Assembly Elections 2018: पांच राज्यों के परिणाम तय करेंगे लोकसभा चुनाव की दिशा!

राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में लोकसभा की 83 सीटें हैं, जिनमें से 61 पर बीजेपी का कब्जा है जबकि कांग्रेस के पास सिर्फ 9 सीटें हैं, क्या विधानसभा चुनाव का परिणाम लोकसभा का समीकरण भी बदलेगा?

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: December 9, 2018, 7:11 AM IST
Assembly Elections 2018: पांच राज्यों के परिणाम तय करेंगे लोकसभा चुनाव की दिशा!
2019 के आम चुनाव पर कितना असर डालेंगे पांच राज्यों के परिणाम?
ओम प्रकाश
ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: December 9, 2018, 7:11 AM IST
राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम के विधानसभा चुनाव परिणाम कई नजरों से महत्वपूर्ण हैं. इससे 2019 के आम चुनाव की दिशा भी तय होगी. अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही कांग्रेस अगर इन राज्यों में अच्छा प्रदर्शन करती है तो उसका असर संसदीय चुनाव में भी दिख सकता है. दूसरी ओर यदि बीजेपी अपनी अजेय छवि को बरकरार रखती है तो उसके लिए 2019 का रास्ता आसान हो जाएगा. हालांकि, कांग्रेस ने बीजेपी को सत्ता से बेदखल करने के लिए पूरी ताकत लगाई है. लेकिन उसका रिजल्ट क्या आता है ये तो 11 दिसंबर को ही पता चलेगा.

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'24 अकबर रोड' के लेखक एवं राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई के मुताबिक पांच राज्यों के चुनाव परिणाम का असर व्यापक होगा और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को ये निजी तौर पर प्रभावित करेंगे. कांग्रेस अगर दो-तीन राज्यों में चुनाव जीतती है तो यह मैसेज जाएगा कि वो बीजेपी को हरा सकती है. 2019 और उसके बाद प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए राहुल गांधी को राजस्थान के अलावा कुछ और भी चाहिए.

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इन पांच राज्यों की 83 सीटें, 61 पर बीजेपी

इन पांच राज्यों में कुल 83 लोकसभा सीटें हैं. यानी यूपी से भी ज्यादा. इसलिए राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इनमें किसी भी पार्टी की जीत-हार का असर मार्च-अप्रैल में होने वाले 2019 के लोकसभा चुनाव में भी पड़ेगा. इन राज्यों की 61 लोकसभा सीटों पर बीजेपी का कब्जा है, जबकि सिर्फ 9 पर कांग्रेस है. 11 सीटों पर टीआरएस और एक-एक सीट पर एआईएमआईएम और वाईएसआर कांग्रेस के सांसद हैं. (ये भी पढ़ें: Exit Poll 2018: एग्जिट पोल ने और उलझाया जीत का गणित!)

राजस्थान जहां 2014 के आम चुनाव में सभी 25 सीटों पर बीजेपी का कब्जा था वहां उप चुनाव में अलवर और अजमेर सीट कांग्रेस ने उससे छीन ली थी. कभी राजस्थान, एमपी और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का डंका बजा करता था लेकिन 2014 में इनमें वो लगभग साफ हो गई. हालात ये हो गई है कि छोटे-छोटे दल भी कांग्रेस से कन्नी काट रहे हैं. लेकिन जानकारों का कहना है कि अगर इन पांच राज्यों में से दो-तीन में भी कांग्रेस अपनी सरकार बनाती है तो लोग उससे जुड़ने शुरू हो जाएंगे. लोगों की राहुल गांधी और कांग्रेस को लेकर धारणा बदल सकती है.
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ये पांच राज्य ऐसे हैं जिसके चुनावी नतीजे यह बताएंगे कि कांग्रेस बिना सहयोगियों के बीजेपी से मुकाबला कर सकती है या नहीं. एमपी और राजस्थान में बीजेपी और कांग्रेस का सीधा मुकाबला है. बीजेपी एमपी में पिछले डेढ़ दशक से सत्ता में है. इतने साल के सत्ता विरोधी रुख को यदि कांग्रेस कैश करने में कामयाब रही तो उसके लिए 2019 में बीजेपी मुकाबला करना आसान होगा, क्योंकि कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊंचा होगा. वो कह सकती है कि जनता कांग्रेस को बीजेपी के विकल्प के रूप में स्वीकार कर रही है.

लेकिन यदि ऐसा नहीं होता है तो 2019 में उसकी डगर काफी कठिन हो जाएगी. क्योंकि इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट जाएगा. दूसरी ओर मिजोरम में यदि बीजेपी को सफलता मिलती है तो फिर 2019 के लिए वो यह दावा कर सकती है कि पार्टी पूर्वोत्तर की सभी 25 सीटें जीतेगी. (ये भी पढ़ें: क्यों 26 साल पहले बर्खास्त की गई थीं बीजेपी की चार राज्य सरकारें?)

कांग्रेस ने बीजेपी शासित राजस्थान, मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ में सत्ता विरोधी रुख का लाभ उठाने की पूरी कोशिश की है. एग्जिट पोल भी इनमें कांग्रेस को मजबूत बता रहे हैं. इस समय कांग्रेस की सिर्फ चार राज्यों में सरकार है. उसके पास बड़े राज्यों में पंजाब और कर्नाटक (जेडीएस के सहयोग से) बचे हुए हैं. अगर कांग्रेस राजस्थान, एमपी और छत्तीसगढ़ में से किसी प्रदेश को बीजेपी से छीन पाई तो राहुल गांधी के पक्ष में सकारात्मक माहौल बनेगा और उससे गठबंधन करने से बच रहे दलों का भी रवैया बदलेगा.

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राजनीतिक विश्लेषक आलोक भदौरिया का कहना है कि चुनाव अवधारणा और अनिश्चितता का खेल है. इन राज्यों के चुनाव परिणाम से राहुल गांधी से बड़ी चुनौती प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए खड़ी होने वाली है. क्योंकि बीजेपी शासित तीन राज्यों में से एक भी खिसका तो केंद्र के खिलाफ भी जनता में एक धारणा बनेगी, जो 2019 के चुनाव में खतरनाक साबित हो सकती है.

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