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जन्मदिन विशेष: किसानों के लिए PM नरेंद्र मोदी के बड़े काम, सहयोग, सम्मान और दाम!

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: September 17, 2019, 12:11 PM IST
जन्मदिन विशेष: किसानों के लिए PM नरेंद्र मोदी के बड़े काम, सहयोग, सम्मान और दाम!
प्रधानमंत्री का कृषि और किसान दोनों को आगे बढ़ाने पर फोकस है (File Photo)

पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi ) की कोशिश से भारत के इतिहास में पहली बार दिया गया किसानों (Farmers) को पद्मश्री, पहली बार अन्नदाताओं के अकाउंट केंद्र से सीधे पहुंचा खेती के लिए पैसा!

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  • Last Updated: September 17, 2019, 12:11 PM IST
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नई दिल्ली. आज यानी 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन (Prime Minister Narendra Modi Birthday) है. आज हम बात करेंगे अन्नदाताओं (किसानों) के लिए किए जाने वाले उनके काम की. साल 2014 में सरकार बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने किसानों के मुद्दों को सबसे ऊपर रखा. उनकी कोशिशों से किसान (Farmers) लगातार बहस के केंद्र में है. उनका फोकस कृषि (Agriculture) और किसान दोनों की उन्नति पर है. खेती-किसानी को लेकर उनकी दिलचस्पी इसी बात से दिखती है कि उन्होंने कृषि बजट में पिछले साल के मुकाबले रिकॉर्ड 140 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी है. वर्ष 2019-20 में खेती-किसानी के लिए कृषि मंत्रालय को 1,30,485 करोड़ रुपये का बजट (Agriculture Budget) दिया है. किसानों को सहयोग, उनके सम्मान और फसल के दाम, तीन बातों पर जोर देकर योजनाएं बनाई हैं.

पीएम ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए 2016 में फामर्स इनकम डबलिंग कमेटी का गठन किया. इस कमेटी ने एक लॉन्ग टर्म प्रोग्राम बनाया. पहला कैसे प्रोडक्टिविटी बढ़ाई जाए. दूसरा उत्पादन लागत कम कैसे हो. तीसरा मार्केट की उपलब्‍धता बढ़े और चौथा उचित मूल्य मिले. इन्हीं पहलुओं पर सरकार काम कर रही है. बीजेपी प्रवक्ता राजीव जेटली का कहना है कि पीएम मोदी की मंशा सभी किसानों को आगे बढ़ाने की है. इसलिए अब देश में जो भी योजनाएं बन रही हैं वो छोटे-बड़े सभी 14.5 करोड़ किसान परिवारों के लिए बन रही हैं.

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पीएम ने गोरखपुर से किसानों के लिए सबसे बड़ी स्कीम लांच की (File Photo)


सहयोग

मोदी सरकार ने पहली बार किसानों के अकाउंट में सीधे पैसा भेजने की शुरुआत की, ताकि उसमें भ्रष्टाचार का दीमक न लगे. देश के सभी किसान परिवारों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (Pradhan Mantri kisan Samman Nidhi Scheme) के तहत खेती करने के लिए 6000-6000 रुपये सीधे उनके बैंक खाते में भेजा जा रहा है. इस स्कीम पर 87,217.50 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं. जितनी भी योजनाएं बन रही हैं अधिकांश का लाभ अब सीधे किसानों के बैंक अकाउंट में भेजने का प्लान है. पीएम मोदी से ही सीख लेकर झारखंड सरकार अपने लघु एवं सीमांत किसानों को सालाना 25 हजार रुपये तक का सहयोग दे रही है.

जिस पर होती थी जेल, उस काम के लिए अब पैसा

किसानों को कर्ज से उबारकर उनकी आय दोगुनी करने के लिए पीएम मोदी ने किसानों को बांस की खेती करने की अनुमति दी. कांग्रेस के शासन में बांस काटने पर फॉरेस्ट एक्ट लगता था. किसान को जेल हो जाती थी, फॉरेस्ट अधिकारी और पुलिस किसान को परेशान करते थे. लेकिन अब उसे बांस की खेती और उससे संबंधित उत्पादों का बिजनेस करने का मौका मिल रहा है. यही नहीं इसकी व्यापक पैमाने पर खेती के लिए राष्ट्रीय बैम्बू मिशन भी बनाया है. जिसके तहत किसान को इसकी खेती के लिए प्रति पौधा 120 रुपये की सरकारी सहायता भी मिलेगी.
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पीएम ने किसानों को डायरेक्ट लाभ देने की परंपरा शुरू की


24 लाख रुपये तक की मदद

खेती-किसानी में विज्ञान का दखल लगातार बढ़ रहा है. खेती करना आसान बनाने के लिए कृषि यंत्रों की जरूरत है. लेकिन यंत्र महंगे हैं. हर किसान इसे खरीद नहीं सकता. इसलिए मोदी सरकार की पहल से काम आसान हो गया है. एक स्कीम बनाई गई है जिसमें कृषि मशीनरी बैंक बनाने के लिए 24 लाख रुपये तक की आर्थिक मदद मिलेगी. इसे कस्टम हायरिंग सेंटर कहते हैं. सरकार 40 फीसदी पैसा खुद लगा रही है. 60 लाख रुपये तक का प्रोजेक्ट पास करवा सकते हैं. देश में अब तक 20 हजार से अधिक कृषि यंत्र बैंक बन चुके हैं.

