सबसे पहले श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने उठाया था एक देश में दो विधान, दो निशान और दो प्रधान का मसला

श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने ही सबसे पहले एक देश में दो विधान का विरोध किया था. अब बीजेपी ने इसे अपने तरीके से हल करने की कोशिश की है.

RajKumar Pandey | News18Hindi
Updated: August 5, 2019, 5:54 PM IST
सबसे पहले श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने उठाया था एक देश में दो विधान, दो निशान और दो प्रधान का मसला
जम्मू और कश्मीर की बात होने पर बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के ज्यादातर समर्थक जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की विचार धारा से ही चर्चा शुरू करते हैं.
RajKumar Pandey | News18Hindi
Updated: August 5, 2019, 5:54 PM IST
भारतीय जनसंघ के संस्थापक कहे जाने वाले श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 1952 में 'एक देश में दो विधान, दो निशान, दो प्रधान' का विरोध किया था. उन दिनों जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री को प्रधानमंत्री कहा जाता था. साथ ही जम्मू-कश्मीर में भारत के न तो सारे कानून लागू होते थे और न ही राष्ट्रीय चिह्न को मानना वहां जरूरी रहा. प्रधानमंत्री के पद को बाद में तो खत्म कर दिया गया, लेकिन अलग 'निशान और विधान' अभी भी जारी है. बीजेपी ने सोमवार को 370 के बहुत से प्रावधानों को समाप्त करने की दिशा में जो शुरुआत की है, सही मायनों में उसका बीजारोपण 50 के दशक के शुरुआती वर्षों में ही हो गया था.

BJP on article 370 on Jammu and kashmir
संविधान का अनुच्छेद 370 लंबे समय से बहस का मसला रहा है और बीजेपी सरकार ने अब अपने तरीके से इसे हल करने की कोशिश की है.


बहुत छोटी उम्र में वीसी बनाए गए थे

बंगाल के एक संभ्रात घराने में पैदा होने वाले श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने विदेश में पढ़ाई की थी. वह महज 33 साल की उम्र में कलकत्ता विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर बना दिए गए थे. उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरूआत कांग्रेस से ही की थी. कांग्रेस उम्मीदवार के तौर पर वह बंगाल में एमएलसी चुने गए थे. बाद में उन्होंने पद छोड़ दिया और हिंदू महासभा से जुड़ गए. फिर भी गांधी जी और सरदार बल्लभ भाई पटेल के आग्रह पर नेहरू जी ने उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया था. उन्‍हें केंद्र में उद्योग मंत्री बनाया गया था.

नेहरू मंत्रिमंडल छोड़ कर बनाई पार्टी

हालांकि देश में पहली बार लोकसभा चुनाव होने से पहले ही वे कांग्रेस और मंत्रिमंडल से अलग हो गए थे. उन्होंने वर्ष 1951 में जनसंघ की स्थापना की. उस समय उनकी इस नई पार्टी के तीन सांसद जीते जिसमें एक वह खुद भी थे. जनसंघ ही बाद में भारतीय जनता पार्टी के नाम जानी गई. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कश्मीर के बारे में संविधान के प्रावधानों का जोरदार विरोध किया था. उनका विरोध खास तौर पर जम्मू-कश्मीर में प्रवेश के लिए परमिट को लेकर था. उन्होंने इसके विरोध में कश्मीर की यात्रा की. वहां पहुंच कर उन्होंने एक बड़ी रैली भी किया था.

कश्मीर में गिरफ्तारी के बाद हो गई थी मृत्यु
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रैली में उन्होंने कहा था कि एक देश में “दो विधान, दो निशान और दो प्रधान” नहीं हो सकते. उसी दौर में श्यामा प्रसाद मुखर्जी को जम्मू-कश्मीर की तत्कालीन शेख अब्दुल्ला सरकार ने गिरफ्तार कर लिया था. गिरफ्तारी के कुछ ही दिनों बाद 23 जून को उनकी मृत्यु हो गई. भारतीय जनता पार्टी आज भी श्यामा प्रसाद मुखर्जी का नाम आदर के साथ लेती है. पार्टी के नेता कश्मीर की बात होने पर उनका हवाला देते हुए ही अपनी बात रखते हैं. इस बार जब बीजेपी ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले कानून में तब्दीली कर रही है तो उनकी बात और अधिक प्रासंगिक हो जाती है.

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First published: August 5, 2019, 3:25 PM IST
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