मोदी सरकार के मंत्री ने कहा- ठोस विकल्प आने के बाद ही प्लास्टिक पर लगेगा बैन!

Ravishankar Singh | News18Hindi
Updated: September 10, 2019, 7:27 PM IST
मोदी सरकार के मंत्री ने कहा- ठोस विकल्प आने के बाद ही प्लास्टिक पर लगेगा बैन!
प्लास्टिक पर बैन को लेकर केंद्र सरकार सख्त, लेकिन उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रख कर ही इसे पूरी तरह लागू किया जाएगा

मोदी सरकार (MODI GOVERNMENT) के मंत्री रामविलास पासवान (RAM VILAS PASWAN) ने कहा है कि खाद्य पदार्थों और पेयजल में एकाएक प्लास्टिक (PLASTIC) का उपयोग बंद नहीं किया जा सकता है. इसके बंद करने के निर्णय को धीरे-धीरे लागू किया जाएगा. यह देखना होगा कि उपभोक्ताओं पर भी अतिरिक्त बोझ न पड़े.

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नई दिल्‍ली. केंद्रीय उपभोक्ता कार्य, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री (Consumer Affairs, Food and Public Distribution Minister) रामविलास पासवान (Ram Vilas Paswan) ने कहा है कि प्लास्टिक (Plastic) पर पूरी तरह से प्रतिबंध ठोस विकल्प आने के बाद ही लागू किया जाएगा. साथ ही यह भी ख्याल रखा जाएगा कि पर्यावरण का नुकसान नए विकल्प के आने से न हो. उपभोक्ताओं पर भी अतिरिक्त बोझ न पड़े. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कागज को तरल पदार्थों की पैकेजिंग के रुप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. अगर कागज का इस्तेमाल किया भी जाता है तो प्लास्टिक की कुछ मात्रा उसमें मिक्स करनी पड़ेगी. खाद्य पदार्थों और पेयजल में एकाएक प्लास्टिक का उपयोग बंद नहीं किया जा सकता. ऐसी मुझे राय दी गई है. इसके बंद करने के निर्णय को धीरे-धीरे लागू किया जाएगा. पासवान ने अपने कार्यालय में प्लास्टिक उत्पादों के विकल्प पर चर्चा के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई थी.

प्लास्टिक उद्योग जगत से राय मंगी

बैठक का मुख्य उद्देश्य यह था कि देश को कैसे सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त किया जाए. बैठक में भारत सरकार के कई विभागों के प्रतिनिधियों के साथ देश के प्रमुख प्लास्टिक उत्पाद निर्माता, सेंट्रल इंस्‍टीट्यूट ऑफ प्‍लास्टिक इंजीनियरिंग एंड टेक्‍नोलॉजी (CIPET) के प्रतिनिधि और इससे जुड़े अन्य विशेषज्ञों ने अपनी राय रखी. मीटिंग के बाद रामविलास पासवान ने 11 सितंबर तक प्लास्टिक उद्योग से जुड़े लोगों से अपने-अपने सुझाव देने को कहा है.

केंद्र सरकार खाद्य पदार्थों और पेयजल की पैकेजिंग के लिए प्लास्टिक का विकल्प खोजने का प्रयास कर रही है.
केंद्र सरकार खाद्य पदार्थों और पेयजल की पैकेजिंग के लिए प्लास्टिक का विकल्प खोजने का प्रयास कर रही है.


केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने इस बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा, 'केंद्र सरकार खाद्य पदार्थों और पेयजल की पैकेजिंग के लिए प्लास्टिक का विकल्प खोजने का प्रयास कर रही है. इसे लेकर मंत्रालय ने प्लास्टिक उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों और भारत सरकार के अन्य मंत्रालयों जैसे पर्यावरण, रेल मंत्रालय के प्रतिनिधियों को भी इस बैठक में बुलाया है. इसमें प्लास्टिक के विकल्प के तौर पर क्या होगा इसके लिए राय मांगी गई है. मंत्रालय का प्रयास है कि प्लास्टिक के तौर पर जो भी विकल्प आएगा वो सस्ता, भरोसेमंद और पारदर्शी होनी चाहिए.'

