क्या कांग्रेस को इफ्तार से मिलेगी सियासी रफ्तार, विपक्षी एकता को धार?

मंदिर-मठों में घूमने, खुद को शिवभक्त और जनेऊधारी ब्राह्मण कहने के बाद क्या कांग्रेस इफ्तार के बहाने 2019 में मोदी को चुनौती देने के लिए सॉफ्ट हिंदुत्व और सेकुलरिज्म का कॉकटेल बना रही है?

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: June 13, 2018, 12:46 PM IST
क्या कांग्रेस को इफ्तार से मिलेगी सियासी रफ्तार, विपक्षी एकता को धार?
क्या इफ्तार से पूरी होगी राहुल गांधी की सियासी मंशा?
ओम प्रकाश
ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: June 13, 2018, 12:46 PM IST
कांग्रेस दो साल बाद आज दिल्ली के होटल ताज में इफ्तार पार्टी का आयोजन कर रही है. इसमें विपक्ष के बड़े चेहरों को आमंत्रित किया गया है. इससे पहले सोनिया गांधी ने डिनर पार्टी ने दी थी. इफ्तार के बहाने विपक्ष को एकजुट करने का यह राहुल गांधी का पहला प्रयास है. यह गौर करने वाली बात ये है कि कांग्रेस राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी के तौर पर प्रमोट करना चाहती है जबकि सपा, बसपा और इनेलो जैसे कुछ दल मायावती के नाम आगे बढ़ा रहे हैं. ममता बनर्जी भी उनके नाम पर सहमत नहीं दिख रही हैं. ऐसे में असली सवाल ये है कि क्या इफ्तार के बहाने कांग्रेस को बीजेपी विरोधी पार्टियों से कोई फायदा मिलेगा या विपक्ष पहले से अधिक मजबूत हो पाएगा?

बीजेपी की नजर इस पार्टी पर लगी हुई है. इसीलिए उसके प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा है कि जितने लोगों को बुलाया गया है, उनमें एक दूसरे के बारे में काफी अदावत है, ऐसे में कितना इकरार होगा और कितनी तकरार होगी? जिसका रोजा से कोई मतलब नहीं है वो इफ्तार दे तो यह सियासत है. यह पार्टी मजहबी नहीं सियासी है. किसी ने प्रधानमंत्री पद के लिए अभी राहुल गांधी को स्वीकार नहीं किया है. वो सवाल कर रहे हैं कि गठबंधन की एकता के लिए पार्टी करनी है तो क्या उसे इफ्तार का मुखौटा पहनाना जरूरी है?

राहुल गांधी, Rahul Gandhi, इफ्तार पार्टी, Iftar party, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, Congress president Rahul Gandhi, सोनिया गांधी, sonia gandhi, opposition unity, विपक्षी एकता, BJP, Congress, बीजेपी, कांग्रेस, 2019 Lok Sabha elections, 2019 लोकसभा चुनाव, soft Hindutva, सॉफ्ट हिंदुत्व, temple visits, राहुल गांधी की मंदिर यात्रा, Secularism, सेक्युलिज्म, mayawati,PM candidate of the 2019 Lok Sabha elections, mamta banerjee, ममता बनर्जी, जेडीएस, jds, बीएसपी, BSP, SP, समाजवादी पार्टी,        राहुल गांधी का टेंपल रन (file photo)

फिलहाल तो राजनीतिक गलियारों में यह पार्टी चर्चा का केंद्र बनी हुई है. कुमार स्वामी के शपथ ग्रहण के बाद यह पहला मौका होगा जब सभी विपक्षी दल एक साथ खड़े दिख सकते हैं. छोटे दल लगातार कांग्रेस पर दबाव बना रहे हैं. केसीआर, ममता बनर्जी जैसे कई नेता ऐसे फेडरल फ्रंट की बात कर रहे हैं जो गैर भाजपाई और गैर कांग्रेसी हो. ऐसे में देखना ये होगा कि इफ्तार के बहाने कांग्रेस ने जो ख्वाब पाल रखे हैं वो पूरे होते हैं या नहीं?

क्या ये संदेश देने की है कोशिश?

