मंत्रियों के गायब होने से इतने नाराज क्यों हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी?

जानिए क्यों लगाई जाती है संसद में मंत्रियों की रोस्टर ड्यूटी, क्यों जरूरी है मंत्री का सदन में होना.

Anil Rai | News18Hindi
Updated: July 17, 2019, 12:31 PM IST
मंत्रियों के गायब होने से इतने नाराज क्यों हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी?
संसद की कार्यवाही को नरेंद्र मोदी सरकार 2.0 में तेजी मिली है
Anil Rai
Anil Rai | News18Hindi
Updated: July 17, 2019, 12:31 PM IST
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में रोस्टर ड्यूटी से अनुपस्थित मंत्रियों पर नाराजगी जताई है. खबरों की मानें, तो प्रधानमंत्री मोदी ने उन मंत्रियों के नाम मांगे हैं, जो रोस्टर ड्यूटी से नदारद थे. ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर क्या रोस्टर ड्यूटी, जिससे गायब रहने पर प्रधानमंत्री अपने ही मंत्रियों पर इतने नाराज हो गये.

संसद के संचालन करने की जो कार्यप्रणाली बनाई गई है, उसके पैरा 2.9 में साफ-साफ लिखा है कि दोनों सदनों की कार्रवाई के दौरान विभागीय अधिकारी संसद में मौजूद रहेंगे, जो सदस्यों की बात विभागीय मंत्री तक पहुंचाएंगे. लेकिन, ये विभागीय अधिकारी उनके लिए आरक्षित गैलरी में रहते हैं, जहां वो सरकार के खिलाफ उठाए गए मुद्दों को लिख सकते हैं और विभागीय मंत्रियों तक पहुंचा सकते हैं. उनके पास सरकार के बचाव का अधिकार नहीं होता.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी


क्यों लगती है मंत्रियों की रोस्टर ड्यूटी

इसलिए संसदीय कार्यमंत्रालय ऐसी व्यस्था बनाता है कि दोनों सदनों में हर समय कम से कम तीन मंत्री मौजूद रहें. इसके लिए मंत्रियों का 2-2 घंटे का रोस्टर बनाया जाता है, जिसमें कुछ वरिष्ठ मंत्रियों को छोड़कर सभी मंत्रियों की ड्यूटी लगाई जाती है, चाहें वो कैबिनेट हो या राज्यमंत्री. इन मंत्रियों की रोस्टर ड्यूटी की सूचना संसद की कार्यसूची जारी होने के साथ ही दे दी जाती है.

क्यों जरुरी है मंत्रियों का सदन में रहना
दरअसल, संसद में मौजूद सरकार के अधिकारी संसद की कार्यवाही में किसी तरह हिस्सा नहीं ले सकते. ऐसे में अगर विपक्ष के सांसद सरकार के खिलाफ कोई मुद्दा उठाते हैं और सरकार की ओर से जवाब देने वाला कोई नहीं होता, तो सत्ता पक्ष के सांसद संसद में हंगामा और नारेबाजी करके विरोधी सदस्यों को बोलने से रोक तो सकते हैं, लेकिन उन्हें सरकार का पक्ष रखने का अधिकार नहीं है.
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गृह मंत्री अमित शाह


पीएम की नाराजगी की ये है असली वजह
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गिनती संसदीय परंपरा मानने वाले नेताओं में होती है. पिछले लोकसभा चुनावे के बाद प्रधानमंत्री पहली बार जब संसद में पहुंचे थे, तो उन्होंने लोकसभा की सीढ़ियों पर अपना माथा टेका था. वर्तमान सत्र पर नज़र डाले, तो लोकसभा अध्यक्ष ने करीब-करीब हर सदस्य को बोलने का मौका दिया है, यानी संसदीय परंपराओं का पूरा ध्यान रखा जा रहा है. ऐसे में प्रधानमंत्री कभी नहीं चाहेंगे की दो तिहाई बहुमत की सरकार की स्थिति संसद में मंत्रियों के गौरहाजिर रहने के कारण हास्यापद हो जाए, जबकि उसके पास प्रधानमंत्री मोदी समेत 58 मंत्री है.

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First published: July 17, 2019, 11:30 AM IST
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