कैलाश मानसरोवर यात्रा: कांग्रेस की 'मुस्लिम पार्टी' वाली छवि तोड़ना चाहते हैं राहुल गांधी?

राहुल गांधी को यह चिंता है कि कहीं बीजेपी 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को हिंदू विरोधी पार्टी साबित करने में कामयाब न हो जाए. इसलिए वो न सिर्फ मंदिरों में जा रहे हैं बल्कि कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर भी निकल गए हैं!

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: September 1, 2018, 7:48 AM IST
कैलाश मानसरोवर यात्रा: कांग्रेस की 'मुस्लिम पार्टी' वाली छवि तोड़ना चाहते हैं राहुल गांधी?
अपनी कैलाश मानसरोवर यात्रा के बहाने क्या संदेश देना चाहते हैं राहुल गांधी?
ओम प्रकाश
ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: September 1, 2018, 7:48 AM IST
अपने वादे के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकल गए हैं. इसके साथ ही उनकी यात्रा को लेकर तरह-तरह के सवाल भी उठने शुरू हो गए हैं. यह हिंदुओं का प्रमुख तीर्थ स्थल है, इसलिए उनकी इस यात्रा के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं, क्योंकि कांग्रेस पर अक्सर मुस्लिम परस्त होने के आरोप लगते रहते हैं. हाल ही उस पर मुस्लिमों की पार्टी होने के आरोप लगाए गए थे.

राजनीति के जानकारों का कहना है कि राहुल गांधी 2019 में नरेंद्र मोदी को चुनौती देने के लिए सॉफ्ट हिंदुत्व और सेकुलरिज्म का कॉकटेल बनाने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन इस वक्त सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या वो वाकई इस यात्रा से बीजेपी के हिंदू वोटबैंक में सेंध लगा पाएंगे?

कांग्रेस ने राहुल गांधी को भगवान शंकर का अनन्य भक्त बताया है. राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक राहुल गांधी को चिंता है कि कहीं भारतीय जनता पार्टी  2019 के लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस को हिंदू विरोधी पार्टी साबित करने में कामयाब न हो जाए. उन्होंने गुजरात और कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान मंदिरों की यात्रा की. जब इस पर बीजेपी ने सवाल उठाया तो खुद को ‘जनेऊधारी हिंदू’ बताया. ‘शिवभक्त’ कहा.

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लेकिन बाद में इफ्तार पार्टी भी दी. उनकी पार्टी के नेता शशि थरूर ने ‘हिंदू पाकिस्तान’ वाला बयान दिया. सियासी जानकारों का कहना है कि कांग्रेस 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले इफ्तार के बहाने मुस्लिम समाज को संदेश दे चुकी है. इसलिए अब जनेऊधारी शिवभक्त की संभावित कैलाश मानसरोवर यात्रा हिंदुओं को जोड़ने का हिस्सा मानी जा सकती है.

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राहुल गांधी लगातार जनता में ये संदेश देना चाहते हैं कि वो समर्पित हिंदू हैं. इस यात्रा के बहाने पार्टी यह बताना चाहती है कि हिंदू-मुस्लिम दोनों उसके एजेंडे में हैं और वो किसी भी धर्म विशेष की तरफ झुकी नहीं है.
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'जो राहुल कर रहे हैं उस नीति पर पहले चल चुकी है कांग्रेस'

दिल्ली यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर सुबोध कुमार का मानना है "राहुल गांधी जो सॉफ्ट हिंदुत्व और सेकुलरिज्म का घालमेल करने की कोशिश कर रहे हैं उस नीति पर कांग्रेस पहले ही चल चुकी है. लेकिन मंडल-कमंडल की राजनीति शुरू होने के बाद कांग्रेस का खेल खराब हो गया. 'मंडल' चला गया क्षेत्रीय पार्टियों में और 'कमंडल' चला गया बीजेपी में."

