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'परवाना' आने के बाद ही रिहा किए जाते हैं कैदी

News18Hindi
Updated: October 13, 2017, 2:53 PM IST
'परवाना' आने के बाद ही रिहा किए जाते हैं कैदी
वर्ष 2013 में सीबीआई कोर्ट ने ही तलवार दंपति को उम्र कैद की सजा सुनाई थी.
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Updated: October 13, 2017, 2:53 PM IST
बेशक राजेश ओर नूपुर तलवार की रिहाई के आदेश इलाहबाद हाईकोर्ट ने दिए हैं. लेकिन जेल से रिहाई का आदेश (परवाना) सीबीआई कोर्ट ही जारी करेगी. क्योंकि वर्ष 2013 में सीबीआई कोर्ट ने ही तलवार दंपति को उम्र कैद की सजा सुनाई थी.

ये ही वजह है कि तलवार दंपति की रिहाई का फैसला 12 अक्टूबर को सुनाया जा चुका है. लेकिन जेल से रिहाई में वक्त लग रहा है. तो आइए हम बताते हैं कि कोर्ट से फैसला आने के बाद भी जेल से रिहाई होने में इतना वक्त क्या लगता है. वो क्या प्रक्रिया है जो कोर्ट से लेकर जेल तक अपनाई जाती है.

क्रिमिनल मामलों के एडवोकेट एनडी पराशार की मानें तो जेल से रिहाई का परवाना जारी होने की एक प्रक्रिया है. वहीं जेल ने भी ने परवाना मिलने के बाद रिहाई के लिए एक निश्चित वक्त तय किया हुआ है.

पराशर का कहना है कि तलवार दंपति के मामले में पहले इलाहबाद हाईकोर्ट से जजमेंट की कॉपी सीबीआई कोर्ट में जाएगी. इसके लिए दो नियम हैं. एक तो ये कि हाईकोर्ट का कोई कर्मचारी सीबीआई कोर्ट में जजमेंट की कॉपी लेकर जाएगा.

या फिर बचाव पक्ष के वकील हाईकोर्ट की वेबसाइट से जजमेंट की कॉपी डाउनलोड कर सीबीआई कोर्ट में पेश कर सकते हैं. नियमानुसार जजमेंट की कॉपी 8 से 10 घंटे में वेबसाइट पर अपलोड कर दी जाती है.

जजमेंट की कॉपी सामने आते ही सीबीआई कोर्ट परवाना तैयार कर देगी. आमतौर पर इस प्रक्रिया में एक से दो घंटे लगते हैं. इसके बाद कोर्ट का एक कर्मचारी परवाना लेकर डासना जेल जाएगा. जेल के कर्मचारी परवाना की जांच करने के बाद तलवार दंपति की रिहाई की प्रक्रिया शुरु कर देंगे.

जानकारों की मानें तो इस सारी प्रक्रिया को पूरा करने में एक से डेढ़ घंटा लगता है. लेकिन बावजूद इसके सभी जेल प्रशासन ने बंदियों की रिहाई के लिए एक वक्त तय किया हुआ है. आमतौर पर शाम के वक्त बंदियों को रिहा कर दिया जाता है.
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