सियासी जानकारों का कहना है कि ये पार्टी 2019 लोकसभा चुनाव से पहले मुस्लिम समाज को संदेश देने की कोशिश भी है. कांग्रेस ने इससे पहले 2015 में इफ्तार दिया था. राहुल गांधी गुजरात और कर्नाटक चुनाव में मंदिरों और मठों में भटके हैं. खुद को कभी शिवभक्त और कभी जनेऊधारी ब्राह्मण बताया है. इससे कांग्रेस पर सॉफ्ट हिंदुत्व की तरफ झुकने की इमेज बन रही है. ऐसे में इस पार्टी के सहारे पार्टी यह बताना चाहती है कि मुस्लिम उसके एजेंडे में हैं और वो किसी भी धर्म विशेष की तरफ झुकी नहीं है.


तो क्या 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनौती देने के लिए कांग्रेस सॉफ्ट हिंदुत्व और सेकुलरिज्म का कॉकटेल बना रही है? कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी का कहना है कि अगर कोई शिवभक्त रोजा इफ्तार दे रहा है तो दिक्कत क्या है? कांग्रेस हर साल इफ्तार पार्टी रखती है. पिछले साल किसी वजह से नहीं रख पाई थी. कांग्रेस पार्टी सर्वधर्म सम्मान करती है. सभी त्योहार मनाती है. बीजेपी सिर्फ एक ही धर्म को मानती है.

बताया गया है कि पार्टी में आमंत्रित लोगों में उन सभी बड़े राजनेताओं और पार्टियों के नाम शामिल हैं जिन्हें सोनिया गांधी ने डिनर पर बुलाया था. इसलिए इसे विपक्षी 'महागठबंधन' बनाने की कोशिश के रूप में देखा जाएगा. राहुल गांधी विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश करेंगे ताकि 2019 के आम चुनाव के लिए महागठबंधन पर व्यापक सहमति तैयार हो सके.

'जो राहुल कर रहे हैं उस नीति पर पहले चल चुकी है कांग्रेस'
दिल्ली यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर सुबोध कुमार का मानना है "राहुल गांधी जो सॉफ्ट हिंदुत्व और सेकुलरिज्म का घालमेल करने की कोशिश कर रहे हैं उस नीति पर कांग्रेस पहले ही चल चुकी है. लेकिन मंडल-कमंडल की राजनीति शुरू होने के बाद कांग्रेस का खेल खराब हो गया. 'मंडल' चला गया क्षेत्रीय पार्टियों में और 'कमंडल' चला गया बीजेपी में."

राहुल गांधी, Rahul Gandhi, इफ्तार पार्टी, Iftar party, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, Congress president Rahul Gandhi, सोनिया गांधी, sonia gandhi, opposition unity, विपक्षी एकता, BJP, Congress, बीजेपी, कांग्रेस, 2019 Lok Sabha elections, 2019 लोकसभा चुनाव, soft Hindutva, सॉफ्ट हिंदुत्व, temple visits, राहुल गांधी की मंदिर यात्रा, Secularism, सेक्युलिज्म, mayawati,PM candidate of the 2019 Lok Sabha elections, mamta banerjee, ममता बनर्जी, जेडीएस, jds, बीएसपी, BSP, SP, समाजवादी पार्टी,          क्या इफ्तार में दिखेगी विपक्षी एकता? (file photo)

कुमार के मुताबिक "हिंदुत्व का वोटबैंक बीजेपी के साथ है. मुस्लिम और दलित भी किसी न किसी अंब्रेला के नीचे हैं. अभी बीजेपी ने कोई ऐसी गलती नहीं की है कि ब्राह्मणों का झुकाव कांग्रेस की तरफ हो जाए और सपा-बसपा जैसी पार्टियों ने कोई गलती नहीं की है कि दलित और मुस्लिम कांग्रेस की तरफ आ जाएं. ऐसे में मुझे नहीं लगता कि अब राहुल गांधी कोशिश सफल होगी. उनकी सफलता इसी में है कि वो मोदी विरोधी कितनी पार्टियों को एकत्र कर लेते हैं."
पूरी ख़बर पढ़ें
अगली ख़बर