कुमार के मुताबिक "हिंदुत्व का वोटबैंक बीजेपी के साथ है. मुस्लिम और दलित भी किसी न किसी अंब्रेला के नीचे हैं. अभी बीजेपी ने कोई ऐसी गलती नहीं की है कि ब्राह्मणों, ठाकुरों का झुकाव कांग्रेस की तरफ हो जाए और सपा-बसपा जैसी पार्टियों ने कोई गलती नहीं की है कि दलित और मुस्लिम कांग्रेस की तरफ आ जाएं. ऐसे में मुझे नहीं लगता कि अब राहुल गांधी कोशिश सफल होगी. उनकी सफलता इसी में है कि वो मोदी विरोधी कितनी पार्टियों को एकत्र कर लेते हैं."

हिंदू वोटों को लेकर छटपटाहट!

सोनिया गांधी ने कुछ दिन पहले 2014 के चुनाव में अपनी पार्टी की हार के लिए सबसे बड़े कारण का खुलासा किया था. मुंबई में एक टीवी कार्यक्रम के दौरान सोनिया ने कहा कि 2014 लोकसभा चुनाव से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस को हिंदू विरोधी पार्टी साबित करने में कामयाब रही. अब सोनिया के बेटे राहुल गांधी को सफाई देनी पड़ रही है कि कांग्रेस सिर्फ मुसलमानों की पार्टी नहीं है.

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कांग्रेस की इमेज पिछले कुछ वर्षों में इस तरह की बनी है कि उसे ‘हिंदू-मुस्लिम’ पर सफाई देनी पड़ रही है. सवाल यह उठता है कि आखिर कांग्रेस पर लग रहे आरोपों में सच्चाई कितनी है. क्या कांग्रेस वाकई हिंदू विरोधी पार्टी है? या वो मुस्लिमों की पार्टी है? कांग्रेस को हिंदू विरोधी बताने वाले लोग, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ.मनमोहन सिंह के उस बयान का उदाहरण देते हैं जिसमें उन्होंने कहा था कि देश के स्रोतों पर पहला हक अल्पसंख्यकों का है.

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एक तरफ कांग्रेस पर ‘मुस्लिम पार्टी’ होने का आरोप लगता है तो दूसरी ओर आंकड़े बताते हैं कि विभिन्न राज्यों में कांग्रेस को 321 बार सरकार बनाने का मौका मिला है. लेकिन उसने सिर्फ 8 बार मुस्लिम मुख्यमंत्री बनाए. उसमें से भी तीन सीएम तो मुस्लिम बहुल जम्मू-कश्मीर के हैं. यानी मुख्यमंत्री बनाने के मामले में कांग्रेस ने 17 फीसदी आबादी को सिर्फ 2.4 फीसदी का प्रतिनिधत्व दिया है. देश में अब तक एक भी मुस्लिम प्रधानमंत्री नहीं हुआ, जबकि नौ बार कांग्रेस का पीएम बना.

अब सवाल ये है कि मानसरोवर यात्रा के जरिए क्या राहुल गांधी कांग्रेस की इमेज ऐसी बना पाएंगे वो मुस्लिम परस्त नहीं है या वो हिंदू विरोधी नहीं है? राजनीति के जानकारों का कहना है कि कांग्रेस हिंदू-मुस्लिम दोनों को साधे रखने की नीति पर चल रही है, लेकिन इस यात्रा का शायद ही कोई राजनीतिक लाभ मिले.

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‘24 अकबर रोड’ के लेखक रशीद किदवई कहते हैं “धामिर्क अस्था निजी मामला होता है. यदि कांग्रेस इसे सियासी तौर पर इस्तेमाल करना चाहती है तो ऐसा संभव नहीं हो पाएगा. मुझे इस यात्रा का कोई राजनीतिक लाभ होते नहीं दिख रहा है.”

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कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा "भाजपा भगवान शंकर के अनन्य भक्त राहुल गांधी और भोले के बीच बाधा डालने का प्रयास कर रही है, यह दुर्भाग्यपूर्ण है. शायद भाजपा के लोग जानते नहीं कि भोले शंकर और उनके भक्तों के बीच जो बाधा डालता है वो पाप और श्राप दोनों का भागीदार बन जाता है."
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