है और कुरान के विरुद्ध है. मैं तो कहती रही हूं कि एक भी ऐसी आयत कोई दिखा दे, जिसमें ये लिखा हो कि एक बार में तीन तलाक जायज है. पाकिस्तान, बांग्लादेश और मोरक्को जैसे देशों में तलाक अदालतों से होते हैं लेकिन हमारे जैसे बड़े लोकतांत्रिक देश में यह अभी तक चल रहा था.

मुस्लिम महिलाएं इससे प्रताड़ित थी. इसके खिलाफ लड़ रही थीं. सुप्रीम कोर्ट महिलाओं के साथ आया और इसे खारिज कर दिया. अब कोई तीन बार या सौ बार तलाक कहे लेकिन तलाक नहीं होगा. इस सब के बावजूद एक कानून की जरूरत इस मामले पर इस कारण से थी क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी तीन तलाक के 200 से ज्यादा मामले सामने आए. लिहाजा इस कानून का स्वागत भी करती हूं. हालांकि मेरा यह भी मानना है कि इसमें महिलाओं के गुजारे के लिए कुछ धन की व्यवस्था भी करनी चाहिए थी.

पहले तीन तलाक करके पति महिला को छोड़ देता था. महिला बच्चों के साथ सड़क पर आ जाती थी. अब तीन तलाक देने वाला पति जेल चला जाता है. चूंकि उसने कानून का उल्लंघन किया है, लिहाजा होना ये चाहिए कि उस महिला को पति की चल अचल समेत हर तरह की संपत्ति का आधा हिस्सा दे दिया जाए.

इसके साथ ही उन मौलानाओं के खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए, जो इस तरह के तलाक को वैध करार दे. वे इसे इस्लामिक ठहराने की कोशिश करते हैं. आखिर वही मौलाना लोग तो इस पर मोहर लगाते थे. ज्यादातर मुस्लिम महिलाएं तो पढ़ी लिखी नहीं हैं. उन्हें तो पता नहीं है कि कुरान में क्या लिखा है. वो तो यही मौलाना थे जो उन्हें बताते थे कि ये लिखा है.

हलाला जैसी कुरीति से मिली मुक्ति 
हलाला जैसी कुरीति भी इसी की देन है. जब तीन तलाक है तभी हलाला भी बताया जा रहा था. अगर तीन तलाक खत्म कर दिया जाय तो हलाला अपने आप खत्म हो जाएगा. ये तो उसी तीन तलाक की देन है. इस कुरीति को मौलाना और पर्सनल लॉ बोर्ड हटाना नहीं चाहते थे. इसी कारण तो ये चल रहा था.
Loading...

निकाहनामे के साथ ही तीन तलाक पर रोक की बात भी की जाए
अगर मौलाना और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के लोग अपने ही सुधार कर लिए होते तो कानून की जरूरत ही क्यों पड़ती. हमने कई बार अनुरोध किया था. यहां तक कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि हम एडवाइजरी जारी करेंगे कि निकाहनामे के साथ ही तीन तलाक पर रोक की बात भी की जाय. उन्होंने वो भी नहीं किया. बल्कि एफिडेविड दे कर कहा गया कि मुस्लिम महिलाएं कमअक्ल होती हैं. तो इन्ही मुद्दों पर उन्हें मुंह की खानी पड़ी.

मुस्लिम महिलाओं की जीत
इस लिहाज से ये मुस्लिम महिलाओं की जीत है और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की हार है. सुप्रीम कोर्ट ने इसमें पहल की. साथ ही सरकार भी बड़ी मजबूती से खड़ी हुई. पिछली सरकारों को ही इसे कर देना चाहिए था. अब जो विपक्ष में हैं उनकी भी तो सरकारें रहीं हैं. उस दौर में भी महिलाओं को बच्चों के साथ सड़क पर खड़ा कर दिया जाता था. खास तौर से जिन दलों ने तीन तलाक को अवैध घोषित करने वाले कानून का बहिष्कार किया उन्हें अपना रुख साफ करना चाहिए था.

मौलानाओं की दुकानें हुईं बंद
चाहे वे मौलाना हो या पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य सभी पुरुष ही थे. उनके हाथ में ये हथियार रहे. शायद इसी कारण से वे सब इसकी हिमायत कर रहे थे. ये कहीं से भी न्यायसंगत नहीं माना जाएगा कि तीन तलाक के नाम पर महिला को बच्चों समेत सड़क पर फेंक दिया जाए. अब उनकी दुकानें बंद गई हैं, जुबानें बंद हो गई हैं. अभी तक मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भी बोलता था कि ये नहीं खत्म होगा. आखिर तीन तलाक में ही शरीयत की दुहाई क्यों दी जाती थी. शरीयत के दूसरे कानून भी ले लिए जाए. इसके मुताबिक चोरी करने वाले के हाथ काट दिए जाएं और रेप करने वाले को पत्थर मार कर संगसार किया जाए. वहां तो देश के कानून की बात की जाती है. फिर महिलाओं के तीन-तलाक के मामले में ही शरीयत का कानून क्यों हो. आखिर पहले कौन है कुरान या शरीयत? ये भी देखने की जरूरत है. यह भी खास बात है कि कुरान की किसी भी बात को बदला नहीं जा सकता है. फिर क्यों बदला जा रहा है. उसमें तलाक का तरीका दिया हुआ है, जो एक साथ तीन तलाक का नहीं है. निकाह में विटनेस होता है तो तलाक में विटनेस क्यों नहीं होगा.

कानून के जरिए मुस्लिम महिलाओं की मदद होगी
इस कानून के जरिए मुस्लिम महिलाओं की मदद की जाएगी. जो भी कोई तीन तलाक देकर इस कानून का उल्लंघन करेगा उसके पक्ष में हमारे जैसे संगठन खड़े होंगे. हम उन महिलाओं की मदद करेंगे. हम यह जरूर चाहेंगे कि इस कानून में थोड़ा संशोधन करके यह व्यवस्था भी की जाए कि पीड़ित महिलाओं की आर्थिक मदद की जा सके. ये लड़ाई खत्म नहीं होगी, बहुत लंबी है. मुस्लिम महिलाओं के साथ जो अत्याचार करेगा उससे कानून के जरिए निपटा जाएगा.

(लेखिका, सामाजिक कार्यकर्ता हैं और लखनऊ के साथ अलीगढ़ में खास तौर से मुस्लिम महिलाओं के बीच घरेलू हिंसा के विरोध में काम करती रही हैं और तीन तलाक का विरोध करने वालों में प्रमुख हैं.)

 ये भी पढ़ें- 

शमी की पत्नी की याचिका पर हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

पहले पत्नी को दिया ट्रिपल तलाक, अब बना रहे हलाला का दबाव 
First published: July 31, 2019, 9:13 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...