जम्मू कश्मीर और लद्दाख को मुख्यधारा में लाने का ब्लूप्रिंट है पीएम नरेंद्र मोदी का राष्ट्र के नाम संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार जम्मू कश्मीर मामलों की सीधी निगरानी कर रहे हैं, देश के दूसरे हिस्सों के साथ ही राज्य का भी होगा विकास

Jagdish Upasane | News18Hindi
Updated: August 9, 2019, 11:36 AM IST
जम्मू कश्मीर और लद्दाख को मुख्यधारा में लाने का ब्लूप्रिंट है पीएम नरेंद्र मोदी का राष्ट्र के नाम संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आलोचक भी मानते हैं कि विकास के लिए उन्होंने जो ठान लिया उसे लागू किया है. (फाइल फोटो)
Jagdish Upasane
Jagdish Upasane | News18Hindi
Updated: August 9, 2019, 11:36 AM IST
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राष्ट्र के नाम बृहस्पतिवार को प्रसारित संदेश भी जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के नये रूप के लिए अरसे से चल रही केंद्र सरकार की मुकम्मल तैयारी का ही नतीजा है. प्रधानमंत्री ने अपने लगभग 30 मिनट के उद्बोधन में उन सब जरूरी पहलुओं को छुआ जिनके बारे में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों के सामने सर्वोच्च स्तर से स्पष्टता करने की जरूरत थी. हालांकि गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में अनुच्छेद 370 तथा 370 ए के खात्मे और जम्मू-कश्मीर, लद्दाख को अलग-अलग केंद्रशासित राज्य बनाने के संकल्प पेश करते समय और उन पर लंबी चर्चा का जवाब देते हुए लगभग यही तथ्य रखते हुए नये, विकसित जम्मू-कश्मीर और नये लद्दाख का भरोसा दिया था. फिर भी  प्रधानमंत्री के स्तर से उन पर मुहर लगने से वह भरोसा और मजबूत होना था. मोदी का संबोधन उसकी गवाही भी देता है.

आश्वासन से पहले नब्ज टटोली गई

वैसे मोदी ने ये संकल्प दोनों सदनों से पारित होने के तुरंत बाद ही हिंदी अंग्रेजी समेत इस भूभाग में प्रमुखता से बोली जाने वाली भाषाओं- पंजाबी, उर्दू, बोधी (लद्दाखी) में ट्विट कर लोगों को बताया कि "जम्मू-कश्मीर के लोगों ने गृह मंत्री के इस बयान का स्वागत किया है की जम्मू-कश्मीर स्थिति सामान्य होते ही, उचित समय पर फिर राज्य बना दिया जाएगा, उसे हरदम केंद्र शासित नहीं रखा जाएगा. हम उसे हमेशा के लिए केंद्र शासित प्रदेश बनाए रखना नहीं चाहते." प्रधानमंत्री के उद्बोधन से ठीक पहले राष्ट्रीय सुरक्षासलाहकार अजित डोवाल की राज्य की यात्रा, जिसमें उन्होंने न केवल राज्य के सुरक्षा माहौल का खोज-खबर ली बल्कि सुरक्षा बलों के हाथों मारे गये आतंकी बुरहान वानी के गढ रहे पुलवामा में आम कश्मीरियों के साथ सडक पर लंच करने जैसे उपायों से आम जनता की भी नब्ज टटोली, प्रधानमंत्री के संदेश को ठोस रूपाकार देने में मददगार हुई ही होगी.

