राहुल गांधी के मुकाबले सोनिया गांधी की कांग्रेस में जल्द हो रहे फैसले

Ranjeeta Jha | News18Hindi
Updated: August 27, 2019, 10:10 PM IST
राहुल गांधी के मुकाबले सोनिया गांधी की कांग्रेस में जल्द हो रहे फैसले
चुनाव के वक्त पार्टी को इससे होने वाले नुकसान को देखते हुए सोनिया गांधी ने प्रदेश की टीम में कार्यकारी अध्यक्ष का फॉर्मूला लगाया है. (File Photo)

सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) एक बार फिर कांग्रेस (Congress) की अध्यक्ष हो गई हैं, और उनकी पहली चुनौती आने वाले चार राज्यों के विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) हैं.

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सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) एक बार फिर कांग्रेस (Congress) की अध्यक्ष हो गई हैं, और उनकी पहली चुनौती आने वाले चार राज्यों के विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) हैं. जिस बाबत सोनिया गांधी ने प्रदेश के नेताओं और प्रभारियों के साथ ताबड़तोड़ बैठकें और फैसले भी लेने शुरू कर दिए हैं. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मंगलवार को झारखंड (Jharkhand) कांग्रेस के नवनियुक्त अध्यक्ष और कार्यकारी अध्यक्षों से मुलाकात की. उनके साथ झारखंड प्रभारी आरपीएन सिंह (RPN Singh) भी थे. सोनिया गांधी ने नई टीम से मुलाकात की और चुनाव की तैयारी प्रदेश में ब्लॉक स्तर तक करने की बात कही.

वहीं इसी दौरान सोनिया गांधी ने हरियाणा प्रभारी गुलाम नवी आज़ाद से भी मुलाकात की. राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ आज़ाद की ये मुलाकात कई मायने में महत्त्वपूर्ण मानी जा रही है. हरियाणा की अंदरूनी गुटबाजी कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती है, जिसे सोनिया गांधी भी बखूबी समझ रही हैं. यही कारण है कि पार्टी चुनाव से पहले नेतृत्व परिवर्तन पर भी विचार कर रही है. वहीं भूपेंद्र सिंह हुड्डा को संतुष्ट करने के लिए कोई पद देने पर भी आलाकमान विचार कर रही हैं. विधानसभा चुनाव वाले राज्यों में दिल्ली भी शामिल है, जहां शीला दीक्षित के निधन के बाद कांग्रेस बिना प्रदेश अध्यक्ष के चल रही है, इस मामले पर भी फैसले के लिए सोनिया गांधी ने शाम 4 बजे सभी पूर्व अध्यक्षों की बैठक अपने आवास पर बुलाई है, बताया जा रहा है कि सर्वसम्मति से दिल्ली में नए अध्यक्ष पर भी पार्टी आज भी बैठक में फैसला कर लेंगी.

राहुल के मुकाबले सोनिया गांधी के कांग्रेस में जल्द हो रहे फैसले
10 अगस्त को सोनिया गांधी को दुबारा राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई, 12 दिन के अंदर ही सोनिया गांधी ने दो अहम फैसले किए. जिसमें महाराष्ट्र चुनाव में उम्मीदवारों के चयन के लिए स्क्रीनिंग कमिटी और झारखंड कांग्रेस अध्यक्ष, स्क्रीनिंग कमिटी का गठन का फैसला ले लिया. अमुमन राहुल गांधी के कांग्रेस में ये आरोप लगाया जाता था कि फैसला लेने में देरी होती थी, लेकिन सोनिया गांधी ने कमान संभालते ही तुरंत फैसले लिए.

हरियाणा, दिल्ली, झारखंड, महाराष्ट्र में कांग्रेस अंदरूनी गुटबाजी से जूझ रही है. चुनाव के वक्त पार्टी को इससे होने वाले नुकसान को देखते हुए सोनिया गांधी ने प्रदेश की टीम में कार्यकारी अध्यक्ष का फॉर्मूला लगाया है. ताकि आपसी गुटबाजी खत्म हो और सभी नेताओं को कमिटी में जगह देकर सबको संतुष्ट किया जाए.

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First published: August 27, 2019, 9:59 PM IST
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