सम्मान

नरेंद्र मोदी सरकार ने न सिर्फ किसानों की आय दोगुनी करने का संकल्प लिया बल्कि उन्हें मान-सम्मान भी दिलाया. पहली बार किसान सम्मान लेने राष्ट्रपति भवन पहुंचा. वो भी विशुद्ध किसान. मोदी सरकार ने खेती-किसानी करने वाले 11 लोगों को देश का चौथा बड़ा नागरिक सम्मान पद्मश्री दिया. इससे खेती-किसानी में कुछ नया काम करने की स्पर्धा बढ़ेगी.

पेंशन

किसानों के मान-सम्मान के लिए पहली बार किसान पेंशन (मानधन) स्कीम शुरू की गई. अब तक तमाम किसानों के बुढ़ापे का कोई सहारा नहीं होता था. अब किसान 60 की उम्र पूरी होने के बाद हर माह 3 हजार रुपये पेंशन पाएगा. सरकार तीन वर्ष में अपने अंशदान के रूप में 10,774.50 करोड़ रुपये की राशि खर्च करेगी.

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आजादी के बाद पहली बार किसानों को पद्मश्री दिया गया (फाइल फोटो)


साहूकार से मुक्ति दिलाने की कोशिश

किसान आम तौर पर खेती के लिए साहूकारों से कर्ज लेते रहे हैं. वो इस दुष्चक्र में फंसकर आत्महत्या कर लेते थे, लेकिन मोदी सरकार ने इसकी काट निकाल ली है. ताकि किसान का मान-सम्मान बचा रहे और उसे खेती के लिए पैसा आसानी से मिले. सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड की कवरेज बढ़ाने के लिए बैंकों को आदेश दिए हैं कि वो गांव-गांव में कैंप लगाएं. वहीं पर इसके लिए आवेदन लें. सिर्फ 15 दिन में कार्ड बनाकर दें. किसानों के कर्ज के लिए फंड बढ़ाकर 11 लाख करोड़ रुपये किया गया है. किसानों को 4 फीसदी की दर पर कर्ज मिल रहा है.

दाम

नरेंद्र मोदी ने कृषि मंत्रालय का नाम किसान कल्याण मंत्रालय कर दिया ताकि अधिकारियों के माइंडसेट में भी बदलाव आए. कितनी उपज हुई यह महत्वपूर्ण है लेकिन उससे भी महत्वपूर्ण यह है कि किसान को लाभ कितना मिला. इसलिए मोदी ने स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक किसानों को उनकी लागत से डेढ़ गुना मूल्य देने का वादा पूरा किया. खरीद बढ़ाई.

लागत कम करने की कोशिश

सॉयल हेल्थ कार्ड (Soil Health Card) और नीम कोटेड यूरिया के जरिए सरकार उत्पादन लागत कम कर रही है. देश के लगभग सभी किसान परिवारों को यह कार्ड मिल चुका है. जहां-जहां पर सॉयल हेल्थ कार्ड के हिसाब से खाद का इस्तेमाल हुआ है. नीम कोटेड यूरिया का इस्तेमाल हुआ है वहां-वहां पर प्रोडक्टिविटी बढ़ी है और प्रोडक्शन कॉस्ट में कमी आई है.

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2014 में पीएम बनने के बाद से लगातार किसानों पर फोकस


मार्केटिंग सुधार

मार्केटिंग में सुधार का कार्यक्रम भी जारी है. बाजार विकसित करने का काम जारी है. जब किसान को नजदीक में बाजार मिलेगा तभी उसे फायदा मिलेगा. सरकार ने अब तक देश की 585 मंडियों को ई-नाम (राष्ट्रीय कृषि बाजार योजना) के तहत जोड़ दिया है. ई-नाम एक इलेक्ट्रॉनिक कृषि पोर्टल है. जो पूरे भारत में मौजूद कृषि उत्पाद विपणन समितियों को एक नेटवर्क में जोड़ने का काम करती है. इसका मकसद सभी कृषि उत्पादों को एक बाजार उपलब्ध करवाना है.

धरती को बचाने की कोशिश

खेती-किसानी को लेकर मोदी सरकार की संजीदगी इसी से दिखती है कि पूरी दुनिया बंजर भूमि की समस्या से परेशान है, और इससे निपटने के लिए भारत वर्ल्ड लीडर बनने का काम कर रहा है. पिछले सप्ताह ही दुनिया के करीब दो सौ देशों के वैज्ञानिकों और कृषि से जुड़े लोगों ने ग्रेटर नोएडा में इस बात पर मंथन किया है कि कैसे बंजर भूमि को उपजाऊ बनाकर उसमें खेती की जाए. प्रधानमंत्री ने अगले एक दशक में 2.6 करोड़ हेक्टेयर बंजर जमीन को उपजाऊ बनाने का लक्ष्य रखा है.

खेती में जोखिम कम करने की कवायद

किसानों की एक बड़ी समस्या है उत्पाद का उचित दाम न मिलने की. आलू, प्याज और टमाटर उगाने वाले किसानों का ये दर्द किसी से छिपा नहीं है. इस परेशानी से निजात दिलाने के लिए मोदी सरकार ने कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग एक्ट बनाया है. इससे किसान को जीरो जोखिम होगा. निजी कंपनियों और किसानों को साथ लाकर खेती को लाभकारी बनाने की कोशिश है. फसल उगाने से पहले ही रेट तय हो जाएगा. निजी कंपनियों से जिस रेट पर कॉन्ट्रैक्ट होगा, किसान को उतना पैसा मिलने की गारंटी होगी. निजी कंपनियां बुआई के समय ही किसानों से एग्रीमेंट करेंगी कि वो फसल किस रेट पर लेंगी.

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First published: September 17, 2019, 11:39 AM IST
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