Ajit Doval sensed the situation in Jammu and kashmir
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल ने भी स्थितियों का जायजा लेने के लिए कश्मीर की यात्राएं की


संदेश से पहले गहरा विचार विर्मश हुआ है

यह तय बात है कि मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख में विकास करने, खास तौर से घाटी को देश की मुख्यधारा में जल्द से जल्द लाने का विस्तृत ब्लूप्रिंट तैयार कर रखा है. देश के नाम मोदी का संदेश, जो जितना देशभर के लोगों के लिए था, उससे कहीं अधिक जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों के लिए था, उस ब्लूप्रिंट की महज एक बानगी था. 370 और 35ए का खात्मा तथा राज्य को दो अलग-अलग केंद्रशासित प्रदेशों में बांटने का फैसला बेशक ऐतिहासिक है और प्रधानमंत्री ने इसे दोहराया. केंद्र सरकार को एहसास है कि पिछले 70-71 वर्षों से 370 के कारण "विशेष" होने के मायाजाल से भ्रमित राज्य के लोगों को (उनके ही हक में) अपने राज्य का संवैधानिक दर्जा ही नहीं, उसकी सीमाएं तक बदलने का यह फैसला तथा उसके फायदेमंद परिणाम समझने और स्वीकार करने में वक्त लग सकता है.

सचाई स्वीकार करने का भी संदेश
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प्रधानमंत्री ने इसकी तरफ संकेत इतनी सहजता से किया जैसे यह एकदम स्वाभाविक बात हो. उन्होंने कहा, " समाज जीवन में कुछ बातें उतनी घुल-मिल जाती हैं कि उनके बारे में स्थायी भाव मन में बैठ जाता है. अनुच्छेद 370 और 35 ए के साथ भी ऐसा ही हुआ." 370 और 35 ए हटने से देशभर के लोगों के अधिकार तथा दायित्व समान होने" की बात पर मोदी के जोर देने में भाजपा और उसके पूर्ववर्ती जनसंघ के समर्थ, सशक्त और एकात्म भारत के मूल विचार की झलक दिखती है.

security has been tighten before 370 bill
370 पर संसद में बहस से पहले सुरक्षा व्यवस्था चाक चौबंद कर ली गई थी


सख्ती भी होगी

प्रधानमंत्री ने विशेषकर जम्मू-कश्मीर के लोगों को स्पष्ट कर दिया कि अब यह एक सचाई है और उनको भी इसे जल्द से जल्द स्वीकार कर लेना चाहिए. और जल्द से जल्द क्यों मान लेना चाहिए इसके उन्होंने ठोस कारण भी बताए. उन्होंने जम्मू-कश्मीर में वर्तमान में जारी राज्यपाल के शासन का हवाला दिया जिसमें राज्य का प्रशासन उन गांवों-कस्बों में भी पहुँच रहा है, जहां अब तक कभी कोई प्रशासकीय अधिकारी नहीं पहुंचा था. इन अफसरों को निर्देश हैं कि वे गांव-कस्बों की समस्याएं, शिकायतों का निबटारा वहीं करें और वंचित तबकों के लिए सरकार की योजनाओं की शुरुआत करवाएं. इसके नतीजे अच्छे निकल रहे हैं क्योंकि न घाटी के सियासी घरानों, न खानदानी सियासतदानों काउन पर कोई जोर है. अलगाववादियों तथा घोटालेबाजों के विरुद्ध केंद्रीय एजेंसियों की धडाधड कार्रवाइयों से सरकारी तंत्र में ऊपर से नीचे तक जडें जमाए भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लग रहा है.

हर स्तर पर है पीएमओ की नजर

इसके अलावा जैसा प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया, पंचायत चुनावों में चुनकर आए प्रतिनिधियों के विशेषकर ग्रामीण स्तर पर बेहतर काम से भी आम लोगों में अपना भला होने और इलाके का विकास होने का विश्वास जागा है. मोदी ने जिस उत्साह से महिला पंचायत प्रतिनिधियों के "कमाल करने" का जिक्र किया उससे संकेत मिलता है कि नये स्वरूप में निचले स्तर से स्थानीय लोगों के जरिए विकास तेज होगा. मोदी ने श्रीनगर और दिल्ली में अपने घर पर इन पंचायत प्रतिनिधियों से मुलाकात का उल्लेख किया. इससे पता चलता कि जब से राज्य राज्यपाल शासन के तहत आया है, प्रधानमंत्री का कार्यालय जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख में कई योजनाओं की सीधे मॉनिटरिंग कर रहा है.

