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प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ हाई कोर्ट पहुंचे JNU Administration को पड़ी डांट

News18Hindi
Updated: December 13, 2019, 8:05 PM IST
प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ हाई कोर्ट पहुंचे JNU Administration को पड़ी डांट
विश्वविद्यालय का कहना है कि छात्रों ने प्रशासनिक ब्लॉक के 100 मीटर के दायरे में प्रदर्शन किया.

अदालत ने कहा, ‘यह स्तब्धकारी है कि आप अवमानना का मामला दायर करते हैं, लेकिन आपको विद्यार्थियों के बारे में कुछ नहीं पता है. उनमें से एक पिछले साल अवमानना के मामले में दोषी पाया गया था.’

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  • Last Updated: December 13, 2019, 8:05 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को इस बात पर ‘हैरानी’ जतायी कि जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय (JNU) को उन छात्रों की एकेडमिक ब्यौरों की कोई जानकारी नहीं है जिनके खिलाफ उसने अवमानना की याचिका दायर की है. विश्वविद्यालय का कहना है कि छात्रों ने प्रशासनिक ब्लॉक के 100 मीटर के दायरे में प्रदर्शन किया. जज ए. के. चावला ने विश्वविद्यालय से एक हलफनामा दायर करने को कहा है. इसमें उन छात्रों के पाठ्यक्रम, उनकी स्थिति और परिसर में उनके रहने की अवधि की जानकारी देने को कहा गया है जिनके खिलाफ अवमानना की याचिका दायर की गई है.

अदालत मामले पर सुनवाई अगले शुक्रवार को करेगी. अदालत ने कहा, ‘यह स्तब्धकारी है कि आप अवमानना का मामला दायर करते हैं, लेकिन आपको विद्यार्थियों के बारे में कुछ नहीं पता है. उनमें से एक पिछले साल अवमानना के मामले में दोषी पाया गया था.’ जज चावला ने कहा, ‘आपको बस (विद्यार्थियों के) कमरों का क्रमांक ही पता है.’

उससे पहले सुनवाई के दौरान मौजूद जेएनयू के रजिस्ट्रार और अन्य अधिकारी नौ विद्यार्थियों में से एक गीता कुमारी का ब्योरा नहीं दे पाये जिसे विश्वविद्यालय के अनुसार पिछले साल हाई कोर ने प्रशासनिक प्रखंड के समीप प्रदर्शन करने को लेकर दोषी पाया था. अदालत ने कहा, ‘वह कब से वहां ठहरी हुई है? क्या रजिस्ट्रार को यह नहीं जानना चाहिए? क्या यह मूलभूत बात नहीं है?क्या आपको पता है कि वह कौन सा कोर्स कर रही है? नहीं, क्यों नहीं?’ अदालत ने छात्र का ब्योरा मांगा.

उससे पहले जेएनयू की ओर से अदालत में पेश हुई केन्द्र सरकार की स्थायी वकील मोनिका अरोड़ा ने कहा कि छात्रा को पिछले साल अदालत ने उस आंदोलनकारी समूह का हिस्सा बनने को लेकर दोषी ठहराया था जिसने प्रशासनिक खंड जाने का रास्ता रोक दिया था.

अरोड़ा ने कहा कि विश्वविद्यालय के छात्रों और पुलिस के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही करने का अनुरोध किया गया है क्योंकि उन्होंने प्रशासनीक ब्लॉक के 100 मीटर के दायरे में नहीं जाने के हाई कोर्ट के आदेश की अवहेलना की. विश्वविद्यालय ने अपनी याचिका में दावा किया कि छात्रों ने प्रशासनिक ब्लॉक के 100 मीटर के दायरे में प्रदर्शन नहीं करने संबंधी 9 अगस्त, 2017 के अदालती आदेश का पूरी तरह उल्लंघन किया. उसमें दावा किया गया है कि पुलिस ने भी विश्वविद्यालय में कानून-व्यवस्था बनाए रखने से मना करके और कार्रवाई करने में असफल रह कर आदेश का उल्लंघन किया है.

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First published: December 13, 2019, 8:05 PM IST
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