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पहले भी दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके हैं सुभाष चोपड़ा, इस बार सामने हैं बड़ी चुनौतियां

News18Hindi
Updated: October 23, 2019, 9:15 PM IST
पहले भी दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके हैं सुभाष चोपड़ा, इस बार सामने हैं बड़ी चुनौतियां
सुभाष चोपड़ा के सामने चुनौती है कि वो दिल्ली कांग्रेस को फिर से खड़ा करें. 2015 के विधानसभा चुनाव और बीते दो लोकसभा चुनाव में पार्टी का खाता भी नहीं खुला है.

कांग्रेस (Congress) ने पार्टी की दिल्ली इकाई (DPCC) का नया अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा (Subhash Chopra) को बनाया है. पार्टी ने एक विज्ञप्ति के जरिए यह भी जानकारी दी है कि कीर्ति आजाद को कैंपेन कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया गया है.

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  • Last Updated: October 23, 2019, 9:15 PM IST
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नई दिल्ली. कांग्रेस (Congress) ने पार्टी की दिल्ली इकाई (DPCC) का नया अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा (Subhash Chopra) को बनाया है. पार्टी ने एक विज्ञप्ति के जरिए यह भी जानकारी दी है कि कीर्ति आजाद को कैंपेन कमेटी का चेयरमैन नियुक्त किया गया है. गौरतलब है कि दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष का पद बीते जुलाई में शीला दीक्षित के देहांत के बाद से खाली था.

शीला दीक्षित के देहांत के बाद पार्टी आलाकमान के सामने ये चुनौती भी थी कि किसे दिल्ली कांग्रेस की कमान सौंपी जाए. इसका कारण ये है कि दिल्ली में अजय माकन को पार्टी अध्यक्ष बनाए जाने के बाद काफी गुटबाजी हुई थी. इस गुटबाजी के चक्कर में पुराने पार्टी नेताओं ने भी नाता तोड़ना शुरू कर दिया था. इसी क्रम में पुराने पार्टी नेता और शीला सरकार में मंत्री रह चुके अरविंदर सिंह लवली ने भी बीजेपी ज्वॉइन कर ली थी. हालांकि बाद में उनकी 'घरवापसी' भी हो गई थी.

पांच साल संभाल चुके हैं जिम्मेदारी
सुभाष चोपड़ा को दूसरी बार दिल्ली कांग्रेस की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इससे पहले वो 1998 से 2003 तक दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष रह चुके हैं. सुभाष चोपड़ा बुधवार को ही 72 वर्ष के हुए हैं. वो पार्टी संगठन में अंदर तक पैठ रखते हैं. सुभाष चोपड़ा कालकाजी विधानसभा सीट से तीन बार विधायक रह चुके हैं. वो पहली बार साल 1998 में विधायक बने थे और फिर 2003, 2008 में फिर चुनाव जीते थे. सुभाष ने अपनी राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी. वो 1970 में दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गए थे.

सियासत में हाथ आजमाने की दी गई थी छूट
दरियागंज में गोलचा के ठीक आगे कैपिटल सर्जिकल (capital surgical) नाम की कंपनी के दो बड़े शो रूम हैं. कैपिटल सर्जिकल, अस्पतालों में यूज़ होने वाला समान बनाती है. आप कह सकते हैं कि मार्केट लीडर हैं. यह दिल्ली कांग्रेस के नए अध्यक्ष बने सुभाष चोपड़ा की पारिवारिक कंपनी है. कैपिटल सर्जिकल को उनके दो बड़े भाइयों ने 1966 में शुरू किया था. उनके पिता तो दरियागंज में एक छोटी सी नौकरी करते थे. चोपड़ा को उनके भाई पुत्रवत मानते थे. उन्होंने सुभाष को सियासत में हाथ आजमाने की छूट दी हुई थी.

दिल्ली फुटबॉल के संरक्षक भी रह चुके हैं सुभाष चोपड़ा
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कालकाजी से 4 बार विधायक रहे सुभाष चोपड़ा मिंटो रोड, दरियागंज से महानगर पार्षद भी रहे हैं. नेशनल स्पोर्ट्स क्लब पर उनका दशकों तक राज रहा है. वे दिल्ली फुटबॉल के संरक्षक भी रहे हैं. दिल्ली के पंजाबी समाज से रिश्ता रखने वाले सुभाष की पत्नी एक वैश्य परिवार से है. उनकी एक पुत्री का विवाह PVR के मालिक से हुआ है.

सुभाष चोपड़ा के सामने चुनौती है कि कांग्रेस को दिल्ली की सत्ता में दोबारा वापस लेकर आएं. बीते विधानसभा चुनाव और बीते दो लोकसभा चुनावों में पार्टी अपना खाता भी नहीं खोल सकी है. बीते लोकसभा चुनाव में खुद शीला दीक्षित भी चुनाव मैदान में थीं लेकिन उन्हें बीजेपी सांसद मनोज तिवारी से हार का सामना करना पड़ा था.

कीर्ति झा आजाद को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
इससे पहले दिल्ली कांग्रेस का अध्यक्ष बनाए जाने को लेकर कीर्ति आजाद के भी नाम की चर्चाएं थीं. पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री भगवत झा आजाद के बेटे कीर्ति आजाद 1993 में कांग्रेस के टिकट पर दिल्ली के गोल मार्केट से विधायक चुने गए थे. लेकिन अगले चुनाव में हार के बाद उन्होंने बीजेपी ज्वाइन कर ली थी. उन्होंने करीब 2 दशक बाद कांग्रेस में वापसी की है.

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First published: October 23, 2019, 8:47 PM IST
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