pm narendra modi indicated for development of Jammu kashmir
जम्मू और कश्मीर के साथ लद्दाख के विकास योजना का भी पीएम नरेंद्र मोदी ने संकेत किया


विकास की मुकम्मल योजना

प्रधानमंत्री ने अपने उद्बोधन में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के तेज विकास के लिए पर्यटन, देसी-विदेशी फिल्मों की शूटिंग, हिंदी, तमिल तथा तेलुगु सिने-उद्योग को वहां स्टुडियो निर्माण, निजी-सरकारी उद्यमों के विस्तार, उनमें रोजगार के सृजन, प्रोद्यौगिकी के इस्तेमाल, बीपीओ, कॉमन सर्विस सेंटर जैसे इलाके के सर्वांगीण विकास की कयी योजनाओं का उल्लेख करते हुए जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख के स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने पर जिस तरह जोर दिया उससे पता चलता है कि केंद्र सरकार इसके लिए व्यापक योजना तथा निवेश के साथ सन्नद्ध है. खादी ग्रामोद्योग आयोग, जिसने मोदी राज में चमत्कारी ढंग से खादी तथा दूसरे देसी उत्पादों को आधुनिक माॅल-मंडी का आवश्यक हिस्सा बना दिया है, इस‌ काम में अहम भूमिका निभाएगा.

ज्यादातर लोग  खून खराबे से आजिज आ चुके हैं

मोदी सरकार 370 तथा 35ए के खात्मे के लिए संसद के सामने जाने से पहले से जानती थी कि राज्य की अधिकांश आबादी आतंकवादी खून-खराबे, स्वार्थी अलगाववादियों की सियासी चालों और सूबे के राजनीतिकों के कुर्सी के खेल से आजिज आ चुकी है. और अपने राज्य के विकास तथा अपने बाल-बच्चों के सुखी जीवन की उसकी आस मोदी सरकार के पांच साल के पिछले कार्यकाल में गरीबों और निम्नमध्यम वर्ग के भले के लिए शुरू हुई योजनाओं के नतीजों से और भी बलवती हुई है. इसलिए मोदी ने अपने संदेश में राज्य के लोगों को न केवल इलाके का चहुंमुखी विकास कर नया जम्मू-कश्मीर और नया लद्दाख बनाने का भरोसा दिलाया, बल्कि देश के लिए उनके बलिदान, समर्पण को भी सलाम किया.

pm narendra modi promised employment for youth
जम्मू-कश्मीर के युवाओं के लिए रोजगार की ओर भी पीएम मोदी ने साफ संकेत किए.


युवाओं की तरफ है लक्ष्य

मोदी हर स्थान पर युवाओं से विशेष आह्वान करते हैं, उनकी क्षमता, साहस और जोखिम लेने के स्वभाव को ललकारते हैं. सेना, सुरक्षा बलों तथा पुलिस और प्रशासकीय सेवाओं के लिए जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख के युवाओं की बढ़ती संख्या से अच्छी तरह परिचित प्रधानमंत्री ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को देश की मुख्य धारा में लाने के लिए अपने संदेश में यही किया. देश के अन्य भागों के लोगों को प्रधानमंत्री ने साफ कर दिया कि "जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लोगों के सुख-दुख से हम अलग नहीं हो सकते." प्रधानमंत्री के बतौर मोदी के लिए देश के लोगों, उनके विरोधियों समेत, की यह राय आम है कि वे जो बोलते हैं, जरूर करते हैं. जम्मू-कश्मीर भी अब भारत से अलग नहीं है.

(जगदीश उपासने वरिष्ठ पत्रकार हैं और ये उनके अपने विचार हैं)

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Article-370 हटाने से पहले NSA डोभाल ने पुख्‍ता तैयारी के लिए किया था श्रीनगर का सीक्रेट दौरा
First published: August 9, 2019, 11:36 AM IST
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