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दिल्‍ली की आबोहवा में फिर घुलना शुरू हुआ ‘जहर’, 10 दिनों में दोगुना हुआ वायु प्रदूषण

Anoop Mishra | News18India
Updated: October 10, 2019, 2:43 PM IST
दिल्‍ली की आबोहवा में फिर घुलना शुरू हुआ ‘जहर’, 10 दिनों में दोगुना हुआ वायु प्रदूषण
दिल्‍ली-एनसीआर के वायु प्रदूषण में बीते दस दिनों के भीतर तेजी से बढ़ोत्‍तरी हुई है.

प्रदूषण (Pollution) की सबसे गंभीर स्थिति शाहदरा इलाके में है. यहां गुरुवार दोपहर करीब 11 बजे एयर क्वालिटी इंडेक्स (air quality index) 278 PM के आंकड़े को पार कर चुका था. शहर में बदलते मौसम के साथ बढ़ता हुआ प्रदूषण हमारे स्वास्थ्य (health) के लिए बेहद खतरनाक होता जा रहा है.

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  • Last Updated: October 10, 2019, 2:43 PM IST
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नई दिल्‍ली. दिल्ली-एनसीआर में मौसम (weather) के बदलते मिजाज के साथ यहां की आबोहवा भी दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है. आलम यह है कि एक अक्टूबर को दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (air quality index) महज 92 PM (Particulate matter) था, वहीं बीते दस दिनों में यह 223 PM के आंकड़े को पार कर चुका है. यानी, दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की हवा में हर दिन हवा में प्रदूषण (Pollution) का स्तर बेहद तेजी के साथ बढ़ रहा है. पार्टिकुलेट मैटर या पार्टिकुलेट पॉल्यूशन, हवा में मौजूद सूक्ष्म ठोस कणों और द्रव यानी पानी के मिश्रण को कहा जाता है. इन तत्वों की मौजूदगी से प्रदूषण का निर्धारण होता है.

शाहदरा सबसे प्रदूषित
दिल्ली की बात करें तो प्रदूषण (Pollution) की सबसे गंभीर स्थिति शाहदरा इलाके में है. यहां गुरुवार दोपहर करीब 11 बजे एयर क्वालिटी इंडेक्स (air quality index) 278 के आंकड़े को पार कर चुका था. शाहदरा सहित राजधानी के दूसरे इलाकों का एयर क्वालिटी इंडेक्स (air quality index) बताता है कि शहर में बदलते मौसम के साथ बढ़ता हुआ प्रदूषण (Pollution) हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक होता जा रहा है.

खतरे का संकेत

राजधानी के प्रदूषण (Pollution) पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों के अनुसार, मौसम में हल्के से बदलाव के साथ प्रदूषण (Pollution) का इस कदर बढ़ना बड़े खतरे का संकेत हैं. समय रहते प्रदूषण (Pollution) को रोकने के प्रबंध नहीं किए गए तो राजधानी में रहने वालों के लिए सांस लेना दूभर हो सकता है. वहीं, दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश और हरियाणा में धान की फसल कटने को तैयार है. जैसा कि बीते सालों में देखा गया है कि धान की फसल कटने के बाद दोनों राज्यों में किसान पराली को जला देते हैं. यदि इस वर्ष किसानों को समय रहते पराली जलाने से नहीं रोका गया तो दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लोगों के लिए सांस लेना बेहद मुश्किल भरा हो सकता है. गनीमत है कि इस बार उत्तर प्रदेश सरकार ने इस समस्या को लेकर समय रहते न केवल कदम उठाया है, बल्कि पराली जलाने वाले किसानों पर जुर्माना लगाने की घोषणा भी की है.

पराली भी खतरा
वहीं, प्रदूषण (Pollution) की मार को कम करने के लिए पर्यावरण प्रदूषण (Pollution) नियंत्रण प्राधिकरण भी सक्रिय हो गया है. प्राधिकरण ने एहतियातन, पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में डीजल से चलने वाले जनरेटर के प्रयोग पर रोक लगा दी है. बीते वर्षों तक यह रोक सिर्फ दिल्ली तक ही सीमित रहती थी, लेकिन इस बार इस प्रतिबंध के दायरे को दिल्ली से बढ़ा कर गाजियाबाद, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद, गुरुग्राम, सोनीपत, पानीपत और बहादुरगढ़ सहित अन्य शहरों तक बढ़ा दिया गया है. डीजल इंजन के विकल्प के तौर पर प्राकृतिक गैस से चलने वाले जनरेटर को लाया गया है. हाल में ही, नोएडा की 5 सोसाइटी में पीएनजी गैस से चलते वाले इन जनरेटर्स को लगाया गया है.
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सुधार करना जरूरी
क्लीन एयर एशिया इंडिया (Clean Air Asia India) की रिसर्चर (Environment Researcher) रुचि तोमर (Ruchi Tomar) के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर की एयर क्वालिटी साल 2017 की अपेक्षा इस वर्ष 25 प्रतिशत तक का सुधार आया है. इस सुधार के बावजूद मौजूदा एयर क्वालिटी हमारे स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित नहीं हैं. जब तक दिल्ली के मौजूदा प्रदूषण (Pollution) स्तर को 55 फीसदी तक कम नहीं किया जाता है, तब तक यहां की हवा हमारे स्वास्थ्य के लिए अनुकूल नहीं बनेगी. उन्होंने बताया कि इसके लिए न केवल सरकार, बल्कि दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लोगों को भी कुछ प्रयास करने पड़ेंगे. जिसके तहत, सार्वजनिक वाहनों के इस्तेमाल के साथ घर में पेड़-पौधों की अधिक से अधिक मौजूदगी हवा में प्रदूषण (Pollution) के बढ़ते खतरे से लोगों को थोड़ी राहत दिला सकती है.

बरतें सावधानी
इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल (Indraprastha Apollo Hospital) के डॉ. राजेश चावला (Dr. Rajesh Chawla) के अनुसार, फिलहाल अस्पतालों में प्रदूषण (Pollution) के चलते बीमार होने वाले मरीजों की संख्या बहुत अधिक नहीं है, लेकिन समय रहते प्रदूषण (Pollution) से निपटने के इंतजाम नहीं किए गए तो आगामी दो महीनों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं. उन्होंने बताया कि प्रदूषण (Pollution) से होने वाले बीमारियां आपके शरीर में तुरंत असर नहीं दिखाती है, बल्कि आपको धीरे-धीरे बहुत अधिक बीमार बना देती हैं. प्रदूषण (Pollution) के चलते होने वाली बीमारियों का असर अक्सर हमें दो से तीन साल में देखने को मिलता है. लिहाजा, इस मौसम में आप स्वस्थ भी हैं तो प्रदूषण (Pollution) से बचाव को लेकर लापरवाह नहीं होना चाहिए.

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First published: October 10, 2019, 2:23 PM IST
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