नए विकल्प में उपभोक्ताओं को परेशानी न हो
पासवान ने आगे कहा, 'हमारे मंत्रालय का पूरा प्रयास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्लास्टिक के खिलाफ शुरू की गई मुहिम को पूरी मुस्तैदी के साथ आगे बढ़ाया जाए. साथ ही यह भी ध्यान रखा जाए कि नए विकल्प आने से उपभोक्ताओं को परेशानी न हो और उनका विश्वास बना रहे. मुहिम में प्लास्टिक मुक्त भारत पर विशेष बल दिया गया. आगामी 15 सितंबर से खाद्य मंत्रालय और उसके अधीन आने वाले सभी सार्वजनिक उपक्रमों में एक बार इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक के इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का फैसला किया गया है. मंत्रालय ने तय किया है कि अगले 10 दिनों में वैकल्पिक व्यवस्था बहाल की जाएगी, जिससे लोगों को परेशानी न हो.
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पीएम मोदी की प्लास्टिक के खिलाफ शुरू की गई इस मुहिम को पूरी मुस्तैदी के साथ आगे बढ़ाया जाए
पीएम मोदी की प्लास्टिक के खिलाफ शुरू की गई इस मुहिम को पूरी मुस्तैदी के साथ आगे बढ़ाया जाए


बता दें कि पीएम मोदी ने प्लास्टिक पर प्रतिबंध को लेकर जो कमिटी बनाई है, उसका नेतृत्व कैबिनेट सचिव कर रहे हैं. पर्यावरण मंत्रालय इस काम के लिए नोडल मंत्रालय नियुक्त किया गया है. पर्यावरण मंत्रालय को ही निर्णय लेना है कि शुरुआत में प्लास्टिक से जुड़े किन-किन उत्पादों पर प्रतिबंध लगाया जाए. इस बैठक में पर्यावरण मंत्रालय के प्रतिनिधि ने कहा है कि बहुत जल्द ही पर्यावरण मंत्रालय कुछ लिस्ट जारी करेगी.

सोमवार को प्लास्टिक उद्योग जगत से जुड़े लोगों ने अपने-अपने सुझाव रखे
सोमवार को प्लास्टिक उद्योग जगत से जुड़े लोगों ने अपने-अपने सुझाव रखे


प्लास्टिक पर बैन होने से उद्योग जगत चिंतित
लेकिन, इस बैठक में आए प्लास्टिक उद्योग जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि इससे प्लास्टिक उद्योग जगत को काफी नुकसान पहुंचेगा. सरकार जल्दबाजी में प्लास्टिक पर बैन लगाने जा रही है, लेकिन इससे रोजगार तो जाएगा ही साथ ही लोगों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा. नेचुरल मिनरल वाटर पैकेजिंग से जुड़े एक उद्योगपति ने न्यूज़ 18 हिंदी के साथ बातचीत में कहा, 'देखिए पानी का बोतल सिंगल यूज प्लास्टिक नहीं है. यह पूरी तरह से रीसाइक्लेबल प्लास्टिक है. भारत में भी सभी लोग इसको रीसाइक्लिंग कर रहे हैं. देखिए भारत में पानी की इंडस्ट्री 30 हजार करोड़ रुपए की है और साढ़े सात लाख करोड़ की बोतल इंडस्ट्री है. सबसे खास बात यह है कि साढ़े सात लाख लोग इस इंडस्ट्री में नौकरी कर रहे हैं. अगर सभी को मिला दें तो इस इंडस्ट्री के बंद होने से सात करोड़ लोगों के जिंदगी पर असर पड़ेगा. इसलिए सरकार से मेरी मांग है कि यूरोप में जिस तरह से सिंगल यूज बोटल को रीसाइक्लिंग में छूट दी गई वैसा ही भारत में भी सरकार छूट दे.'

सरकार के एक बड़े अधिकारी का कहना है कि सिंगल यूज्ड प्लास्टिक पर अभी तक भारत सरकार के पास कोई नीति नहीं थी. पीएम मोदी की पहल के बाद अब भारत सरकार के कई विभागों ने इस पर काम करना शुरू किया है. यहां तक कि ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (बीआईएस) को भी अभी तक पता नहीं है कि सिंगल यूज प्लास्टिक की क्या परिभाषा है. देश में प्लास्टिक पर बैन करने की बात तो हो रही है, लेकिन सरकार अब यह तय करने में लगी है कि भारत में सिंगल यूज प्लास्टिक की परिभाषा क्या होगी और वो किन-किन वस्तुओं पर लागू होगा.

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First published: September 9, 2019, 7:51 PM IST
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