अरशद मदनी की 1947 वाली बात पर RSS प्रमुख ने जताई सहमति

नासिर हुसैन | News18Hindi
Updated: September 2, 2019, 5:54 PM IST
अरशद मदनी की 1947 वाली बात पर RSS प्रमुख ने जताई सहमति
मौलाना अरशद मदनी आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से मिलने संघ के दिल्ली स्थित कार्यालय केशव कुंज पहुंचे थे.

बताया जा रहा है कि जैसे ही अरशद मदनी को सहमति का इशारा मिला वैसे ही उन्होंने प्रस्ताव रखा कि आप भी यह ही सोचते हैं और हम भी. लेकिन अब जरूरत है कि बंद कमरों से बाहर आकर इस बात को कहना होगा.

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आरएसएस (संघ) (RSS) प्रमुख मोहन भागवत और मौलाना अरशद मदनी (Arshad Madni) की मुलाकात सोशल मीडिया (Social Media) पर सुर्खियां बटोर रही है. इस मुलाकात के कई मायने तलाशे जा रहे हैं. कोई इसे सकारात्मक पहल बता रहा है तो कोई कुछ और. लेकिन इस बातचीत का एक पहलू यह भी है कि मौलाना अरशद मदनी की 1947 के बंटवारे से जुड़ी एक ऐसी बात है जिस पर संघ प्रमुख ने भी सहमित जताई है.

जमीयत उलमा ए हिन्द के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के मीडिया प्रभारी मौलाना फजर्लुहमान ने न्यूज18 हिन्दी से बातचीत में बताया, 'संघ प्रमुख मोहन भागवत और मौलाना अरशद मदनी के बीच करीब डेढ़ घंटा बातचीत चली थी. इस दौरान कई मामले एक-दूसरे के सामने रखे गए. लेकिन जो सबसे ज्यादा अहम और आज के वक्त के हिसाब से जरूरी बात हुई वो यह थी कि अरशद मदनी ने कहा कि 1947 में मुसलमानों को मजहबी घुट्टी पिलाई गई थी. जिसका नतीजा बंटवारे की शक्ल में हमारे सामने है.'

ठीक उसी तरह से आज एक खास धर्म को मजहबी घुट्टी पिलाई जा रही है. जिसका नतीजा देश के हित में नहीं होगा. मौलाना की इस बात को सुनकर संघ प्रमुख ने कहा कि हम भी तो यह ही कहते हैं. जिस पर मौलाना अरशद ने कहा कि आप और हम एक ही तरह से सोच रहे हैं. लेकिन जरूरत इस बात की है कि जिस बात को आप बंद कमरों में कह रहे हो उसे जनता के बीच आकर कहने की जरूरत है.

संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी रामलाल की मध्यस्ता में एक बार फिर से दोबारा मिल-बैठकर बात करने की सहमति पर दोनों लोग राजी हुए.

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First published: September 2, 2019, 4:14 PM IST
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