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रामलीला के मंच पर राजनीति लीला नहीं होनी चाहिए: मनोज तिवारी

Rachna Upadhyay | News18Hindi
Updated: October 7, 2019, 4:59 PM IST
रामलीला के मंच पर राजनीति लीला नहीं होनी चाहिए: मनोज तिवारी
हाल ही में दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष मनोज तिवारी अपने संसदीय क्षेत्र की कई राम लीलाओं और दुर्गा पूजा पंडालों में पहुंचे.

हाल ही में दिल्ली (Delhi) बीजेपी (BJP) अध्यक्ष मनोज तिवारी (Manoj Tiwari) अपने संसदीय क्षेत्र की कई राम लीलाओं और दुर्गा पूजा पंडालों में पहुंचे.

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  • Last Updated: October 7, 2019, 4:59 PM IST
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दिल्ली. इन दिनों जहां एक तरफ पूरा देश मां दुर्गा के रंग में रंगा हुआ नजर आ रहा है, वहीं दूसरी तरफ राम मय भी दिख रहा है. जगह-जगह रामलीला (Ram Leela) का मंचन हो रहा है और जगह-जगह मां दुर्गा की विराजमान प्रतिमाएं पंडालों की शोभा बढ़ा रही हैं. वहीं हाल ही में दिल्ली (Delhi) बीजेपी (BJP) अध्यक्ष मनोज तिवारी (Manoj Tiwari) अपने संसदीय क्षेत्र की कई राम लीलाओं और दुर्गा पूजा पंडालों में पहुंचे. उन्होंने रामलीला के संवाद बोलकर, तो कहीं भगवान राम की महिमा काव्यात्मक पाठ कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई.

राम नाम मणि दीप की तरह
श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मनोज तिवारी ने कहा कि राम नाम तो मणिदीप की तरह है, जो कभी बुझता ही नहीं है. जैसे दीपक को चौखट पर रख देने से घर के अंदर और बाहर दोनों हिस्से प्रकाशित हो जाते हैं, वैसे ही राम नाम को जपने से अंतःकरण और बाहरी आचरण दोनों प्रकाशित हो जाते हैं. जीवन में आनंद ही आनंद हो जाता है.

श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मनोज तिवारी ने कहा कि राम नाम तो मणिदीप की तरह है जो कभी बुझता ही नहीं है.


उन्होंने कहा कि शास्त्रों में ऐसा माना गया है कि प्रभु श्री राम का नाम लिखना या बोलना भवसागर से पार तो लगाता ही है, लोकिन इसके साथ ही मनुष्य को समस्त प्रकार के दैहिक, दैविक एवं भौतिक तापों से मुक्ति प्रदान करता है. धर्म शास्त्रों के अनुसार, राम का नाम अमोघ है. इसमें ऐसी शक्ति है, जो इस संसार के तो क्या, परलोक के संकट काटने में भी सक्षम है. ऐसा भी माना गया है कि अंतिम समय में राम का नाम लेने वाला व्यक्ति मोक्ष को प्राप्त होता है.

भगवान राम का हर आदर्श हमारे लिए अनुकरणीय है
मनोज तिवारी ने कहा कि अनादि काल से भारतीय परंपरा में राम लीलाओं का शुमार है और रामलीलाओं में हमारे आदर्श जीवन का साक्षात दर्शन होता है, भगवान राम आदर्श व्यक्तित्व के प्रतीक हैं. परिदृश्य अतीत का हो या वर्तमान का, जनमानस ने रामजी के आदर्शों को खूब समझा-परखा है, लेकिन भगवान राम की प्रासंगिकता को संक्रमित करने का काम भी किया है.
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कहा कि रामजी का पूरा जीवन आदर्शों, संघर्षों से भरा पड़ा है, उसे अगर सामान्यजन अपना ले तो उसका जीवन स्वर्ग बन जाए.


उन्होंने कहा कि रामजी का पूरा जीवन आदर्शों, संघर्षों से भरा पड़ा है, उसे अगर सामान्यजन अपना ले तो उसका जीवन स्वर्ग बन जाए. राम सिर्फ एक आदर्श पुत्र ही नहीं, आदर्श पति और भाई भी थे. जो व्यक्ति संयमित, मर्यादित और संस्कारित जीवन जीता है, निःस्वार्थ भाव से उसी में मर्यादा पुरुषोत्तम राम के आदर्शों की झलक परिलक्षित हो सकती है. राम के आदर्श लक्ष्मण रेखा की उस मर्यादा के समान है, जो लांघी तो अनर्थ ही अनर्थ और सीमा की मर्यादा में रहे तो खुशहाल और सुरक्षित जीवन. इसलिए भगवान राम का हर आदर्श हमारे लिए अनुकरणीय है.

रामलीला के मंच पर राजनीति लीला नहीं होनी चाहिए
मनोज तिवारी ने कई रामलीला समितियों से राम लीला में वीआईपी कल्चर पर ऐतराज व्यक्त किया और दर्शकों के बीच जाकर बैठ गए. उन्होंने कहा कि मैं खुद भी रामलीला करता रहा हूं इसलिए मुझे पता है कि जब मंच पर नेताओं का घंटों स्वागत होता है तब कलाकारों और श्रद्धालुओं को कितनी तकलीफ होती है. रामलीला के मंच पर राजनीति लीला नहीं होनी चाहिए और नेताओं का स्वागत मंच के नीचे जनता के बीच ही होना चाहिए. उन्होंने कहा कि मैं मां दुर्गा से प्रार्थना करता हूँ कि वो दिल्ली को खुशहाल और समृद्ध बनाएं.

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First published: October 7, 2019, 4:40 PM IST
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